विकास का ढोंग बेनकाब: महुआडांड़ में बुजुर्गों को 20 किमी जंगल पार करने की मजबूरी, सिस्टम पर गंभीर सवाल

विकास का ढोंग बेनकाब: महुआडांड़ में बुजुर्गों को 20 किमी जंगल पार करने की मजबूरी, सिस्टम पर गंभीर सवाल

author News देखो Team
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#महुआडांड़ #विकास_संकट : जामडीह से सरनाडीह मार्ग जर्जर—ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही।

लातेहार के महुआडांड़ प्रखंड में जर्जर सड़क के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानी हो रही है। जामडीह से सरनाडीह तक मार्ग खराब होने से बुजुर्गों को 20 किमी तक पैदल चलना पड़ रहा है। स्वास्थ्य और राशन जैसी सुविधाएं दूर हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

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  • जामडीह-सरनाडीह मार्ग वर्षों से जर्जर
  • बुजुर्गों को 15-20 किमी पैदल चलने की मजबूरी
  • स्वास्थ्य और राशन के लिए कठिन पहुंच
  • एंबुलेंस सेवा पूरी तरह प्रभावित
  • ग्रामीणों ने प्रशासन से जवाबदेही मांगी

लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड अंतर्गत ओरसा पंचायत के जामडीह से सरनाडीह तक की सड़क की स्थिति ने एक बार फिर विकास के दावों की पोल खोल दी है। वर्षों से जर्जर पड़ी इस सड़क के कारण क्षेत्र के ग्रामीणों, विशेषकर बुजुर्गों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लंबी और कठिन दूरी तय करनी पड़ रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि इस क्षेत्र में रहने वाले 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को भी राशन, दवा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 15 से 20 किलोमीटर तक जंगल और कच्चे रास्तों से होकर पैदल चलना पड़ता है।

जर्जर सड़क से बढ़ी मुश्किलें

जामडीह से सरनाडीह तक का मार्ग पूरी तरह कच्चा और असमतल है।

एक ग्रामीण ने कहा: “सड़क नहीं होने के कारण हर दिन संघर्ष करना पड़ता है।”

यह स्थिति खासकर बारिश के मौसम में और भी गंभीर हो जाती है।

एंबुलेंस सेवा तक नहीं पहुंचती

आपातकालीन स्थिति में इस क्षेत्र में एंबुलेंस की पहुंच लगभग असंभव है।

एक ग्रामीण ने कहा: “मरीजों को कंधे या स्थानीय साधनों से ले जाना पड़ता है।”

इससे कई बार मरीजों की जान पर भी खतरा बन जाता है।

बुजुर्गों के लिए सबसे बड़ी चुनौती

बुजुर्गों को दवा और अन्य जरूरतों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जो उनके लिए बेहद कठिन होता है।

एक बुजुर्ग ने कहा: “इतनी दूर पैदल चलना हमारे लिए बहुत मुश्किल है।”

मतदान के लिए भी पैदल सफर

ग्रामीणों को मतदान के लिए भी लगभग 15 किलोमीटर पैदल चलकर सरनाडीह जाना पड़ता है।

एक महिला ने कहा: “मतदान करना हमारा अधिकार है, लेकिन यहां पहुंचना बहुत मुश्किल होता है।”

योजनाएं केवल कागजों तक सीमित

ग्रामीणों का आरोप है कि विकास योजनाएं केवल कागजों में ही रह जाती हैं।

एक ग्रामीण ने कहा: “हमें योजनाओं की जानकारी तो मिलती है, लेकिन सुविधा नहीं मिलती।”

बुनियादी सुविधाओं का अभाव

क्षेत्र में—

  • परिवहन व्यवस्था नहीं
  • स्वास्थ्य सेवाएं दूर
  • बाजार तक पहुंच मुश्किल

जैसी समस्याएं बनी हुई हैं।

प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप

स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन को इस समस्या से अवगत कराया है।

एक ग्रामीण ने कहा: “बार-बार शिकायत के बावजूद कोई समाधान नहीं हुआ।”

तत्काल कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से जल्द से जल्द सड़क निर्माण और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।

एक नागरिक ने कहा: “अगर जल्द सुधार नहीं हुआ, तो हालात और बिगड़ जाएंगे।”

विकास दावों पर उठे सवाल

यह मामला दिखाता है कि विकास के दावे और जमीनी हकीकत में कितना अंतर है।

न्यूज़ देखो: विकास का सच जमीन पर

महुआडांड़ की यह तस्वीर बताती है कि विकास के बड़े-बड़े दावे तभी सार्थक होंगे, जब वे जमीनी स्तर पर दिखें। क्या प्रशासन अब इस समस्या को प्राथमिकता देगा? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

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