
#पलामू #धार्मिक_मान्यता : माघ मास में गंगा स्नान को मोक्षदायक बताते हुए ज्योतिषी ने श्रद्धालुओं से आस्था निभाने की अपील की।
पलामू प्रमंडल के वरिष्ठ पत्रकार सह प्रसिद्ध ज्योतिषी पंडित राम निवास तिवारी ने माघ माह के धार्मिक महत्व को रेखांकित किया है। उन्होंने बताया कि 4 जनवरी से प्रारंभ हो रहे माघ मास में गंगा स्नान अत्यंत पुण्यदायक माना जाता है। ज्योतिषीय और पुराणिक मान्यताओं के अनुसार यह स्नान आत्मशुद्धि और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। श्रद्धालुओं के लिए यह आध्यात्मिक साधना का विशेष काल है।
- 4 जनवरी से पवित्र माघ मास की शुरुआत।
- पंडित राम निवास तिवारी ने गंगा स्नान को बताया मोक्षदायक।
- पद्म पुराण में वर्णित है माघ मास की पावनता।
- माघ स्नान से ग्रह दोष शांत होने की मान्यता।
- श्रद्धालुओं से कम से कम एक दिन गंगा स्नान की अपील।
माघ मास को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और पुण्यदायक माना गया है। इस माह में विशेष रूप से गंगा स्नान, दान, जप और तप का महत्व बताया गया है। पलामू प्रमंडल के जाने-माने पत्रकार सह ज्योतिषी पंडित राम निवास तिवारी ने माघ मास की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि यह काल आत्मशुद्धि, आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष प्राप्ति के लिए अत्यंत अनुकूल माना गया है। उन्होंने श्रद्धालुओं से इस पावन अवसर का लाभ उठाने की अपील की है।
माघ मास का ज्योतिषीय और धार्मिक महत्व
पंडित राम निवास तिवारी के अनुसार ज्योतिषीय दृष्टिकोण से माघ मास भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि भगवान विष्णु ने स्वयं माघ मास में गंगा स्नान कर इस माह को पवित्रता प्रदान की। यही कारण है कि इस मास में किए गए धार्मिक कर्मों का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है।
उन्होंने बताया कि पद्म पुराण में माघ मास को विशेष पुण्यकाल के रूप में वर्णित किया गया है। इस ग्रंथ के अनुसार माघ स्नान से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मन व शरीर दोनों की शुद्धि होती है।
गंगा स्नान से मोक्ष की प्राप्ति की मान्यता
पंडित तिवारी ने कहा कि माघ मास में गंगा स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। यह स्नान व्यक्ति को जन्म-मरण के बंधन से मुक्त कर मोक्ष की ओर अग्रसर करता है। उन्होंने बताया कि गंगा को मोक्षदायिनी कहा गया है और माघ मास में किया गया स्नान इस शक्ति को और अधिक प्रभावी बनाता है।
पंडित राम निवास तिवारी ने कहा: “माघ मास में गंगा स्नान से कुंडली के ग्रह मजबूत होते हैं और आत्मिक शुद्धि प्राप्त होती है।”
ग्रहों की स्थिति पर पड़ता है सकारात्मक प्रभाव
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार माघ मास में गंगा स्नान करने से कुंडली में ग्रहों की स्थिति सुदृढ़ होती है। इससे जीवन में आ रही बाधाएं कम होती हैं और मानसिक शांति प्राप्त होती है। पंडित तिवारी के अनुसार यह स्नान न केवल धार्मिक, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी है।
उन्होंने कहा कि आज के तनावपूर्ण जीवन में माघ स्नान व्यक्ति को आत्मचिंतन और शांति का अवसर प्रदान करता है, जिससे जीवन की दिशा सकारात्मक बनती है।
राजा भागीरथ से जुड़ी पौराणिक कथा
माघ मास की महत्ता को बताते हुए पंडित राम निवास तिवारी ने एक दंत कथा का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि मान्यता के अनुसार राजा भागीरथ माघ मास में लाया गया गंगाजल पूरे वर्ष अपने घर में रखकर पूजा-पाठ में उपयोग करते थे। इससे उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती थी।
यह कथा माघ मास और गंगाजल की पवित्रता को और अधिक मजबूत करती है तथा श्रद्धालुओं की आस्था को गहरा करती है।
श्रद्धालुओं से विशेष अपील
पंडित तिवारी ने आम लोगों से अपील की कि वे माघ मास में कम से कम एक दिन गंगा स्नान अवश्य करें। उन्होंने कहा कि स्नान के बाद मां गंगा को धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित कर आशीर्वाद लें तथा गंगाजल अपने घर ले जाकर पूजा-पाठ में उपयोग करें।
उनका कहना है कि यह छोटा सा धार्मिक अनुष्ठान भी जीवन में बड़े सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
न्यूज़ देखो: आस्था और परंपरा से जुड़ा आत्मशुद्धि का संदेश
माघ मास में गंगा स्नान को लेकर दिया गया यह संदेश भारतीय सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं की गहराई को दर्शाता है। पंडित राम निवास तिवारी का वक्तव्य यह बताता है कि आज भी पुराणिक मान्यताएं समाज को आत्मिक शांति और सकारात्मक जीवन मूल्यों की ओर प्रेरित करती हैं। यह अवसर केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और सामाजिक सद्भाव का भी प्रतीक है। आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की भागीदारी इस परंपरा की जीवंतता को और मजबूत करेगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आस्था के साथ आगे बढ़ें, परंपरा को जीवन में उतारें
माघ मास हमें आत्मशुद्धि और संयम का संदेश देता है। यह समय है जब हम अपनी दिनचर्या में सकारात्मकता और धार्मिक मूल्यों को शामिल कर सकते हैं। गंगा स्नान केवल एक कर्मकांड नहीं, बल्कि आत्मिक जागरण का माध्यम है।
आइए, इस पावन अवसर पर अपनी परंपराओं को समझें और उन्हें सम्मान दें।
आपकी आस्था और अनुभव इस खबर को और समृद्ध बना सकते हैं।
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