छह साल से अधूरा पुल बना हादसों की वजह, JMM सचिव तेज बहाव में डूबने से बचे

छह साल से अधूरा पुल बना हादसों की वजह, JMM सचिव तेज बहाव में डूबने से बचे

author News देखो Team
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#लातेहार #अधूरापुलहादसा : करवाई पंचायत में बहते पानी के बीच फंसे JMM नेता — ग्रामीणों की बहादुरी से बची जान, पुल निर्माण में लापरवाही से ग्रामीणों में गुस्सा
  • JMM बरवाडीह प्रखंड सचिव रितेश कुमार तेज बहाव में डूबते-डूबते बचे
  • करवाई पंचायत में छह-सात साल से अधूरा पड़ा है पुल निर्माण
  • समय रहते ग्रामीणों ने जान जोखिम में डालकर की सचिव की जान बचाई
  • ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन व संवेदक पर उठाए सवाल
  • जल्द पुल निर्माण पूरा नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई

बहाव में फंसे JMM सचिव, ग्रामीणों की सूझबूझ से बची जान

लातेहार जिले के गारू प्रखंड अंतर्गत करवाई पंचायत में गुरुवार को एक बड़ा हादसा टल गया। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के बरवाडीह प्रखंड सचिव रितेश कुमार तेज बहाव में फंस गए थे और डूबने की स्थिति में पहुंच गए थे।

घटना उस समय हुई जब रितेश कुमार अधूरे पुल से नदी पार कर रहे थे। बारिश के कारण नदी का जलस्तर ऊंचा था और तेज बहाव के बीच उनका संतुलन बिगड़ गया। स्थिति इतनी गंभीर थी कि उनकी जान पर बन आई, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों ने बहादुरी दिखाते हुए उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

छह साल से अधूरा पुल बना खतरे का कारण

करवाई पंचायत में छह-सात साल पहले पुल निर्माण की शुरुआत हुई थी, लेकिन यह आज तक अधूरा पड़ा है। संवेदक की लापरवाही और प्रशासन की उदासीनता के कारण यह हादसों की जगह बन चुका है।

बरसात के मौसम में जब नदी उफान पर होती है, तब स्थानीय लोग जान जोखिम में डालकर ही आने-जाने को मजबूर होते हैं। इस बार तो JMM नेता खुद हादसे का शिकार होते-होते बचे, जिससे पूरे क्षेत्र में गंभीर नाराजगी का माहौल है।

प्रशासन और संवेदक पर जमकर बरसे रितेश कुमार

JMM प्रखंड सचिव रितेश कुमार ने कहा: “हम खुद इस अधूरे पुल की वजह से हादसे का शिकार होते-होते बचे हैं। सोचिए आम ग्रामीणों की हालत क्या होती होगी। यह संवेदक और प्रशासन की खुली लापरवाही है। अगर जल्द निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ तो हम जोरदार आंदोलन करेंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार अधिकारियों को इस मुद्दे से अवगत कराया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब जब जनप्रतिनिधि खुद हादसे का शिकार बनते-बचते हैं, तब जाकर प्रशासन को होश आ रहा है।

मुखिया ने भी मानी संवेदक की गलती

इस घटना के बाद करवाई पंचायत के मुखिया सुनेश्वर सिंह ने भी पुल निर्माण को लेकर संवेदक की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया।

मुखिया सुनेश्वर सिंह ने कहा: “छह-सात साल से पुल अधूरा पड़ा है। हमने कई बार संवेदक को चेताया, लेकिन काम अब तक पूरा नहीं हुआ।

ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल संज्ञान लेने और पुल निर्माण शीघ्र पूरा कराने की मांग की है। सभी का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है।

न्यूज़ देखो: अधूरे विकास की कीमत क्यों चुकाएं ग्रामीण?

छह-सात साल से अधूरा पड़ा पुल प्रशासन और संवेदक की नाकामी का आईना है। एक ओर सरकार ग्रामीण विकास की बात करती है, वहीं दूसरी ओर ऐसे हादसे सरकारी दावों की पोल खोलते हैं। ‘न्यूज़ देखो’ इस मुद्दे को पूरी मजबूती से उठाता है, ताकि जनजीवन से जुड़े कार्यों में लापरवाही पर कार्रवाई हो।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सुरक्षित ग्रामीण जीवन के लिए अब ठोस कदम जरूरी

अब वक्त आ गया है कि प्रशासन और निर्माण एजेंसियां अपनी जिम्मेदारियों को समझें। लोगों की जान से जुड़ी परियोजनाओं में लापरवाही कभी भी जानलेवा साबित हो सकती है। हम सभी को जागरूक बनकर ऐसी लापरवाहियों पर सवाल उठाना होगा।

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