
#बगोदर #अपहृत_मजदूर : पश्चिमी अफ्रीका के नाइजर में अपहृत बगोदर के पांच प्रवासी मजदूरों की सुरक्षित रिहाई का मुद्दा लोकसभा में उठाया गया।
- नाइजर में अपहृत बगोदर प्रखंड के पांच प्रवासी मजदूरों का मामला लोकसभा में उठा।
- भाकपा माले सांसद सुदामा प्रसाद ने शुक्रवार को सदन में उठाया विषय।
- विदेश राज्य मंत्री कीर्तवर्धन सिंह ने सरकार की ओर से दिया जवाब।
- भारतीय दूतावास और नई दिल्ली स्थित नाइजर दूतावास के माध्यम से नाइजर सरकार से संपर्क।
- 25 अप्रैल 2025 को हथियारबंद अपराधियों ने किया था अपहरण।
- आठ माह बीतने के बाद भी मजदूरों का कोई ठोस सुराग नहीं, परिजनों की चिंता बढ़ी।
पश्चिमी अफ्रीका के नाइजर में अपहृत झारखंड के गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड के पांच प्रवासी मजदूरों की सुरक्षित रिहाई का मामला शुक्रवार को लोकसभा में गूंजा। बिहार से भाकपा माले के सांसद सुदामा प्रसाद ने इस गंभीर मानवीय मुद्दे को सदन में उठाते हुए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप और त्वरित कार्रवाई की मांग की। यह मामला न केवल विदेशों में काम कर रहे भारतीय मजदूरों की सुरक्षा से जुड़ा है, बल्कि उनके परिजनों की महीनों से जारी पीड़ा और अनिश्चितता को भी उजागर करता है।
लोकसभा में सरकार का जवाब
मामले पर सरकार की ओर से विदेश राज्य मंत्री कीर्तवर्धन सिंह ने लोकसभा में जवाब दिया। उन्होंने बताया कि भारत सरकार इस प्रकरण को गंभीरता से ले रही है और कूटनीतिक स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
विदेश राज्य मंत्री कीर्तवर्धन सिंह ने कहा: “इस मामले को भारतीय दूतावास तथा नई दिल्ली स्थित नाइजर दूतावास के माध्यम से नाइजर सरकार के समक्ष उठाया गया है और अगवा किए गए भारतीय नागरिकों की सुरक्षित एवं शीघ्र रिहाई के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है।”
मंत्री के इस बयान से परिजनों को कुछ उम्मीद जरूर बंधी है, लेकिन अब भी वे ठोस परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
25 अप्रैल 2025 को हुआ था अपहरण
जानकारी के अनुसार, 25 अप्रैल 2025 को पश्चिमी अफ्रीका के नाइजर में हथियारबंद अपराधियों ने बगोदर प्रखंड के पांच प्रवासी मजदूरों का अपहरण कर लिया था। अपहृत मजदूरों में—
- राजु महतो, निवासी दोंदलो
- संजय महतो, निवासी दोंदलो
- फलजीत महतो, निवासी दोंदलो
- चन्द्रिका महतो, निवासी दोंदलो
- उत्तम महतो, निवासी मुंडरो
शामिल हैं। ये सभी मजदूर रोजगार के सिलसिले में नाइजर गए हुए थे, जहां यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी।
आठ माह बाद भी कोई ठोस सुराग नहीं
अपहरण की घटना को अब आठ माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक इन मजदूरों के संबंध में कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आ सकी है। न तो उनकी स्थिति का स्पष्ट पता चल पाया है और न ही किसी तरह की प्रत्यक्ष सूचना उनके सुरक्षित होने या रिहाई को लेकर मिली है।
इस लंबे इंतजार ने परिजनों की चिंता और बेचैनी को और बढ़ा दिया है। बगोदर और आसपास के इलाकों में उनके परिवार हर दिन किसी अच्छी खबर की आस में हैं। परिजनों का कहना है कि महीनों से अनिश्चितता के कारण उनका सामान्य जीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है।
परिजनों की बढ़ती चिंता और उम्मीद
अपहृत मजदूरों के परिजन लगातार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से संपर्क कर रहे हैं। उनका कहना है कि परिवार के कमाने वाले सदस्यों के अचानक गायब हो जाने से आर्थिक संकट भी गहरा गया है। बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और सामाजिक जिम्मेदारियां सब कुछ प्रभावित हो रहा है।
परिजनों ने लोकसभा में मुद्दा उठने को एक सकारात्मक कदम बताया है। उनका मानना है कि संसद में चर्चा होने से केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय की सक्रियता और बढ़ेगी, जिससे नाइजर सरकार पर भी दबाव बनेगा।
विदेशों में काम कर रहे मजदूरों की सुरक्षा पर सवाल
यह मामला विदेशों में काम कर रहे भारतीय मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। खासकर अफ्रीकी देशों में काम कर रहे मजदूरों को लेकर समय-समय पर अपहरण और हिंसा की खबरें सामने आती रही हैं। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि सरकार न केवल रिहाई के प्रयास करे, बल्कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए भी ठोस नीति बनाए।
स्थानीय सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि प्रवासी मजदूरों को विदेश भेजने से पहले सुरक्षा, बीमा और आपातकालीन सहायता से जुड़ी जानकारी और व्यवस्थाएं और मजबूत की जानी चाहिए।
बगोदर में बना हुआ है चिंताजनक माहौल
बगोदर प्रखंड के दोंदलो और मुंडरो गांवों में अपहरण की घटना के बाद से ही चिंताजनक माहौल बना हुआ है। गांव के लोग भी परिजनों के साथ खड़े हैं और सरकार से जल्द से जल्द मजदूरों की सुरक्षित वापसी की मांग कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज है।
न्यूज़ देखो: संसद तक पहुंची पीड़ा, अब परिणाम की उम्मीद
नाइजर में अपहृत बगोदर के मजदूरों का मामला लोकसभा में उठना यह दर्शाता है कि यह सिर्फ एक स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चिंता का विषय है। सरकार की ओर से कूटनीतिक प्रयासों की जानकारी दी गई है, लेकिन आठ माह बाद भी परिणाम न आना गंभीर है। अब जरूरत है कि प्रयास और तेज हों और परिजनों को जल्द राहत मिले।
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सुरक्षित वापसी के लिए एकजुट आवाज जरूरी
विदेशों में काम कर रहे मजदूर देश की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान देते हैं, ऐसे में उनकी सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। बगोदर के मजदूरों की सुरक्षित रिहाई केवल उनके परिवारों की नहीं, बल्कि पूरे समाज की उम्मीद है।
अब समय है कि इस मुद्दे पर निरंतर दबाव बना रहे और मानवीय संवेदना के साथ ठोस कदम उठाए जाएं।
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