
#बगोदर #बलिदान_दिवस : झारखंड के वीर सपूतों की शहादत को जन-जन तक पहुंचाने की तैयारी
- झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) की महत्वपूर्ण बैठक बगोदर स्टेडियम में आयोजित।
- 8 जनवरी को शेख भिखारी व टिकैत उमराव सिंह के बलिदान दिवस को भव्य रूप से मनाने का निर्णय।
- बलिदान दिवस को ऐतिहासिक स्वरूप देने के लिए ग्रामीण इलाकों में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाने पर सहमति।
- अधिक से अधिक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कार्यकर्ताओं को सौंपी गई जिम्मेदारियां।
- बैठक की अध्यक्षता नुरुल नबी सिद्दीकी ने की, कई प्रमुख नेता रहे उपस्थित।
गिरिडीह जिले के बगोदर में सोमवार को झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें आगामी 8 जनवरी को झारखंड के महान स्वतंत्रता सेनानी शेख भिखारी एवं टिकैत उमराव सिंह के बलिदान दिवस को भव्य और ऐतिहासिक रूप से मनाने का निर्णय लिया गया। यह बैठक बगोदर स्टेडियम परिसर में संपन्न हुई, जिसमें संगठन के कई प्रमुख पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि शेख भिखारी और टिकैत उमराव सिंह जैसे वीर सपूतों की शहादत केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित न रहे, बल्कि उनकी कुर्बानी और विचारधारा को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए। इसी उद्देश्य से बलिदान दिवस कार्यक्रम को जन आंदोलन का स्वरूप देने की रणनीति बनाई गई।
ऐतिहासिक बलिदान को जन आंदोलन बनाने की तैयारी
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 8 जनवरी को आयोजित होने वाला बलिदान दिवस कार्यक्रम केवल औपचारिक आयोजन न होकर, जनस्मृति और जनचेतना को जागृत करने वाला कार्यक्रम होगा। इसके लिए ग्रामीण इलाकों में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इस कार्यक्रम में भाग लेकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें।
जेएलकेएम नेताओं ने कहा कि शेख भिखारी और टिकैत उमराव सिंह ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करते हुए झारखंड की अस्मिता, जल-जंगल-जमीन और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। ऐसे महान बलिदानियों को याद करना केवल एक दिन का कार्य नहीं, बल्कि समाज को उनके आदर्शों पर चलने की प्रेरणा देना है।
जनसंपर्क अभियान पर विशेष जोर
बैठक में यह भी तय किया गया कि बलिदान दिवस से पूर्व गांव-गांव जाकर जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान शहीदों के जीवन, संघर्ष और बलिदान से जुड़ी जानकारियां लोगों तक पहुंचाई जाएंगी। कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई कि वे ग्रामीणों, युवाओं, छात्रों और सामाजिक संगठनों से संवाद कर उन्हें कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रेरित करें।
नेताओं ने कहा कि झारखंड का इतिहास बलिदानों से भरा हुआ है, लेकिन आज भी कई वीरों की कुर्बानियां उचित सम्मान और पहचान से वंचित हैं। ऐसे में बलिदान दिवस के माध्यम से समाज को अपने इतिहास से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
बैठक की अध्यक्षता और प्रमुख उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता नुरुल नबी सिद्दीकी ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि शेख भिखारी और टिकैत उमराव सिंह केवल किसी एक समाज या वर्ग के नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के गौरव हैं। उनके बलिदान को याद करना हर झारखंडवासी का नैतिक दायित्व है।
बैठक में आसिफ अंसारी, सलीम अख्तर, शेख शाहिद, मुमताज अंसारी, अमजद खान, सिकंदर अली, फिरोज़ आलम सहित संगठन के कई सक्रिय सदस्य मौजूद थे। सभी ने एक स्वर में बलिदान दिवस कार्यक्रम को सफल और ऐतिहासिक बनाने के लिए पूरी ताकत झोंकने का संकल्प लिया।
युवाओं को जोड़ने की रणनीति
बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि कार्यक्रम में युवाओं की भागीदारी कैसे बढ़ाई जाए। नेताओं ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को अपने इतिहास और शहीदों के संघर्ष से जोड़ना बेहद जरूरी है, ताकि वे अपने अधिकारों, संस्कृति और पहचान के प्रति सजग हो सकें। इसके लिए सोशल मीडिया, जनसभाओं और संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं तक पहुंचने की योजना बनाई गई।
न्यूज़ देखो: इतिहास से जुड़ने का अवसर
बगोदर में जेएलकेएम द्वारा लिया गया यह निर्णय झारखंड के शहीदों को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यदि इस तरह के आयोजन निरंतर होते रहें, तो समाज में ऐतिहासिक चेतना और सामाजिक एकता को मजबूती मिलेगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
बलिदान को स्मरण ही नहीं, आत्मसात करने का समय
शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि तभी है, जब हम उनके विचारों को अपने जीवन में उतारें।
8 जनवरी को आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में अधिक से अधिक भागीदारी निभाएं।
आप भी अपने क्षेत्र के युवाओं और ग्रामीणों को जोड़ें और इतिहास को जीवंत बनाएं।
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