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खैयवा पर्यटक स्थल पर दो दिनों तक उमड़ा जनसैलाब, प्राकृतिक सौंदर्य और परंपरा ने सैलानियों को किया आकर्षित

#लावालौंग #पर्यटन_आकर्षण : खैयवा पर्यटक स्थल पर दो दिनों तक भारी भीड़, प्रकृति और आस्था का अनोखा संगम दिखा।

चतरा जिले के लावालौंग प्रखंड अंतर्गत खैयवा पर्यटक स्थल पर बुधवार और गुरुवार को भारी संख्या में पर्यटक पहुंचे। प्राकृतिक सौंदर्य, झरने और धार्मिक आस्था के कारण यह स्थल वर्षों से लोगों को आकर्षित करता रहा है। मकर संक्रांति के अवसर पर सैलानियों ने यहां स्नान कर पारंपरिक चूड़ा और तिलकुट का आनंद लिया। लगातार बढ़ती भीड़ ने एक ओर पर्यटन की संभावना दिखाई तो दूसरी ओर बुनियादी सुविधाओं की कमी को भी उजागर किया।

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  • लावालौंग प्रखंड के खैयवा पर्यटक स्थल पर दो दिनों तक उमड़ी भारी भीड़।
  • दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे पर्यटक, झरने में किया स्नान।
  • चूड़ा–तिलकुट के साथ मकर संक्रांति का उत्सव मनाया गया।
  • खैयवा विकास समिति के सदस्य व्यवस्था संभालते दिखे।
  • मोबाइल नेटवर्क, सड़क और बिजली जैसी सुविधाओं की कमी उजागर।
  • आपात स्थिति के लिए रेस्क्यू टीम की तैनाती की मांग तेज।

चतरा जिले के लावालौंग प्रखंड क्षेत्र में स्थित खैयवा पर्यटक स्थल एक बार फिर सैलानियों की भीड़ से गुलजार नजर आया। कटिया पंचायत अंतर्गत रूगुद बंदारू गांव में स्थित इस प्रसिद्ध स्थल पर बुधवार और गुरुवार—दोनों ही दिनों में हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक मान्यता और पारंपरिक उत्सव के मेल ने इस क्षेत्र को खास बना दिया। दो दिनों तक चले इस उत्साहपूर्ण माहौल में खैयवा पूरी तरह पर्यटन केंद्र के रूप में उभरता दिखा।

खैयवा की प्राकृतिक सुंदरता बनी आकर्षण का केंद्र

खैयवा (खैबा) पर्यटक स्थल प्राचीन काल से ही अपने अनोखे प्राकृतिक स्वरूप के लिए जाना जाता है। यहां स्थित विशाल पत्थरों पर बनी प्राकृतिक नक्काशी किसी कुशल कारीगर की कला जैसी प्रतीत होती है। चारों ओर फैली हरियाली, झरने का निर्मल और शीतल जल तथा कुएं जैसी गहराई इस स्थल को रहस्यमय और मनमोहक बनाती है।

प्राकृतिक संरचना और शांत वातावरण के कारण खैयवा न केवल पर्यटन बल्कि आस्था का भी प्रमुख केंद्र माना जाता है। यही वजह है कि हर वर्ष विशेष अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ती है।

मकर संक्रांति पर चूड़ा–तिलकुट और स्नान का आनंद

मकर संक्रांति के अवसर पर पहुंचे पर्यटकों ने समूह बनाकर झरने के ठंडे पानी में स्नान किया। स्नान के बाद लोगों ने पारंपरिक चूड़ा और तिलकुट का आनंद लिया, जो इस पर्व की विशेष पहचान है। झरने के आसपास का दृश्य मेले जैसा प्रतीत हो रहा था।

स्थल पर लगे अस्थायी मेले में लोगों ने जमकर खरीदारी की। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में उत्साह देखने को मिला। कई श्रद्धालुओं ने स्नान के उपरांत स्थानीय मंदिरों में पूजा–अर्चना कर क्षेत्र की सुख–शांति और समृद्धि की कामना की।

खैयवा विकास समिति की सक्रिय भूमिका

दो दिनों तक चली भारी भीड़ के बीच खैयवा विकास समिति के सदस्य लगातार सक्रिय नजर आए। समिति के सदस्यों ने भीड़ नियंत्रण, मार्गदर्शन और पर्यटकों की सहायता में अहम भूमिका निभाई। उनके प्रयास से किसी भी प्रकार की बड़ी अव्यवस्था की स्थिति नहीं बनी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद समिति ने जिम्मेदारी का परिचय दिया और पर्यटकों को सहयोग प्रदान किया, जिससे आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सका।

बुनियादी सुविधाओं की कमी बनी चिंता का विषय

हालांकि, बड़ी संख्या में पहुंचे पर्यटकों ने खैयवा की मूलभूत समस्याओं की ओर भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। लोगों का कहना है कि इतना प्रसिद्ध पर्यटन स्थल होने के बावजूद यहां अब भी मोबाइल नेटवर्क, पक्की सड़क, और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।

इसके अलावा, खैयवा की अधिक गहराई और दो दिनों तक रही भारी भीड़ को देखते हुए किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम की तैनाती आवश्यक मानी जा रही है। स्थानीय ग्रामीणों और पर्यटकों का मानना है कि थोड़ी सी लापरवाही बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

पर्यटन विकास की मांग हुई तेज

पर्यटकों और स्थानीय ग्रामीणों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि खैयवा को एक विकसित पर्यटन स्थल के रूप में चिन्हित किया जाए। उनका कहना है कि यदि सड़क, बिजली, नेटवर्क और सुरक्षा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो यह स्थल राज्य के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल हो सकता है।

लोगों का मानना है कि इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

न्यूज़ देखो: पर्यटन संभावनाओं के बीच प्रशासनिक जिम्मेदारी की परीक्षा

खैयवा पर्यटक स्थल पर उमड़ी भीड़ यह दर्शाती है कि इस क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। लेकिन सुविधाओं की कमी प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती भी उजागर करती है। यदि समय रहते आधारभूत संरचनाओं और सुरक्षा इंतजामों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में जोखिम बढ़ सकता है। अब यह देखना अहम होगा कि जिला प्रशासन और राज्य सरकार इस लोकप्रिय स्थल के विकास को लेकर क्या ठोस कदम उठाते हैं।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

प्रकृति, आस्था और जिम्मेदारी का संगम

खैयवा जैसे प्राकृतिक स्थल हमारी सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर हैं।
इनकी सुंदरता तभी सुरक्षित रह सकती है, जब विकास के साथ सुरक्षा और सुविधा पर भी ध्यान दिया जाए।
पर्यटन के प्रति जागरूकता और प्रशासनिक सक्रियता से ऐसे स्थल नई पहचान पा सकते हैं।

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Binod Kumar

लावालोंग, चतरा

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