
#जलडेगा #बुजुर्ग_संवाद : प्लस टू विद्यालय परिसर में बुजुर्गों ने साझा की पीड़ा, समाधान पर बनी सहमति।
सिमडेगा जिले के जलडेगा स्थित श्री पीएम एस एस प्लस टू उच्च विद्यालय परिसर में बुजुर्ग जागृति समिति द्वारा मिलन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति अध्यक्ष हेमशरण सिंह ने की, जिसमें बुजुर्गों की सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक समस्याओं पर खुलकर चर्चा हुई। समारोह के दौरान बुजुर्ग महिलाओं सहित कई सदस्यों ने अपनी पीड़ा साझा की और एकजुट होकर समाधान की आवश्यकता पर बल दिया। आयोजन का उद्देश्य बुजुर्गों को संगठित कर उनके अधिकारों और समस्याओं के लिए सामूहिक प्रयास को मजबूत करना रहा।
- जलडेगा प्लस टू उच्च विद्यालय परिसर में बुजुर्ग जागृति समिति का मिलन समारोह।
- हेमशरण सिंह की अध्यक्षता में बुजुर्गों की समस्याओं पर विस्तृत चर्चा।
- हीरामणि देवी और चंद्रमा देवी ने साझा की बुजुर्ग महिलाओं की पीड़ा।
- महिला व पुरुष बुजुर्गों ने मिलजुलकर समाधान का लिया संकल्प।
- चतुर बड़ाईक, अघना खड़िया, ऐरेनियुस लूगून, राफैल कंडुलना सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया।
सिमडेगा जिले के जलडेगा प्रखंड में बुजुर्गों को एक मंच पर जोड़ने की दिशा में बुजुर्ग जागृति समिति द्वारा आयोजित यह मिलन समारोह महत्वपूर्ण साबित हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बुजुर्ग महिला और पुरुष शामिल हुए और अपनी समस्याओं को खुलकर सामने रखा। अध्यक्षीय संबोधन से लेकर महिला बुजुर्गों की पीड़ा तक, पूरे आयोजन में संवाद और सहयोग की भावना स्पष्ट रूप से देखने को मिली। समारोह ने यह संदेश दिया कि बुजुर्गों की समस्याओं का समाधान तभी संभव है, जब वे स्वयं संगठित होकर अपनी आवाज बुलंद करें।
अध्यक्षीय संबोधन में एकजुटता पर जोर
मिलन समारोह की अध्यक्षता करते हुए बुजुर्ग जागृति समिति के अध्यक्ष हेमशरण सिंह ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने कहा कि समाज में बुजुर्गों की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं, जिनमें आर्थिक असुरक्षा, स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें और पारिवारिक उपेक्षा प्रमुख हैं।
उन्होंने कहा:
हेमशरण सिंह ने कहा: “बुजुर्गों की समस्याओं का समाधान तभी संभव है जब हम सभी एकजुट होकर आपसी सहमति से आगे बढ़ें और मिलजुलकर समाधान निकालें।”
उन्होंने सभी बुजुर्गों से आह्वान किया कि वे समिति के माध्यम से अपनी समस्याओं को साझा करें, ताकि सामूहिक प्रयास से ठोस समाधान की दिशा में कदम उठाया जा सके।
बुजुर्ग महिलाओं ने साझा की अपनी पीड़ा
कार्यक्रम के दौरान बुजुर्ग महिला हीरामणि देवी और चंद्रमा देवी ने मंच से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बुजुर्ग महिलाओं को कई स्तरों पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जिनमें स्वास्थ्य, सम्मान और पारिवारिक सहयोग की कमी शामिल है।
उन्होंने यह भी कहा कि अक्सर उनकी समस्याएं अनसुनी रह जाती हैं, लेकिन ऐसे मंच उन्हें अपनी बात रखने का साहस और समर्थन देते हैं। दोनों बुजुर्ग महिलाओं ने समिति से अपेक्षा जताई कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेकर समाधान की दिशा में ठोस पहल की जाएगी।
समिति का संकल्प: महिला और पुरुष सभी बुजुर्गों के लिए समान प्रयास
मिलन समारोह में यह स्पष्ट किया गया कि बुजुर्ग जागृति समिति महिला हो या पुरुष, सभी बुजुर्गों के हित में काम करेगी। वक्ताओं ने कहा कि समिति का उद्देश्य केवल समस्याओं को गिनाना नहीं, बल्कि आपसी सहमति और सहयोग से समाधान निकालना है।
समिति के सदस्यों ने भरोसा दिलाया कि बुजुर्गों से जुड़े मुद्दों को प्रशासन और समाज के सामने भी मजबूती से रखा जाएगा, ताकि उन्हें उनका हक और सम्मान मिल सके।
अन्य वक्ताओं के विचार और कार्यक्रम संचालन
समारोह को चतुर बड़ाईक, अघना खड़िया, ऐरेनियुस लूगून और राफैल कंडुलना सहित कई लोगों ने संबोधित किया। वक्ताओं ने बुजुर्गों के अनुभव को समाज की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि उनका सम्मान और संरक्षण समाज की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम का मंच संचालन अघना खड़िया ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन ऐरेनियुस लूगून द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने सभी उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन बुजुर्गों में आत्मविश्वास और एकजुटता को बढ़ाते हैं।
बड़ी संख्या में बुजुर्गों की रही उपस्थिति
इस अवसर पर रघुनाथ सिंह, आनंद सिंह, जगदीश बडाईक, इलियास कंडुलना, सुनील एक्का, भागीरथी बड़ाईक, लीलु सिंह, राजकिशोर कांशीर, लाल मोहन सिंह, गजेशवर सिंह, लोदो सिंह, देवनारायण नायक सहित कई बुजुर्गों की मौजूदगी रही। सभी ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे बुजुर्गों के लिए उपयोगी पहल बताया।
उपस्थित बुजुर्गों ने कहा कि ऐसे मंच उन्हें अपनी समस्याओं को साझा करने और समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर देते हैं।
न्यूज़ देखो: बुजुर्गों की आवाज को संगठित करने की पहल
जलडेगा में आयोजित यह मिलन समारोह बताता है कि बुजुर्गों की समस्याओं का समाधान केवल व्यक्तिगत प्रयास से नहीं, बल्कि सामूहिक संगठन से संभव है। बुजुर्ग जागृति समिति का यह प्रयास समाज में बुजुर्गों की भूमिका और सम्मान को पुनः स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अब आवश्यकता है कि इन चर्चाओं को ठोस कार्ययोजना में बदला जाए, ताकि बुजुर्गों को वास्तविक राहत मिल सके। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अनुभव का सम्मान, समाधान की ओर सामूहिक कदम
बुजुर्ग समाज का अनुभव किसी भी समुदाय की सबसे बड़ी पूंजी होता है। जब बुजुर्ग एकजुट होकर अपनी समस्याओं पर संवाद करते हैं, तो समाधान की राह स्वतः खुलने लगती है। ऐसे आयोजन न केवल पीड़ा साझा करने का मंच बनते हैं, बल्कि आत्मसम्मान और अधिकारों के प्रति जागरूकता भी बढ़ाते हैं।





