
#गिरिडीह #मजदूर_बैठक : महुआ टांड़ में असंगठित मजदूर मोर्चा की अहम बैठक।
गिरिडीह प्रखंड के महुआ टांड़ में 28 फरवरी 2026 को असंगठित मजदूर मोर्चा और भाकपा माले प्रखंड कमेटी की बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता कॉमरेड मसूदन कोल ने की, जिसमें सदस्यता अभियान और श्रम कानूनों को लेकर आंदोलन की रणनीति तय की गई। 15 मार्च 2026 तक पार्टी सदस्यता अभियान चलाने और लेबर कोड समेत अन्य मुद्दों पर धरना देने का निर्णय लिया गया। मजदूरों से एकजुट होकर संगठन मजबूत करने की अपील की गई।
- 28 फरवरी 2026, महुआ टांड़, गिरिडीह प्रखंड में बैठक आयोजित।
- अध्यक्षता कॉमरेड मसूदन कोल ने की।
- 15 मार्च 2026 तक सदस्यता अभियान चलाने का निर्णय।
- चार लेबर कोड और बालमुकुंद स्पांज आयरन कंपनी के विरोध में धरना की घोषणा।
- बैठक में किशोर राय, कन्हाय पाण्डेय, सनातन साहु सहित कई कार्यकर्ता मौजूद।
गिरिडीह प्रखंड के महुआ टांड़ में शनिवार 28 फरवरी 2026 को असंगठित मजदूर मोर्चा और भाकपा माले प्रखंड कमेटी की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कॉमरेड मसूदन कोल ने की। इसमें मजदूरों के संगठन विस्तार, सदस्यता अभियान और श्रम कानूनों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। सर्वसम्मति से कई अहम निर्णय लिए गए, जिनमें आगामी आंदोलन की रूपरेखा भी शामिल है।
15 मार्च तक चलेगा सदस्यता अभियान
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आगामी 15 मार्च 2026 तक पार्टी का सदस्यता अभियान चलाया जाएगा। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक असंगठित और फैक्ट्री मजदूरों को संगठन से जोड़ना है।
नेताओं ने कहा कि मजदूरों की समस्याओं के समाधान के लिए संगठित होना जरूरी है। सदस्यता अभियान के माध्यम से मजदूरों को उनके अधिकारों और श्रम कानूनों की जानकारी भी दी जाएगी।
लेबर कोड और कंपनी के खिलाफ धरना का ऐलान
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि आगामी 12 फरवरी 2025 को सहायक लेबर ऑफिस अर्गाघाट, गिरिडीह के कार्यालय के समक्ष एक दिवसीय धरना दिया जाएगा।
धरना में चार लेबर कोड से जुड़े मुद्दों को उठाया जाएगा। साथ ही बालमुकुंद स्पांज आयरन कंपनी द्वारा कथित झूठे मुकदमों के विरोध में आवाज बुलंद की जाएगी।
नेताओं ने कहा कि मजदूरों के अधिकारों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मजदूर एकता पर नेताओं का जोर
माले नेता मसूदन कोल और किशोर राय ने बैठक को संबोधित करते हुए मजदूरों से एकजुट होने की अपील की।
मसूदन कोल ने कहा:
“मजदूरों को एक होकर लाल झंडा को थामना ही मजदूरों की जीत है। हम मजदूरों के लिए लड़ते हैं और आगे भी लड़ेंगे।”
किशोर राय ने कहा:
“फैक्ट्री मजदूर माले के मजदूर विंग को ज्वाइन करें और अपना रजिस्ट्रेशन करवाएं। अगर आप आंदोलन में शामिल नहीं हो सकें तो भी अंदर से समर्थन जरूरी है, सदस्यता गोपनीय रखी जाएगी।”
नेताओं ने स्पष्ट किया कि संगठन की मजबूती से ही मजदूरों की आवाज प्रभावी होगी और पूंजीपति वर्ग के खिलाफ संघर्ष को ताकत मिलेगी।
बैठक में ये रहे उपस्थित
बैठक में कई कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे। इनमें प्रमुख रूप से कॉमरेड किशोर राय, कॉमरेड कन्हाय पाण्डेय, सनातन साहु, सकलदेव कोल्ह, लखन कोल्ह, सहदेव तुरी, राजन तुरी, मोहन कोल्ह, भुनेश्वर तुरी, लूटन दास, राजू दास, गुलाब कोल्ह, पवन यादव, हुबलाल राय, महताब अंसारी, रंजीत कुमार राय, मनोज कोल्ह, प्रसादी राय, किशुन कोल्ह और भीम कोल्ह शामिल थे।
हालांकि नगर कमिटी के सचिव राजेश सिन्हा बैठक में उपस्थित नहीं थे, लेकिन उन्होंने अपना मत भेजा।
नगर कमिटी सचिव का संदेश
नगर कमिटी के सचिव राजेश सिन्हा ने अपने संदेश में कहा कि लगभग 70 प्रतिशत गरीब जनता होने के बावजूद मजदूरों को अक्सर कम आंका जाता है।
उन्होंने कहा:
“फैक्ट्री मालिक हो या पूंजीपति, मजदूरों को कम आंकते हैं और आगे भी यही रवैया रह सकता है। इसलिए सुधार और संगठित प्रयास की जरूरत है। गिरिडीह के मजदूरों को एक होना होगा।”
उनके संदेश को बैठक में पढ़कर सुनाया गया, जिस पर उपस्थित सदस्यों ने सहमति जताई।
संगठन विस्तार और आगे की रणनीति
बैठक में संगठन विस्तार, मजदूरों के रजिस्ट्रेशन, और भविष्य की रणनीति पर भी चर्चा हुई। नेताओं ने कहा कि आने वाले दिनों में प्रखंड स्तर पर और भी बैठकों का आयोजन किया जाएगा।
सदस्यता अभियान के तहत गांव-गांव जाकर मजदूरों से संपर्क किया जाएगा और उन्हें संगठन की नीतियों और उद्देश्यों से अवगत कराया जाएगा।
न्यूज़ देखो: क्या मजदूर एकजुटता से बदलेगी हालात की दिशा
महुआ टांड़ की यह बैठक संकेत देती है कि गिरिडीह में मजदूर संगठन अपने आधार को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय हो रहे हैं। लेबर कोड और औद्योगिक विवादों को लेकर धरना की घोषणा आने वाले समय में स्थानीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक हलचल बढ़ा सकती है। सवाल यह है कि क्या यह एकजुटता जमीनी बदलाव ला पाएगी और क्या प्रशासन मजदूरों की मांगों पर गंभीरता से पहल करेगा? अब निगाहें 15 मार्च तक चलने वाले अभियान और प्रस्तावित धरना पर टिकी हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
मजदूर अधिकारों की लड़ाई में आपकी भूमिका भी अहम
लोकतंत्र में आवाज तभी मजबूत होती है जब वह संगठित होती है। मजदूरों की समस्याएं केवल एक वर्ग की नहीं, बल्कि पूरे समाज की चिंता का विषय हैं।
जरूरत है जागरूकता, सहभागिता और सकारात्मक संवाद की, ताकि श्रम और सम्मान दोनों सुरक्षित रह सकें।
अगर आप भी श्रमिक मुद्दों पर अपनी राय रखना चाहते हैं तो आगे आएं।
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