#गिरिडीह #मजदूर_आंदोलन : छंटनी, प्रदूषण और अवैध बालू उठाव के खिलाफ गेट जाम की चेतावनी दी गई।
टुंडी रोड स्थित बालमुकुंद फैक्ट्री के सामने असंगठित मजदूर मोर्चा का अनिश्चितकालीन धरना दसवें दिन भी जारी रहा। मजदूर संगठनों ने फैक्ट्री प्रबंधन पर मजदूरों की अवैध छंटनी, प्रदूषण फैलाने, उसरी नदी का पानी चोरी करने और अवैध बालू उठाव कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। माले नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि 25 मई तक वार्ता नहीं हुई तो 26 मई सुबह 5 बजे से फैक्ट्री गेट अनिश्चितकाल के लिए जाम कर दिया जाएगा। आंदोलन में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष शामिल रहे।
- बालमुकुंद फैक्ट्री के खिलाफ दसवें दिन भी जारी रहा धरना।
- माले और असंगठित मजदूर मोर्चा ने प्रदूषण और बालू चोरी का उठाया मुद्दा।
- हटाए गए पांच मजदूरों की बहाली की मांग को लेकर आंदोलन।
- 26 मई से गेट जाम करने की चेतावनी दी गई।
- फैक्ट्री पर उसरी नदी का पानी चोरी करने का आरोप।
- आंदोलन में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष और मजदूर नेता रहे मौजूद।
टुंडी रोड स्थित बालमुकुंद स्पोंज एंड आयरन प्राइवेट लिमिटेड के सामने असंगठित मजदूर मोर्चा द्वारा चलाया जा रहा अनिश्चितकालीन धरना लगातार तेज होता जा रहा है। धरना के दसवें दिन मजदूर नेताओं ने फैक्ट्री प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मजदूरों की छंटनी के साथ-साथ प्रदूषण, उसरी नदी से पानी चोरी और अवैध बालू उठाव जैसे मामलों को भी नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। नेताओं ने कहा कि यदि 25 मई तक वार्ता नहीं हुई तो 26 मई से फैक्ट्री गेट जाम आंदोलन शुरू किया जाएगा।
मजदूरों की बहाली को लेकर जारी है संघर्ष
माले नेता कन्हाई पांडेय ने कहा कि पांच मजदूरों को बिना किसी नोटिस के फैक्ट्री से हटा दिया गया, जिसके कारण उनके परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले छह महीने से प्रभावित मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
कन्हाई पांडेय ने कहा: “बालमुकुंद फैक्ट्री के सामने अनिश्चितकालीन धरना जारी है। यदि 25 मई तक वार्ता नहीं हुई तो 26 मई को फैक्ट्री गेट के सामने धरना और गेट जाम किया जाएगा।”
उन्होंने कहा कि मजदूरों की मांगों को लेकर प्रशासन और फैक्ट्री प्रबंधन लगातार उदासीन रवैया अपना रहा है।
फैक्ट्री प्रबंधन पर झूठ बोलने का आरोप
धरनार्थियों ने आरोप लगाया कि फैक्ट्री प्रबंधन और जिला प्रशासन यह कहकर लोगों को भ्रमित कर रहे हैं कि जिन मजदूरों को लेकर आंदोलन हो रहा है, वे फैक्ट्री के कर्मचारी ही नहीं हैं।
मजदूर नेताओं का कहना है कि असंगठित मजदूर मोर्चा ने संबंधित दस्तावेज प्रशासन और अधिकारियों के सामने प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने बताया कि थाना प्रभारी, अंचल अधिकारी और श्रम विभाग की टीम फैक्ट्री और धरना स्थल का निरीक्षण कर चुकी है।
कन्हाई पांडेय ने कहा: “प्रबंधन और प्रशासन झूठ बोल रहे हैं। हमारे पास मजदूरों से जुड़े सभी दस्तावेज हैं, जिन्हें अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।”
प्रदूषण और पानी चोरी का भी उठाया मुद्दा
माले नेता राजेश सिन्हा ने कहा कि आंदोलन केवल मजदूरों की बहाली तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र में प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के खिलाफ भी आवाज उठाई जा रही है।
राजेश सिन्हा ने कहा: “प्रदूषण, उसरी नदी का पानी चोरी और रात-दिन बालू चोरी के खिलाफ माले और असंगठित मजदूर मोर्चा ने अपनी मांगों को बुलंद किया है।”
उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता लंबे समय से इन समस्याओं से परेशान है और अब लोग खुलकर विरोध कर रहे हैं।
26 मई से गेट जाम की तैयारी
धरनार्थियों ने आम जनता से 26 मई को प्रस्तावित गेट जाम आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। नेताओं ने कहा कि सुबह 5 बजे से फैक्ट्री गेट को अनिश्चितकाल के लिए जाम किया जाएगा।
उन्होंने दावा किया कि यदि प्रशासन और प्रबंधन ने समय रहते वार्ता नहीं की तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। मजदूर संगठनों ने कहा कि यह आंदोलन लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा।
बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद
धरना स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष मौजूद रहे। कार्यक्रम में कन्हैया पाण्डेय, किशोर राय, हुबलाल राय, दीपक गोस्वामी, सुनील ठाकुर, मधुसूदन कोल, तुलसी तुरी, नबीन पाण्डेय, पवन यादव, भिखारी राय, दिलचंद कोल, अरबिंद टुडू, भीम कोल, मोहन कोल, बाबूलाल बास्की, निमिया देवी, पार्वती देवी, सरिता देवी, ललिता देवी, जसमी देवी, सोनी देवी और करनी देवी समेत कई लोग शामिल हुए।
धरनार्थियों ने कहा कि वे मजदूर अधिकार और स्थानीय हितों की रक्षा के लिए आंदोलन जारी रखेंगे।
न्यूज़ देखो: मजदूर आंदोलन अब पर्यावरण और स्थानीय अधिकारों का मुद्दा भी बना
बालमुकुंद फैक्ट्री के खिलाफ जारी आंदोलन अब केवल मजदूरों की बहाली तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह स्थानीय संसाधनों, पर्यावरण और प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। प्रदूषण, नदी के पानी और अवैध बालू उठाव जैसे आरोपों ने आंदोलन को और गंभीर बना दिया है। यदि प्रशासन समय रहते सभी पक्षों के साथ संवाद स्थापित नहीं करता है तो आने वाले दिनों में स्थिति और तनावपूर्ण हो सकती है। निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई ही ऐसे विवादों का स्थायी समाधान बन सकती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जागरूक समाज ही अपने अधिकारों और संसाधनों की रक्षा कर सकता है
प्राकृतिक संसाधन, पर्यावरण और मजदूरों का अधिकार किसी भी समाज की साझा जिम्मेदारी होते हैं। जब लोग अपने अधिकारों और स्थानीय समस्याओं के प्रति जागरूक होते हैं तभी बदलाव की शुरुआत होती है।
लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन समाधान के लिए संवाद और संवेदनशीलता भी उतनी ही जरूरी है। समाज, प्रशासन और उद्योगों को मिलकर संतुलित विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
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