
#लचरागढ़ #नयाशैक्षणिकसत्र : वैदिक मंत्रोच्चार और हवन-पूजन से सत्रारंभ—विद्यार्थियों में दिखा उत्साह।
सिमडेगा के लचरागढ़ स्थित विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर में नए शैक्षणिक सत्र का शुभारंभ वैदिक हवन-पूजन के साथ किया गया। पांच स्थानों पर हवन आयोजित कर विद्यार्थियों को तिलक लगाकर नई कक्षाओं में प्रवेश कराया गया। कार्यक्रम में प्रधानाचार्य राजेंद्र साहू ने शिक्षा के साथ संस्कारों के महत्व पर जोर दिया। इस आयोजन ने पूरे विद्यालय परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
- विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर, लचरागढ़ में सत्रारंभ।
- पांच स्थानों पर वैदिक हवन-पूजन आयोजित।
- विद्यार्थियों को तिलक लगाकर कक्षा में प्रवेश कराया गया।
- राजेंद्र साहू ने शिक्षा और संस्कार पर दिया संदेश।
- जगन्नाथ पंडा ने हवन अनुष्ठान संपन्न कराया।
सिमडेगा जिले के लचरागढ़ स्थित विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर उच्च विद्यालय में नए शैक्षणिक सत्र का शुभारंभ अत्यंत श्रद्धामय और उत्साहपूर्ण वातावरण में किया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार और हवन-पूजन के साथ एक भव्य आयोजन संपन्न हुआ, जिसने शिक्षा के साथ संस्कारों के महत्व को रेखांकित किया।
विद्यालय में इस आयोजन के दौरान बच्चों और शिक्षकों के बीच उत्साह और भक्ति का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।
वैदिक हवन से हुआ सत्रारंभ
कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालय परिसर में पांच स्थानों पर हवन कुंड स्थापित कर वैदिक रीति से हवन-पूजन का आयोजन किया गया। यह संपूर्ण अनुष्ठान आचार्य बृंद के सान्निध्य में सम्पन्न हुआ।
एक आचार्य ने कहा: “वेद मंत्रों की ध्वनि से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।”
हवन के दौरान वेद मंत्रों की गूंज और यज्ञ की सुगंध से पूरा परिसर आध्यात्मिकता से भर गया।
विद्यार्थियों में दिखा उत्साह
हवन-पूजन में भाग लेकर छात्र-छात्राओं ने स्वयं को ऊर्जा से ओत-प्रोत महसूस किया। इसके बाद सभी विद्यार्थियों को तिलक लगाकर नई कक्षाओं में प्रवेश कराया गया।
इस दौरान बच्चों के चेहरे पर खुशी और उत्साह साफ झलक रहा था।
संस्कारों के साथ शिक्षा पर जोर
प्रधानाचार्य राजेंद्र साहू ने अपने संबोधन में कहा—
“विद्या केवल परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं, बल्कि यह व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व का निर्माण करती है।”
उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन, परिश्रम और संस्कारों के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
सकारात्मक सोच का संदेश
प्रधानाचार्य ने आगे कहा—
“हवन हमें यह सिखाता है कि जैसे अग्नि सब कुछ शुद्ध करती है, वैसे ही हमें अपने भीतर की नकारात्मकता को दूर करना चाहिए।”
उन्होंने विद्यार्थियों को समय का सदुपयोग करने और लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने का संदेश दिया।
पुरोहित द्वारा संपन्न हुआ अनुष्ठान
इस पूरे हवन-पूजन का संचालन पंडित जगन्नाथ पंडा द्वारा विधि-विधान के साथ किया गया। उनके मार्गदर्शन में सभी अनुष्ठान सफलतापूर्वक संपन्न हुए।
विद्यालय परिवार की उपस्थिति
इस अवसर पर विद्यालय के सभी छात्र-छात्राएं, आचार्यगण और विद्यालय परिवार के सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर नए सत्र की शुरुआत को उत्सव के रूप में मनाया।
आध्यात्मिक वातावरण का निर्माण
पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर में श्रद्धा, आस्था और सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण बना रहा। यह आयोजन विद्यार्थियों के जीवन में संस्कारों की मजबूत नींव रखने वाला साबित हुआ।

न्यूज़ देखो: शिक्षा के साथ संस्कार का महत्व
लचरागढ़ का यह आयोजन यह दर्शाता है कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि संस्कारों से जुड़ी होती है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
नई शुरुआत, नई सोच
हर नया सत्र नई उम्मीदें लेकर आता है।
जरूरी है कि हम इसे सकारात्मक ऊर्जा के साथ शुरू करें।
संस्कार और अनुशासन से ही सफलता का मार्ग बनता है।
आइए, हम सभी मिलकर बच्चों को बेहतर भविष्य की दिशा दें।
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