पश्चिम सिंहभूम के आनंदपुर में नौ दिवसीय शतचंडी यज्ञ का भव्य समापन आहुति और वैदिक अनुष्ठान के साथ संपन्न

पश्चिम सिंहभूम के आनंदपुर में नौ दिवसीय शतचंडी यज्ञ का भव्य समापन आहुति और वैदिक अनुष्ठान के साथ संपन्न

author Pramod Mishra
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#पश्चिमसिंहभूम #धार्मिकअनुष्ठान : आनंदपुर आश्रम में नौ दिवसीय शतचंडी यज्ञ विधिपूर्वक संपन्न हुआ।

पश्चिम सिंहभूम जिले के आनंदपुर स्थित विश्व कल्याण आश्रम में नौ दिवसीय शतचंडी यज्ञ का विधिवत समापन किया गया। यज्ञ के अंतिम दिन वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुति दी गई और विशेष पूजन अनुष्ठान संपन्न हुए। इस आयोजन में कई विद्वान पंडितों एवं श्रद्धालुओं की भागीदारी रही। धार्मिक दृष्टि से यह आयोजन क्षेत्र में आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक माना जा रहा है।

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  • पश्चिम सिंहभूम के आनंदपुर स्थित विश्व कल्याण आश्रम में 9 दिवसीय यज्ञ का समापन।
  • अंतिम दिन वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञशाला में दी गई आहुति।
  • ब्रह्मचारी विश्वानन्द जी के मार्गदर्शन में हुआ पूरा आयोजन।
  • आचार्य बसंत बिल्थरे एवं सहयोगी पुजारियों ने कराया यज्ञ संपन्न।
  • राजराजेश्वरी मंदिर में नवरात्र पर कन्या, बटुक और सौभाग्यवती पूजन।
  • कई प्रमुख यजमान व श्रद्धालु आयोजन में रहे उपस्थित।

पश्चिम सिंहभूम जिले के आनंदपुर क्षेत्र में स्थित विश्व कल्याण आश्रम में आयोजित नौ दिवसीय शतचंडी यज्ञ का समापन धार्मिक विधि-विधान और वैदिक परंपराओं के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, यजमान एवं विद्वान पंडित उपस्थित रहे। अंतिम दिन विशेष हवन, पूजन और आहुति कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना रहा। आयोजन के माध्यम से क्षेत्र में धार्मिक चेतना और सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया।

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ यज्ञ का समापन

विश्व कल्याण आश्रम के यज्ञशाला में नौ दिनों तक चले शतचंडी यज्ञ का अंतिम दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा। इस दिन वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन कुंड में आहुति दी गई। यज्ञ के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने भगवान से सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की।

आश्रम प्रभारी ब्रह्मचारी विश्वानन्द जी के मार्गदर्शन में पूरे अनुष्ठान को विधिवत संपन्न कराया गया। इस दौरान यज्ञ की प्रत्येक प्रक्रिया को शास्त्रीय विधि के अनुसार पूरा किया गया, जिससे आयोजन की गरिमा और पवित्रता बनी रही।

अंतिम दिन हुआ विशेष पूजन और सहस्रअर्चन

यज्ञ के अंतिम दिन विशेष रूप से पूजन और सहस्रअर्चन का आयोजन किया गया। इसमें देवी-देवताओं की आराधना करते हुए श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ भाग लिया। इस दौरान पूरे आश्रम परिसर में धार्मिक ऊर्जा और भक्ति का माहौल बना रहा।

यज्ञ के संचालन में आचार्य बसंत बिल्थरे के साथ सहयोगी पुजारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने विधि-विधान के साथ सभी अनुष्ठानों को संपन्न कराया और श्रद्धालुओं को धार्मिक महत्व के बारे में जानकारी दी।

ब्रह्मचारी विश्वानन्द जी ने कहा: “शतचंडी यज्ञ जैसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संचार करते हैं। इससे लोगों में आस्था और एकता की भावना मजबूत होती है।”

राजराजेश्वरी मंदिर में नवरात्र पूजन का आयोजन

इसी अवसर पर समीप स्थित राजराजेश्वरी मंदिर में नवरात्र पूजन भी विशेष रूप से आयोजित किया गया। यहां कन्या पूजन, बटुक पूजन और सौभाग्यवती पूजन की परंपराओं का पालन किया गया। श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया।

पूजन के उपरांत प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। इस दौरान भक्तों में उत्साह और श्रद्धा का विशेष माहौल देखने को मिला।

आयोजन में उपस्थित रहे प्रमुख यजमान और श्रद्धालु

इस धार्मिक आयोजन में कई प्रमुख यजमान और श्रद्धालु उपस्थित रहे। इनमें पुजारी हरवंश तिवारी, अनन्त पाठक, ललित चौबे, आयुष पांडे, वेद प्रकाश पांडे, मनोरंजन पंडा, शिव प्रताप सिंहदेव, मनोज सिंहदेव, संजीव गंताइत और प्रणब नंद समेत अन्य श्रद्धालु शामिल थे।

सभी उपस्थित लोगों ने यज्ञ में भाग लेकर धार्मिक अनुष्ठानों को सफल बनाने में सहयोग दिया। आयोजन के दौरान सामाजिक एकता और सामूहिक भागीदारी का सुंदर उदाहरण देखने को मिला।

न्यूज़ देखो: आस्था के संग समाज में एकता का संदेश

ऐसे धार्मिक आयोजन न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करते हैं, बल्कि समाज में एकता और सहयोग की भावना को भी मजबूत करते हैं। आनंदपुर का यह शतचंडी यज्ञ स्थानीय लोगों के लिए एक प्रेरणादायक पहल साबित हुआ है। प्रशासन और समाज के सहयोग से ऐसे आयोजन लगातार होते रहें, यह आवश्यक है। आने वाले समय में भी ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक समरसता को और मजबूती मिलेगी।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

धर्म और समाज को जोड़ने वाले आयोजनों में बढ़ाएं अपनी भागीदारी

धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में शामिल होना केवल परंपरा निभाना नहीं, बल्कि समाज को मजबूत बनाने का एक माध्यम भी है। ऐसे आयोजनों से हमें अपनी संस्कृति, परंपरा और मूल्यों को समझने और आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है।

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Written by

आनंदपुर, पश्चिम सिंहभूम

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