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Simdega

समाहरणालय सभागार में उत्साहपूर्ण तरीके से पढ़ी गई संविधान की प्रस्तावना

#सिमडेगा #संविधान_दिवस : जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंडों व संस्थानों तक संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन, अधिकारियों ने एकता और अखंडता बनाए रखने की शपथ ली
  • समाहरणालय सभागार में उपायुक्त श्रीमती कंचन सिंह के नेतृत्व में संविधान दिवस मनाया गया।
  • सभी अधिकारियों-कर्मचारियों ने भारतीय संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन किया।
  • संविधान निर्माताओं की 2 वर्ष 11 माह 18 दिन की मेहनत को किया नमन।
  • कार्यक्रम में राष्ट्र की एकता और अखंडता को बनाए रखने का संकल्प लिया गया।
  • पूरे जिले के प्रखंड, विद्यालय, सरकारी कार्यालय और संस्थानों में भी वाचन कार्यक्रम हुआ।
  • संविधान दिवस को लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों को याद करने का अवसर बताया गया।

सिमडेगा में संविधान दिवस बड़े उत्साह और गरिमामय वातावरण में मनाया गया। समाहरणालय सभागार में उपायुक्त श्रीमती कंचन सिंह के नेतृत्व में अधिकारियों और कर्मियों ने भारतीय संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन किया। सभी ने संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करने की शपथ लेते हुए राष्ट्र की एकता और अखंडता को सुदृढ़ बनाने का निश्चय किया। इस अवसर पर संविधान निर्माण में लगी लंबी प्रक्रिया, लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों की महत्ता पर चर्चा हुई। जिला मुख्यालय के अलावा, पूरे जिले में विभिन्न संस्थानों, विद्यालयों और कार्यालयों में भी कार्यक्रम आयोजित किए गए।


संविधान की आत्मा का सम्मान: प्रस्तावना का सामूहिक वाचन

समाहरणालय सभागार में आयोजित कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि संविधान केवल दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। अधिकारियों, कर्मियों और उपस्थित नागरिकों ने एक साथ प्रस्तावना पढ़ते हुए लोकतांत्रिक सिद्धांतों के प्रति सम्मान व्यक्त किया। उपायुक्त श्रीमती कंचन सिंह के नेतृत्व में समारोह की शुरुआत हुई, जिसमें सभी ने भारत के लोकतंत्र और विविधता को मजबूत बनाने का संकल्प लिया।

उपायुक्त श्रीमती कंचन सिंह ने कहा: “संविधान निर्माताओं ने 2 वर्ष 11 माह 18 दिन के अथक परिश्रम से एक ऐसा संविधान बनाया है जो हर नागरिक को न्याय, समता और स्वतंत्रता देने का काम करता है। यह संविधान हमारी राष्ट्रीय एकता और बंधुता की नींव है।”

लोकतांत्रिक मूल्यों पर जोर

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अधिकारियों ने संविधान में निहित मूल अधिकार, कर्तव्य और समानता के सिद्धांतों का महत्व समझा। इस वाचन के माध्यम से नागरिकों के प्रति संवेदनशीलता, न्यायपूर्ण प्रशासन और पारदर्शिता की प्रेरणा दी गई।


पूरे जिले में दिखा संविधान दिवस का उत्साह

संविधान दिवस केवल जिला कार्यालय तक सीमित नहीं रहा। विभिन्न प्रखंडों, सरकारी कार्यालयों, स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में भी एक साथ संविधान की प्रस्तावना पढ़ी गई। कई जगह जागरूकता कार्यक्रम और चर्चा मंचों का आयोजन हुआ, ताकि नागरिकों को संविधान की शक्ति और महत्व का बोध हो सके।

विद्यालयों में भी बच्चों ने पढ़ी प्रस्तावना

विद्यालयों में अध्यापकों ने बच्चों को संविधान की उत्पत्ति, अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में बताया। बच्चों ने एक साथ प्रस्तावना पढ़ते हुए भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों को सम्मान देने का वादा किया।


न्यूज़ देखो: संविधान की चेतना को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश

इस खबर से यह स्पष्ट होता है कि संविधान दिवस को केवल औपचारिकता के रूप में नहीं, बल्कि संवैधानिक चेतना के रूप में मनाया जाना चाहिए। प्रशासन द्वारा सामूहिक वाचन से लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने का प्रयास किया गया। यह पहल नागरिकों को उनके अधिकारों के साथ कर्तव्यों को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

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संविधान का सम्मान, नागरिकता का अभिमान

संविधान हर भारतीय को स्वतंत्र विचार, समान अवसर और सुरक्षित जीवन का अधिकार देता है। अब जिम्मेदारी हमारी है कि हम न केवल अधिकारों का लाभ उठाएं, बल्कि कर्तव्यों का पालन करते हुए देश को मजबूत बनाएं। प्रशासन, विद्यार्थी और नागरिक मिलकर लोकतंत्र की नींव को और सशक्त बना सकते हैं।

आइए, संविधान के आदर्शों को अपने व्यवहार में अपनाएं, एकता और बंधुता का संदेश समाज में फैलाएं। अपनी राय कमेंट करें, खबर साझा करें और देशहित के प्रति जागरूकता बढ़ाएं।

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Birendra Tiwari

सिमडेगा

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