
#बानो #सरहुल_तैयारी : आदिवासी एकतामंच की बैठक में कार्यक्रम समीक्षा और आगामी सरहुल पर्व की तैयारी पर विचार हुआ।
बानो में आदिवासी एकतामंच की समीक्षा बैठक अध्यक्ष आनंद मसीह तोपनो की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में पिछले सप्ताह आयोजित कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए उसकी कमियों और सुधार के पहलुओं पर चर्चा की गई। साथ ही आगामी 21 मार्च 2026 को मनाए जाने वाले प्राकृतिक महापर्व सरहुल की तैयारियों को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। आयोजन को सफल बनाने के लिए 15 मार्च को पुनः बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया।
- बानो में आदिवासी एकतामंच की समीक्षा बैठक अध्यक्ष आनंद मसीह तोपनो की अध्यक्षता में आयोजित।
- पिछले सप्ताह आयोजित कार्यक्रम की कमियों और सुधार के बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा।
- कोषाध्यक्ष प्रमोद पहान ने बैठक में आय-व्यय की जानकारी प्रस्तुत की।
- 21 मार्च 2026 को प्राकृतिक महापर्व सरहुल (बहापरब) मनाने की तैयारी शुरू।
- तैयारी को अंतिम रूप देने के लिए 15 मार्च 2026 को दोबारा बैठक तय।
- कार्यक्रम में पहान, पुजार, महतो और प्रबुद्ध जनों से मार्गदर्शन देने की अपील।
बानो क्षेत्र में आदिवासी समाज के प्रमुख सांस्कृतिक पर्वों में शामिल सरहुल (बहापरब) के आयोजन को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में आदिवासी एकतामंच बानो की एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता मंच के अध्यक्ष आनंद मसीह तोपनो ने की। बैठक में पिछले सप्ताह आयोजित कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए उसके विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई और भविष्य में बेहतर आयोजन सुनिश्चित करने के लिए सुझाव दिए गए। इसके साथ ही आगामी सरहुल पर्व के आयोजन की रूपरेखा तैयार करने पर भी विचार किया गया।
समीक्षा बैठक में कार्यक्रम की कमियों पर चर्चा
बैठक की शुरुआत में पिछले सप्ताह आयोजित कार्यक्रम की समीक्षा की गई। उपस्थित सदस्यों ने आयोजन के दौरान सामने आई कमियों और चुनौतियों पर खुलकर चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम की सफलता के लिए निरंतर समीक्षा और सुधार जरूरी होता है।
अध्यक्ष आनंद मसीह तोपनो ने कहा कि समाज के सभी लोगों की भागीदारी से ही कार्यक्रम सफल होता है और यदि कहीं कमी रह जाती है तो उसे स्वीकार कर सुधार की दिशा में काम करना चाहिए।
आनंद मसीह तोपनो ने कहा: “हमारा उद्देश्य समाज को संगठित करना और अपनी संस्कृति को मजबूत करना है। इसलिए हर कार्यक्रम के बाद समीक्षा जरूरी है ताकि अगली बार और बेहतर आयोजन हो सके।”
आय-व्यय का विवरण प्रस्तुत
बैठक के दौरान संगठन के कोषाध्यक्ष प्रमोद पहान ने मंच की आय-व्यय का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के आयोजन में जो भी खर्च हुआ, उसकी पूरी जानकारी बैठक में साझा की गई।
सदस्यों ने पारदर्शिता के साथ वित्तीय जानकारी प्रस्तुत किए जाने की सराहना की और कहा कि इससे संगठन में विश्वास और मजबूत होता है। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि जिन परिवारों ने अभी तक सहयोग राशि जमा नहीं की है, वे जल्द से जल्द इसे जमा करें।
सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि जिन परिवारों का सहयोग राशि अभी लंबित है, वे 21 मार्च 2026 तक अपनी राशि जमा कर देंगे, ताकि आगामी कार्यक्रम के आयोजन में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
21 मार्च को मनाया जाएगा सरहुल (बहापरब)
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 21 मार्च 2026 को प्राकृतिक महापर्व सरहुल (बहापरब) पूरे उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाएगा। सरहुल आदिवासी समाज का महत्वपूर्ण पर्व है, जो प्रकृति, धरती और पर्यावरण के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक माना जाता है।
इस पर्व के दौरान समाज के लोग पारंपरिक पूजा-पाठ, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामुदायिक आयोजन करते हैं। इसलिए आयोजन को बेहतर और भव्य बनाने के लिए अभी से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
15 मार्च को फिर होगी तैयारी बैठक
सरहुल पर्व की तैयारी को अंतिम रूप देने के लिए 15 मार्च 2026 दिन रविवार को फिर से बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया। यह बैठक जयपाल सिंह खेल मैदान के बगल में आयोजित होगी और इसका समय दोपहर 12:00 बजे निर्धारित किया गया है।
बैठक में विशेष रूप से पहान, पुजार, महतो और समाज के प्रबुद्ध जनों से उपस्थित होने का अनुरोध किया गया है, ताकि वे अपने अनुभव और मार्गदर्शन से कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान दे सकें।
संगठन के सदस्यों ने कहा: “सरहुल हमारी पहचान और संस्कृति का पर्व है, इसलिए इसकी तैयारी में पूरे समाज की भागीदारी जरूरी है।”
बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण मौजूद
इस महत्वपूर्ण बैठक में समाज के कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे। इनमें अध्यक्ष आनंद मसीह तोपनो, सचिव अनूप मिंज, जिप सदस्य बिरजो कंडुलना, उपाध्यक्ष सुधीर लुगुन, उपसचिव जगदीश बागे, उपसचिव अंथोनी सुरिन, कोषाध्यक्ष प्रमोद पहान, मुखिया कृपा हेमरोम, मुखिया सीता कुमारी शामिल थे।
इसके अलावा हीरामनी मिंज, ग्लेडसन लुगुन, कोमल जोजो, हरदुगन तोपनो, निर्दोष सुरिन, सिमोन लोहरा, सुरसेन सुरिन, इसिदोर लुगुन, सोहराई मुण्डा, विकास कंडुलना, सिलास मड़की, गबरिएल सुरिन, अभिषेक बागे, मतियस लुगुन, इलियास मघैया, हर्षित सांगा, विश्राम बागे, उदय जोजो, अशियन जोजो, सामुएल तोपनो, निस्तार तोपनो, सुफल बडिंग, सुनील तोपनो सहित कई ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता बैठक में उपस्थित थे।
बैठक में सभी ने एकजुट होकर समाज के सांस्कृतिक कार्यक्रमों को सफल बनाने और समुदाय की एकता को मजबूत करने का संकल्प लिया।
न्यूज़ देखो: संस्कृति और एकता को मजबूत करने की पहल
बानो में आदिवासी एकतामंच द्वारा आयोजित यह बैठक सिर्फ एक समीक्षा बैठक नहीं बल्कि समाज की एकता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरहुल जैसे पारंपरिक पर्वों के आयोजन से समाज की परंपराएं और सामुदायिक संबंध मजबूत होते हैं।
साथ ही बैठक में पारदर्शिता के साथ आय-व्यय की जानकारी साझा करना और समय रहते तैयारी बैठक तय करना संगठन की सक्रियता को दर्शाता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि आगामी 15 मार्च की बैठक में क्या ठोस निर्णय लिए जाते हैं और सरहुल पर्व को किस तरह भव्य रूप दिया जाता है।
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अपनी संस्कृति और परंपरा को जीवित रखने का संकल्प
समाज की पहचान उसकी संस्कृति, परंपराओं और सामूहिक सहभागिता से बनती है। सरहुल जैसे पर्व हमें प्रकृति से जुड़ने और समाज की एकता को मजबूत करने का संदेश देते हैं। ऐसे आयोजनों में हर व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है ताकि आने वाली पीढ़ियों तक हमारी परंपराएं सुरक्षित रह सकें।






