हेडमास्टर पर मनमानी के गंभीर आरोप से हिला विद्यालय, फर्जी हाजिरी और अव्यवस्था पर उठे सवाल

हेडमास्टर पर मनमानी के गंभीर आरोप से हिला विद्यालय, फर्जी हाजिरी और अव्यवस्था पर उठे सवाल

author Samim Ansari
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#पलामू #शिक्षा_अनियमितता : हेडमास्टर पर फर्जी हाजिरी और मनमानी संचालन के आरोप लगे।

पलामू जिले के नवा बाजार थाना क्षेत्र के दरगाही ताली स्थित न्यू प्राथमिक विद्यालय में हेडमास्टर पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। स्थानीय ग्रामीणों और विद्यालय समिति ने फर्जी हाजिरी और स्कूल संचालन में लापरवाही का मुद्दा उठाया है। आरोप है कि बच्चों की उपस्थिति कम होने के बावजूद रजिस्टर में अधिक संख्या दर्ज की जाती है। मामले ने क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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  • नवा बाजार थाना क्षेत्र के दरगाही ताली स्थित स्कूल में अनियमितता का आरोप।
  • हेडमास्टर सत्येंद्र महतो पर फर्जी हाजिरी दर्ज करने का गंभीर आरोप।
  • प्रतिदिन 10 छात्र उपस्थित, लेकिन रजिस्टर में 25-30 की उपस्थिति दर्ज।
  • विद्यालय अध्यक्ष राष्ट्रपति देवी ने उठाया जवाबदेही का मुद्दा।
  • ग्रामीणों ने की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग।

पलामू जिले के नवा बाजार थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम दरगाही ताली स्थित न्यू प्राथमिक विद्यालय में इन दिनों शिक्षा व्यवस्था को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। हेडमास्टर पर लगे गंभीर आरोपों ने न केवल विद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र में सरकारी शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय ग्रामीणों और विद्यालय समिति के सदस्यों ने इस मामले को गंभीरता से उठाया है।

विद्यालय संचालन में मनमानी के आरोप

ग्रामीणों और विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों का कहना है कि स्कूल का संचालन नियमों के अनुसार नहीं किया जा रहा है। आरोप है कि हेडमास्टर सत्येंद्र महतो विद्यालय में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते और केवल हाजिरी बनाकर चले जाते हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा है।

विद्यालय अध्यक्ष राष्ट्रपति देवी और अन्य सदस्यों ने बताया कि स्कूल में बच्चों की वास्तविक उपस्थिति बेहद कम रहती है, जबकि कागजों में अधिक संख्या दिखाई जाती है। इससे न केवल शिक्षा प्रभावित हो रही है, बल्कि सरकारी योजनाओं के सही क्रियान्वयन पर भी प्रश्न उठ रहे हैं।

फर्जी हाजिरी का गंभीर मामला

मामले का सबसे गंभीर पहलू फर्जी हाजिरी का आरोप है। ग्रामीणों के अनुसार, विद्यालय में प्रतिदिन करीब 10 बच्चे ही उपस्थित रहते हैं, लेकिन हाजिरी रजिस्टर में 25 से 30 बच्चों की उपस्थिति दर्ज की जाती है।

यह स्थिति शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का मामला बन सकता है।

समिति और ग्रामीणों का विरोध

विद्यालय समिति के सदस्य जैसे गीता देवी, मनोज पाल, रंजन मेहता, जमूना राम, सतेंद्र राम, मानमती देवी, शिला कुंवर, पारवती देवी सहित अन्य लोगों ने इस मुद्दे को उठाया है। उन्होंने कहा कि बच्चों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है और ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

राष्ट्रपति देवी ने कहा: “यदि विद्यालय के खर्च और उपस्थिति का सही हिसाब नहीं दिया गया, तो हम आगे सख्त कार्रवाई की मांग करेंगे।”

जवाब मांगने पर विवाद

जब विद्यालय अध्यक्ष ने इस मामले पर हेडमास्टर से जवाब मांगा, तो आरोप है कि उन्होंने संतोषजनक उत्तर देने के बजाय कथित तौर पर धमकी भरे लहजे में बात की। इससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह व्यवहार न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के प्रति उदासीनता को भी दर्शाता है।

शिक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

यह मामला केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की कमजोरियों को उजागर करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता पहले ही चुनौतीपूर्ण है, ऐसे में यदि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग ही लापरवाही बरतें, तो स्थिति और खराब हो सकती है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए, ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके और सरकारी योजनाओं का सही लाभ पहुंच सके।

न्यूज़ देखो: शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही कब होगी सुनिश्चित

यह मामला दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर शिक्षा व्यवस्था में अभी भी कई खामियां मौजूद हैं। जब स्कूल के जिम्मेदार ही अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाते, तो बच्चों का भविष्य प्रभावित होना तय है। प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पारदर्शी जांच करनी चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। क्या ऐसी घटनाओं पर समय रहते रोक लगाई जाएगी, या फिर यह समस्या यूं ही बनी रहेगी—यह देखना महत्वपूर्ण होगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जागरूक बनें, बच्चों के भविष्य के लिए आवाज उठाएं

ग्रामीण क्षेत्र के स्कूल केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि समाज के भविष्य की नींव होते हैं। यदि यहां लापरवाही होगी, तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा।

हर अभिभावक, हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह अपने क्षेत्र के विद्यालयों की स्थिति पर नजर रखे और जरूरत पड़ने पर आवाज उठाए।

शिक्षा में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।

अगर आपके आसपास भी ऐसी कोई समस्या है, तो चुप न रहें—उसे सामने लाएं।

अपनी राय कमेंट में साझा करें, इस खबर को दूसरों तक पहुंचाएं और शिक्षा सुधार की इस मुहिम का हिस्सा बनें।

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Written by

उंटारी रोड, पलामू

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