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गिरिडीह के बिरनी में रैयतों का संघर्ष रंग लाया, सीओ से वार्ता के बाद समाप्त हुआ धरना

#बिरनी #जमीनमापीविवाद – मॉडल डिग्री कॉलेज की जमीन में अतिक्रमण को लेकर शुरू हुआ था अनिश्चितकालीन आंदोलन, मापी और निर्माण कार्य पर बनी सहमति

  • सात डिसमिल जमीन की मापी दो बार में आई अलग-अलग
  • रैयतों ने सरकारी अमीन की मापी पर जताया था गहरा संदेह
  • सीओ के आश्वासन पर धरना हुआ समाप्त
  • 14 मई को जमीन की दोबारा मापी के बाद होगी चारदीवारी का निर्माण
  • एफआईआर की मांग पर कार्रवाई का भरोसा
  • सैकड़ों ग्रामीणों ने आंदोलन में लिया था हिस्सा

जमीन विवाद पर सुलगा आंदोलन, मापी में अंतर से भड़के ग्रामीण

गिरिडीह के बिरनी प्रखंड स्थित मॉडल डिग्री कॉलेज की सात डिसमिल जमीन को लेकर शुक्रवार को रैयतदारों ने अंचल कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। भीषण गर्मी के बीच धरने पर बैठे सिमराढाब गांव के रैयतदारों का कहना था कि कॉलेज के निर्माण में उनकी जमीन का हिस्सा शामिल कर लिया गया है, जिसकी दो बार मापी कराए जाने के बाद भी संतोषजनक समाधान नहीं मिला।

अमीन की मापी में विरोधाभास, उठे सवाल

रैयतों का आरोप है कि पहली मापी में जो रिपोर्ट दी गई थी, दोबारा मापी करने पर उसमें अंतर सामने आया। इससे सरकारी अमीन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए। ग्रामीणों ने मांग की कि जिस अमीन ने गलत मापी की, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर FIR दर्ज की जाए। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि कॉलेज के दस्तावेजों में भी हेराफेरी हुई है, जिनके लिए अंचल कार्यालय की जिम्मेदारी तय की जाए।

सीओ ने की वार्ता, निर्माण पर लगी अस्थाई रोक

धरना की सूचना मिलते ही अंचल अधिकारी संदीप मधेसिया मौके पर पहुंचे और रैयतदारों से बातचीत की। वार्ता के बाद सीओ ने 14 मई तक चारदीवारी निर्माण कार्य रोकने और उस दिन दोबारा मापी कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मॉडल डिग्री कॉलेज की जमीन की मापी उचित दस्तावेज के आधार पर की जाएगी। इसके बाद धरना समाप्त कर दिया गया

“रैयतों की मांगों को गंभीरता से लिया गया है। 14 मई को निष्पक्ष रूप से मापी कराई जाएगी और उसके बाद ही कोई निर्माण कार्य आगे बढ़ेगा।”
संदीप मधेसिया, अंचल अधिकारी

रैयतों की प्रमुख मांगें

  • गलत मापी करने वाले अमीन के खिलाफ FIR दर्ज की जाए।
  • कॉलेज की जमीन की मापी मूल दस्तावेज के अनुसार हो।
  • अंचल कार्यालय से गायब अभिलेखों की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई हो।
  • चारदीवारी निर्माण कटीले तार से न होकर समुचित तरीके से हो।
  • संवेदक द्वारा नियमों के विरुद्ध निर्माण करने पर कार्रवाई की जाए।

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Surendra Verma

डुमरी, गिरिडीह

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