
#गुमला #मजदूर_मौत : घाघरा निवासी मजदूर की उत्तर प्रदेश के ईंट भट्ठे पर संदिग्ध मौत के बाद परिजनों ने प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए
गुमला जिले के घाघरा थाना क्षेत्र के नवडीहा निवासी एक मजदूर की गढ़वा जिले के नगर उन्टारी थाना क्षेत्र के भासपुर गांव स्थित ईंट भट्ठे पर संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतक जगबंधन उरांव की मौत के बाद परिजनों ने भट्ठा मालिक और मुंशी पर इलाज में लापरवाही तथा मौत की सूचना छिपाने का गंभीर आरोप लगाया है।
- घाघरा थाना क्षेत्र के नवडीहा निवासी जगबंधन उरांव की गढ़वा जिले के नगर उन्टारी थाना क्षेत्र के भासपुर गांव स्थित ‘777 ईंट भट्ठा’ में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई।
- 22 फरवरी की रात काम के दौरान गिरकर घायल हुए मजदूर को पहले स्थानीय अस्पताल और फिर निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
- परिजनों का आरोप — इलाज के दौरान परिवार को मरीज से मिलने नहीं दिया गया और सूचना छिपाई गई।
- 3 मार्च को अस्पताल प्रबंधन ने मौत की पुष्टि की, जबकि परिजनों का दावा है कि उन्हें पहले जानकारी नहीं दी गई।
- मजदूर संघ के प्रदेश अध्यक्ष जुम्मन खान ने घटना की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
गुमला जिले के घाघरा थाना क्षेत्र अंतर्गत नवडीहा गांव के एक मजदूर की गढ़वा जिले में ईंट भट्ठे पर संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक की पहचान जगबंधन उरांव के रूप में हुई है, जो रोजी-रोटी के लिए गढ़वा जिले के नगर उन्टारी थाना क्षेत्र के भासपुर गांव स्थित ‘777 ईंट भट्ठा’ में मजदूरी का काम करते थे। घटना के बाद परिजनों ने भट्ठा प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही, मौत की सूचना छिपाने और संदिग्ध तरीके से शव सौंपने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इस मामले को लेकर स्थानीय मजदूरों और ग्रामीणों में भी आक्रोश देखा जा रहा है।
काम के दौरान गिरने से घायल हुए मजदूर
परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार 22 फरवरी की रात करीब 9 बजे ईंट भट्ठे पर काम करने के दौरान अचानक जगबंधन उरांव गिर पड़े। गिरने के कारण उन्हें गंभीर चोटें आईं और वे बेहोश हो गए।
घटना के बाद भट्ठा मालिक और वहां मौजूद मुंशी ने उन्हें पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी स्थिति गंभीर देखते हुए उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद इलाज की पूरी प्रक्रिया भट्ठा प्रबंधन और मुंशी के नियंत्रण में रही।
परिवार को नहीं दी गई सही जानकारी
मृतक के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद उन्हें मरीज से मिलने नहीं दिया गया। इलाज के दौरान क्या हो रहा है, इसकी भी कोई स्पष्ट जानकारी परिवार को नहीं दी गई।
परिजनों के अनुसार भट्ठा प्रबंधन और मुंशी लगातार उन्हें भरोसा दिलाते रहे कि मजदूर का इलाज चल रहा है और वह जल्द ठीक हो जाएगा। लेकिन बाद में जब परिवार ने लगातार दबाव बनाया, तब 3 मार्च को अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि जगबंधन उरांव की मौत हो चुकी है।
इस खुलासे के बाद परिवार में शोक और आक्रोश दोनों का माहौल बन गया।
रात में शव सौंपने का आरोप
मृतक के परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि अस्पताल से शव निकालने की पूरी प्रक्रिया भी संदिग्ध तरीके से की गई। उनका कहना है कि मुंशी ने रात के अंधेरे में अस्पताल से शव निकलवाया और परिवार को सौंप दिया।
परिजनों के अनुसार शव सौंपने के बाद मुंशी मौके से फरार हो गया और तब से उसका फोन भी बंद बताया जा रहा है। वहीं भट्ठा मालिक की ओर से भी घटना को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है।
इन परिस्थितियों ने परिजनों के संदेह को और गहरा कर दिया है।
मजदूर संघ ने उठाई जांच की मांग
इस घटना को लेकर मजदूर संगठनों ने भी गंभीर चिंता जताई है। CFTUI मजदूर संघ के प्रदेश अध्यक्ष जुम्मन खान ने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
“मजदूर की मौत के मामले में सच्चाई सामने आनी चाहिए। इलाज की जानकारी छिपाना और रात में शव सौंपना कई सवाल खड़े करता है। इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि मजदूरों के साथ इस तरह की घटनाएं बेहद गंभीर हैं और प्रशासन को इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
स्थानीय मजदूरों और ग्रामीणों में आक्रोश
घटना के सामने आने के बाद इलाके के मजदूरों और ग्रामीणों में भी नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि बाहर जाकर मजदूरी करने वाले गरीब मजदूरों की सुरक्षा और अधिकारों की अक्सर अनदेखी की जाती है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि इस मामले की सही तरीके से जांच की जाए तो कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। साथ ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होने से भविष्य में ऐसी घटनाओं पर भी रोक लग सकेगी।
पीड़ित परिवार के लिए मुआवजे की मांग
मजदूर संघ और ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
लोगों का कहना है कि यह स्पष्ट होना जरूरी है कि मजदूर की मौत दुर्घटना के कारण हुई या इलाज में लापरवाही के कारण। जब तक इसकी सच्चाई सामने नहीं आती, तब तक परिवार को न्याय मिलना मुश्किल होगा।
न्यूज़ देखो: प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा बड़ा सवाल
ईंट भट्ठों और निर्माण स्थलों पर काम करने वाले प्रवासी मजदूर अक्सर असुरक्षित परिस्थितियों में काम करने को मजबूर होते हैं। ऐसी घटनाएं यह दिखाती हैं कि मजदूरों की सुरक्षा, इलाज और अधिकारों को लेकर अब भी कई गंभीर खामियां मौजूद हैं। इस मामले की निष्पक्ष जांच ही सच्चाई सामने ला सकती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
मजदूरों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी
रोजी-रोटी के लिए दूर-दराज राज्यों में काम करने वाले मजदूर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उनकी सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा करना समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है।
जरूरी है कि ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लिया जाए और दोषियों को सख्त सजा मिले।
आप इस मामले पर क्या सोचते हैं? अपनी राय जरूर साझा करें और इस खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं ताकि मजदूरों की आवाज बुलंद हो सके।






