धर्म, ज्ञान और ज्योति के प्रतीक नहीं रहे: ज्योतिषाचार्य कैलाशपति मिश्रा जी का निधन

धर्म, ज्ञान और ज्योति के प्रतीक नहीं रहे: ज्योतिषाचार्य कैलाशपति मिश्रा जी का निधन

author Rajkumar Singh (Raju)
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#गढ़वा #आस्था : विशुनपुरा के विद्वान ज्योतिषाचार्य कैलाशपति मिश्रा जी का रांची रिम्स में निधन – धार्मिक जगत में शोक की लहर
  • विशुनपुरा निवासी ज्योतिषाचार्य कैलाशपति मिश्रा जी का निधन बुधवार 5 नवम्बर 2025 को रिम्स, रांची में हुआ।
  • वे चारों वेदों और ज्योतिष शास्त्र के अप्रतिम विद्वान थे, जिनकी वाणी से झरती थी शांति और सत्य की सरिता।
  • मिश्रा जी का अंतिम संस्कार गुरुवार सुबह 6 नवम्बर को बायीं बांकी नदी तट, विशुनपुरा थाना के समीप होगा।
  • वे पाँच दिनों से रांची रिम्स में उपचाराधीन थे, अंतिम क्षणों तक पूर्ण चेतना में रहे।
  • विश्व हिंदू परिषद प्रखंड अध्यक्ष सुरेंद्र यादव समेत पूरे क्षेत्र के लोगों ने गहरी श्रद्धांजलि दी।

गढ़वा जिले के विशुनपुरा निवासी श्रद्धेय ज्योतिषाचार्य श्री कैलाशपति मिश्रा जी अब हमारे बीच नहीं रहे। धर्म, ज्ञान और ज्योति के इस महान साधक ने 5 नवम्बर 2025 (बुधवार) को शाम लगभग चार बजे रिम्स, रांची में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे इलाके में शोक और श्रद्धा का वातावरण छा गया।

धर्म के साधक और वेदों के ज्ञाता का अंत

श्रद्धेय मिश्रा जी पिछले पाँच दिनों से कमर दर्द की समस्या से पीड़ित थे और रांची रिम्स में उपचाराधीन थे। परिवार के अनुसार, वे अपने अंतिम क्षणों तक पूरी चेतना और प्रसन्नता में रहे। वे शांत मन से ईश्वर में लीन हो गए, मानो उन्होंने स्वयं मोक्ष का पथ चुन लिया हो।

उनका पार्थिव शरीर बुधवार की रात लगभग आठ बजे विशुनपुरा स्थित आवास पर लाया गया। अंतिम संस्कार गुरुवार सुबह दस बजे बायीं बांकी नदी तट (विशुनपुरा थाना के समीप) संपन्न किया जाएगा।

अध्यात्म, आस्था और सेवा का जीवन

ज्योतिषाचार्य कैलाशपति मिश्रा जी केवल एक विद्वान नहीं, बल्कि धर्म, आस्था और मानवता के दीपस्तंभ थे। वे चारों वेदों, पुराणों और ज्योतिष शास्त्र के ज्ञाता थे। उनकी वाणी में अध्यात्म की गूंज और लोककल्याण की भावना समाहित रहती थी।

उनका दरबार पूजा-पाठ का स्थान भर नहीं था, बल्कि सद्भाव, न्याय और विश्वास का केंद्र था। झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और बिहार समेत कई राज्यों से लोग उनके पास मार्गदर्शन और आशीर्वाद पाने आते थे।

विश्व हिंदू परिषद के प्रखंड अध्यक्ष सुरेंद्र यादव ने कहा: “मिश्रा जी का निधन न केवल विशुनपुरा के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने धर्म, सत्य और संस्कार की जो लौ प्रज्ज्वलित की, वह सदैव समाज को दिशा देती रहेगी।”

लोककल्याण और विद्या का प्रकाश

मिश्रा जी ने अपने जीवन को धर्म और सेवा के मार्ग पर समर्पित किया। उन्होंने सदाचार, सत्य और विद्या के माध्यम से सैकड़ों लोगों का जीवन बदल दिया। उनकी शिक्षाएं केवल शास्त्र तक सीमित नहीं थीं, बल्कि जीवन जीने का मार्ग सिखाती थीं।

उनकी गहन विद्या और करुणामय व्यवहार ने उन्हें समाज में आदर्श और पथप्रदर्शक बनाया। उनकी वाणी से निकलने वाले शब्द लोगों के मन में संस्कार और शांति का संचार करते थे।

उनके निधन से न केवल गढ़वा, बल्कि पूरा धार्मिक समुदाय शोक और सम्मान की भावना से भरा है। उनके अनुयायी और विद्यार्थी उन्हें श्रद्धा से “गुरुदेव” कहकर याद कर रहे हैं।

श्रद्धांजलि का माहौल और समाज की संवेदना

उनके निधन की सूचना मिलते ही विशुनपुरा सहित आसपास के कई गांवों में शोक की लहर दौड़ गई। लोगों ने उनके निवास स्थान पर पहुंचकर श्रद्धासुमन अर्पित किए। गांव के बुजुर्गों ने कहा कि मिश्रा जी के जाने से “धर्म, ज्ञान और ज्योति का दीप” बुझ गया है, जो सदियों तक जलता रहा।

धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने इस क्षति को अपूर्णीय बताया और कहा कि उनकी शिक्षाएं और विचार आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।

एक श्रद्धालु ने कहा: “उनकी मुस्कुराहट में आशीर्वाद था, और उनके शब्दों में वेदों की गूंज। उन्होंने सिखाया कि धर्म केवल पूजा नहीं, बल्कि सेवा का मार्ग है।”

न्यूज़ देखो: धर्म के दीप की ज्योति समाज में बनी रहे

ज्योतिषाचार्य कैलाशपति मिश्रा जी का जाना केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक युग का अंत है। उन्होंने धर्म और समाज के बीच वह पुल बनाया था, जो आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्तंभ रहेगा। यह खबर हमें याद दिलाती है कि धर्म का सच्चा अर्थ लोककल्याण और करुणा में है।

हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

विद्या, सेवा और श्रद्धा की विरासत बनी रहे

श्रद्धेय मिश्रा जी का जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्चा धर्म दूसरों के जीवन में प्रकाश फैलाना है। अब समय है कि हम सब उनके दिखाए मार्ग पर चलें – ज्ञान, शांति और मानवता की राह पर।

सजग रहें, सेवा के पथ पर आगे बढ़ें।
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Written by

विशुनपुरा, गढ़वा

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