
#पांकी #पलामू #यूजीसी #विरोध : नए कानून के खिलाफ सवर्ण समाज का विशाल जनआंदोलन।
पलामू जिले के पांकी में UGC के नए कानून के विरोध में सवर्ण समाज द्वारा विशाल प्रदर्शन किया गया। पांकी और आसपास के दर्जनों गांवों से हजारों लोग सड़कों पर उतरे और कानून के प्रावधानों पर आपत्ति जताई। आंदोलन में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने प्रदर्शन को और व्यापक स्वरूप दिया। प्रदर्शनकारियों ने कानून को असंतुलित बताते हुए इसमें संशोधन की मांग की।
- पांकी, पलामू में UGC कानून के विरोध में विशाल प्रदर्शन।
- दर्जनों गांवों से हजारों की संख्या में लोग हुए शामिल।
- महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी, कई पंचायतों की मुखिया रहीं मौजूद।
- UGC कानून में निष्पक्ष जांच और दंड प्रावधान के अभाव पर आपत्ति।
- आंदोलन को बताया गया ऐतिहासिक और एकजुटता का प्रतीक।
पलामू जिले के पांकी प्रखंड में UGC कानून के विरोध में सवर्ण समाज द्वारा आयोजित प्रदर्शन ने क्षेत्र में व्यापक जनआंदोलन का रूप ले लिया। पांकी नगर सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों से हजारों की संख्या में लोग इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। सड़कें नारेबाजी और विरोध के स्वर से गूंज उठीं, जिससे पूरा क्षेत्र आंदोलनमय नजर आया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह अब तक के सबसे बड़े सामाजिक प्रदर्शनों में से एक रहा।
दर्जनों गांवों से जुटी भारी भीड़
इस प्रदर्शन में बोरोदीरी, पिपराटांड़, बहेरा, गणेशपुर, अंबाबार, सिरम, पगार, गोगों, उदयपुरा, महुअरी, छत्तरपुर, टंडवा, बलियारी, सोनपुरा, उकसू, बसडिहा, डंडार, वृतिया डंडर, कामत, चंद्रपुर, सदाबाह सहित दर्जनों गांवों से लोग पहुंचे। गांव-गांव से आए लोगों ने अपने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर UGC कानून के विरोध में एकजुटता दिखाई।
महिलाओं की सक्रिय भूमिका ने बढ़ाई आंदोलन की ताकत
इस आंदोलन की खास बात महिलाओं की बड़ी और प्रभावशाली भागीदारी रही। पगार पंचायत की मुखिया रीना देवी, लोहरसी पंचायत की मुखिया चिंता देवी, अनामिका सिंह, मंजुलता सहित बड़ी संख्या में महिलाओं ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया। महिलाओं की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह आंदोलन केवल किसी एक वर्ग या लिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के हर तबके की चिंता को दर्शाता है।
आम सभा से हुई आंदोलन की शुरुआत
प्रदर्शन की शुरुआत एक आम सभा से हुई, जहां वक्ताओं ने UGC के नए कानून के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से अपनी बात रखी। वक्ताओं ने कहा कि समानता के नाम पर लाया गया यह कानून व्यवहारिक रूप से असंतुलन पैदा करता है। उनका कहना था कि कानून में भावना के आधार पर शिकायत को स्वीकार करने की व्यवस्था गंभीर समस्या खड़ी कर सकती है।
कानून की कमियों पर उठे सवाल
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि UGC कानून में निष्पक्ष जांच की स्पष्ट गारंटी नहीं दी गई है। इसके साथ ही झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायत करने वालों के खिलाफ किसी प्रकार के दंड का प्रावधान न होना कानून की सबसे बड़ी कमजोरी है। वक्ताओं का कहना था कि इससे निर्दोष लोगों को बिना गलती के मानसिक और सामाजिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ सकता है।
वक्ताओं ने कहा: “यह कानून सुधार के नाम पर सामान्य वर्ग को असुरक्षा की स्थिति में डाल सकता है।”
सामाजिक संतुलन की मांग
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे किसी भी वर्ग के अधिकारों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन कानून बनाते समय सामाजिक संतुलन और न्याय का ध्यान रखा जाना जरूरी है। उन्होंने मांग की कि UGC कानून में स्पष्ट जांच प्रक्रिया, समयबद्ध कार्रवाई और झूठी शिकायत पर सख्त दंड का प्रावधान जोड़ा जाए।
शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावशाली प्रदर्शन
पूरे आंदोलन के दौरान प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा। अनुशासन और एकजुटता के साथ लोगों ने अपनी बात रखी। स्थानीय प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए था, लेकिन कहीं से किसी तरह की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। यह प्रदर्शन सामाजिक मुद्दों पर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने का उदाहरण बना।
क्षेत्र में बनी चर्चा का विषय
पांकी में हुए इस विशाल प्रदर्शन की चर्चा पूरे पलामू जिले में हो रही है। स्थानीय लोग इसे सवर्ण समाज की एकजुटता और जागरूकता का प्रतीक बता रहे हैं। आंदोलन में शामिल लोगों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखेंगे।
न्यूज़ देखो: सामाजिक कानूनों पर संवाद की जरूरत
पांकी का यह प्रदर्शन दिखाता है कि सामाजिक कानूनों को लागू करने से पहले व्यापक संवाद और सभी वर्गों की चिंताओं को समझना कितना जरूरी है। UGC कानून को लेकर उठे सवाल प्रशासन और नीति निर्माताओं के लिए विचार का विषय हैं। अब यह देखना अहम होगा कि सरकार इन आपत्तियों पर क्या कदम उठाती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जागरूक समाज ही मजबूत लोकतंत्र की पहचान
किसी भी लोकतंत्र में कानून तभी प्रभावी होते हैं, जब वे समाज के हर वर्ग का भरोसा जीतें। पांकी का यह आंदोलन सामाजिक जागरूकता और भागीदारी का उदाहरण है।
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