
#कोलेबिरा #कलश_यात्रा : अखंड हरिकीर्तन यज्ञ आरंभ—श्रद्धालुओं की भागीदारी से गूंजा क्षेत्र।
सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड के बरसलोया गांव में चार दिवसीय अखंड हरिकीर्तन सह यज्ञ महोत्सव की शुरुआत भव्य कलश यात्रा के साथ हुई। 30 मार्च 2026 को आयोजित इस यात्रा में 501 श्रद्धालुओं ने भाग लिया। वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक अनुष्ठानों के बीच यात्रा निकाली गई। आयोजन ने क्षेत्र में आस्था और सांस्कृतिक एकता का वातावरण निर्मित किया।
- बरसलोया गांव में चार दिवसीय यज्ञ महोत्सव का शुभारंभ।
- 501 श्रद्धालुओं ने भव्य कलश यात्रा में भाग लिया।
- लखेश्वर पंडा, पवन शर्मा, मानस रंजन पंडा ने कराया पूजन।
- यात्रा जगन्नाथ मंदिर से मालगो नदी तट तक निकाली गई।
- अखंड हरिकीर्तन से गांव में भक्तिमय माहौल बना।
कोलेबिरा प्रखंड के बरसलोया गांव में चार दिवसीय अखंड हरिकीर्तन सह यज्ञ महोत्सव का भव्य शुभारंभ कलश यात्रा के साथ किया गया। इस अवसर पर पूरे गांव में भक्ति और उत्साह का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। सुबह से ही श्रद्धालुओं का जमावड़ा लग गया था और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ यात्रा की तैयारी शुरू हो गई थी।
यात्रा का शुभारंभ जगन्नाथ मंदिर प्रांगण से वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया गया, जहां पंडितों द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना कर कलश पूजन संपन्न कराया गया।
वैदिक विधि-विधान के साथ यात्रा का प्रारंभ
कलश यात्रा में पंडित लखेश्वर पंडा, पवन शर्मा और मानस रंजन पंडा ने मंत्रोच्चार के साथ पूजा संपन्न कराई। महिलाएं, युवतियां और पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश लेकर कतारबद्ध तरीके से शामिल हुए।
आयोजन समिति ने बताया: “यह यात्रा सनातन परंपरा और सामूहिक आस्था का प्रतीक है।”
श्रद्धालुओं की अनुशासित भागीदारी इस यात्रा की विशेष पहचान रही।
501 श्रद्धालुओं की ऐतिहासिक भागीदारी
इस भव्य कलश यात्रा में 501 श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जिससे आयोजन और भी भव्य बन गया। महिलाएं कलश लेकर आगे बढ़ रही थीं, वहीं युवा वर्ग भक्ति गीतों पर झूमते नजर आए।
डीजे, बैंड-बाजा और “जय श्रीराम” के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
निर्धारित मार्ग से निकली यात्रा
यह यात्रा जगन्नाथ मंदिर से शुरू होकर—
- रामजानकी चौक
- बाजारडाढ़
- आमटोली
- केतुंगाधाम शिव मंदिर
होते हुए मालगो नदी तट तक पहुंची। पूरे मार्ग में ग्रामीणों द्वारा श्रद्धालुओं के लिए जलपान और विश्राम की व्यवस्था की गई थी।
मालगो नदी तट पर पवित्र जल संग्रह
मालगो नदी तट पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कलश में पवित्र जल भरवाया गया। वहां का वातावरण अत्यंत शांत और आध्यात्मिक रहा, जहां श्रद्धालु भक्ति में लीन दिखाई दिए।
इसके बाद सभी श्रद्धालु कलश लेकर यज्ञ मंडप की ओर लौटे।
यज्ञ महोत्सव और अखंड हरिकीर्तन का शुभारंभ
कलश यात्रा के समापन के साथ ही अखंड हरिकीर्तन सह यज्ञ महोत्सव का विधिवत शुभारंभ किया गया। शंखनाद, मंत्रोच्चार और भक्ति गीतों के बीच पूरा वातावरण राममय हो गया।
आने वाले दो दिनों तक “हरे राम, हरे राम, राम-राम हरे-हरे, हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण-कृष्ण हरे-हरे” महामंत्र से पूरा गांव गूंजता रहेगा।
आयोजन में समिति और प्रशासन की भूमिका
इस आयोजन को सफल बनाने में अविनाश पंडा, सोनू साहु, मानस रंजन पंडा, सुनीत पति सहित समिति के सभी पदाधिकारी और ग्रामीण सक्रिय रूप से जुटे रहे।
प्रशासनिक टीम भी मौके पर मौजूद रही और कार्यक्रम को शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आस्था और एकता का प्रतीक बना आयोजन
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि गांव की एकता और सामूहिक भावना का भी उदाहरण प्रस्तुत किया। इसमें सभी वर्ग के लोगों ने मिलकर भाग लिया।

न्यूज़ देखो: परंपरा और सामूहिक आस्था की ताकत
बरसलोया की यह कलश यात्रा दिखाती है कि ग्रामीण समाज आज भी अपनी परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। ऐसे आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करते हैं। अब सवाल यह है कि क्या आने वाली पीढ़ियां भी इसी उत्साह से इन परंपराओं को आगे बढ़ाएंगी? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आस्था को जीवित रखें, परंपरा को आगे बढ़ाएं
हमारी परंपराएं हमारी पहचान हैं और इन्हें सहेजना हमारी जिम्मेदारी है।
ऐसे आयोजनों में भाग लेकर हम अपनी संस्कृति को मजबूत बना सकते हैं।
जरूरी है कि युवा पीढ़ी भी इन परंपराओं से जुड़े और उन्हें आगे बढ़ाए।
सामूहिक आस्था ही समाज की सबसे बड़ी ताकत होती है।
अगर आपको यह आयोजन प्रेरणादायक लगा तो इसे जरूर साझा करें।
अपनी राय कमेंट में दें और इस सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में सहयोग करें।






