
#गिरिडीह #आम_हड़ताल : किसान-मजदूर संगठनों ने 12 फरवरी की हड़ताल को सफल बनाने का किया आह्वान
12 फरवरी की अखिल भारतीय आम हड़ताल को लेकर गिरिडीह जिले की छह विधानसभा क्षेत्रों में गतिविधियां तेज हो गई हैं। अखिल भारतीय किसान महासभा, झामस, एक्टू, भाकपा (माले) और असंगठित मजदूर मोर्चा के नेतृत्व में कार्यकर्ता सड़कों पर उतर रहे हैं। नेताओं ने चार लेबर कोड, मनरेगा और केंद्र की आर्थिक नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की है।
- गिरिडीह की छह विधानसभा क्षेत्रों में आंदोलन तेज।
- किसान, मजदूर और वाम संगठनों का संयुक्त नेतृत्व।
- चार लेबर कोड और मनरेगा मुद्दे पर विरोध।
- अमेरिकी डील को आर्थिक संप्रभुता पर हमला बताया।
- 12 फरवरी को हड़ताल सफल बनाने का आह्वान।
12 फरवरी की प्रस्तावित अखिल भारतीय आम हड़ताल को सफल बनाने के लिए गिरिडीह जिले में विभिन्न संगठनों के नेता सक्रिय हो गए हैं। जिले की छह विधानसभा क्षेत्रों में कार्यकर्ता जनसंपर्क और प्रदर्शन के माध्यम से लोगों से समर्थन की अपील कर रहे हैं।
इन नेताओं की अगुवाई में आंदोलन
इस आंदोलन का नेतृत्व अखिल भारतीय किसान महासभा के पूरन महतो, भाकपा (माले) नेता राजेश सिन्हा, कन्हाई पांडेय, मेहताब अली मिर्जा (गिरिडीह), अजीत राय (मधुबन-पीरटांड़), शंकर पांडेय (बेंगाबाद) और रामलाल मुर्मू (बेंगाबाद) कर रहे हैं।
नेताओं ने संयुक्त रूप से कहा कि यह हड़ताल मजदूरों, किसानों और आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए जरूरी है।
हड़ताल के प्रमुख मुद्दे
आंदोलनकारी संगठनों ने केंद्र सरकार की नीतियों को हड़ताल का मुख्य कारण बताया है।
नेताओं का कहना है कि चार लेबर कोड मजदूर वर्ग के अधिकारों पर सीधा हमला हैं और इससे श्रमिकों की सुरक्षा कमजोर होगी।
इसके अलावा मनरेगा को कमजोर करने के प्रयासों को ग्रामीण गरीबों और गांवों पर हमला बताया गया है।
नेताओं ने हाल की अमेरिकी डील को भारत की आर्थिक संप्रभुता के लिए नुकसानदायक बताते हुए कहा कि इससे भारतीय किसानों को असमान और विनाशकारी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।
व्यापक समर्थन की अपील
भाकपा (माले) और सहयोगी संगठनों ने राज्य की जनता, मजदूरों, किसानों, नौजवानों, छात्रों, महिलाओं और सभी जनसंगठनों से 12 फरवरी को सड़कों पर उतरकर हड़ताल को सफल बनाने की अपील की है।
नेताओं का दावा है कि यह हड़ताल केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ एक मजबूत लोकतांत्रिक आवाज साबित होगी।
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गिरिडीह जिले में आम हड़ताल को लेकर सियासी और सामाजिक गतिविधियां तेज हो चुकी हैं। विभिन्न संगठनों की सक्रियता से यह स्पष्ट है कि 12 फरवरी को जिले में व्यापक असर देखने को मिल सकता है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आम जनता का कितना समर्थन इस आंदोलन को मिलता है।
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लोकतंत्र में विरोध की भूमिका
लोकतांत्रिक व्यवस्था में हड़ताल और आंदोलन अपनी बात रखने का माध्यम हैं। हालांकि इसका असर आम जनजीवन पर भी पड़ता है। ऐसे में संवाद और समाधान की दिशा में पहल भी उतनी ही जरूरी है।
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