बीसीसीएल कुसुंडा परियोजना में 196 मजदूरों की छंटनी से हंगामा, नाराजगी में फूटा गुस्सा

बीसीसीएल कुसुंडा परियोजना में 196 मजदूरों की छंटनी से हंगामा, नाराजगी में फूटा गुस्सा

author News देखो Team
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#धनबाद #श्रमिक_विरोध – नाम बदला, नौकरी छीनी : आरके ट्रांसपोर्ट की नई पहचान ‘आरके अर्थ’ बनते ही 196 मजदूरों को काम से हटाया गया

  • ऐना आरके ट्रांसपोर्ट परियोजना में अचानक 196 मजदूरों को काम से हटाया गया
  • कंपनी का नाम बदला कर ‘आरके अर्थ प्राइवेट लिमिटेड’ किया गया, बिना सूचना निकाले गए मजदूर
  • 800 में से 400 मजदूरों को रखा गया, चयनात्मक छंटनी पर भड़के लोग
  • मजदूरों ने परियोजना गेट पर किया विरोध प्रदर्शन और जमकर की नारेबाजी
  • परिवार की आजीविका पर संकट, बच्चों की पढ़ाई तक पर मंडराया खतरा
  • श्रमिकों ने प्रशासन से हस्तक्षेप की लगाई गुहार, नहीं तो उग्र आंदोलन की चेतावनी

छंटनी का नोटिस बना तनाव का कारण

धनबाद के कुसुंडा क्षेत्र अंतर्गत बीसीसीएल की ऐना आरके ट्रांसपोर्ट आउटसोर्सिंग परियोजना में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब 196 मजदूरों को बिना पूर्व सूचना काम से हटा दिया गया। प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों का आरोप है कि प्रबंधन ने केवल एक नोटिस चिपका दिया जिसमें लिखा गया था कि 25 मई से कंपनी की सेवा समाप्त कर दी जाएगी।

‘आरके ट्रांसपोर्ट’ से ‘आरके अर्थ’ : नाम बदला, नीति बदली

प्रदर्शनकारी मजदूरों का कहना है कि पहले कंपनी ‘आरके ट्रांसपोर्ट’ के नाम से परिचालित थी, जिसे अब ‘आरके अर्थ प्राइवेट लिमिटेड’ कर दिया गया है। लेकिन नाम बदलते ही काम करने वालों की किस्मत भी बदल दी गई। बिना बातचीत और सफाई के सीधे 196 मजदूरों को बाहर कर दिया गया।

चयनात्मक छंटनी पर भड़के मजदूर

आक्रोशित मजदूरों ने बताया कि कंपनी दावा कर रही है कि माइंस बंद हो रही है, लेकिन 800 मजदूरों में से 400 से अधिक अब भी कार्यरत हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि बाकी को ही क्यों हटाया गया? यह साफ तौर पर भेदभाव और शोषण है। इससे उनका जीवन और भविष्य दोनों खतरे में हैं।

परिवार पर सीधा असर : बच्चों की पढ़ाई भी संकट में

काम से हटाए गए मजदूरों ने कहा कि इस निर्णय से उनके परिवार की रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ा है। बच्चों की शिक्षा, घर का खर्च और स्वास्थ्य जैसे मुद्दे गंभीर हो गए हैं। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो वे वृहद आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

प्रबंधन की चुप्पी, प्रशासन से न्याय की उम्मीद

अब तक प्रबंधन की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं आया है। मजदूरों ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है ताकि उन्हें न्याय मिले और वे पुनः काम पर लौट सकें।

न्यूज़ देखो : हर मेहनतकश की आवाज़

न्यूज़ देखो की टीम लगातार ऐसे मुद्दों को सामने लाती रही है, जहाँ श्रमिकों की आवाज़ अनसुनी रह जाती है। हमारा प्रयास है कि हर वर्ग की बात शासन और समाज तक पहुँचे और न्याय हो सके।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

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