रांची में होगा ‘गोदान’ काव्य रूपांतरण का भव्य लोकार्पण, पद्मश्री बलबीर दत्त करेंगे उद्घाटन

रांची में होगा ‘गोदान’ काव्य रूपांतरण का भव्य लोकार्पण, पद्मश्री बलबीर दत्त करेंगे उद्घाटन

author News देखो Team
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#रांची #साहित्य_लोकार्पण – झारखंड के चर्चित साहित्यकार राकेश कुमार की नई पुस्तक का विमोचन, कई जिलों से जुटेंगे साहित्यप्रेमी

  • 24 मई को रांची में होगा ‘गोदान’ (काव्य रूपांतरण) का लोकार्पण समारोह
  • लोकार्पण पद्मश्री बलबीर दत्त के करकमलों से होगा, अनेक विद्वानों की उपस्थिति
  • समारोह का आयोजन प्रभात प्रकाशन के सभाकक्ष में अपराह्न 3 बजे से
  • कार्यक्रम का संचालन शोधार्थी विद्यावैभव भारद्वाज करेंगे
  • रांची, गढ़वा, लातेहार, हजारीबाग, धनबाद समेत कई जिलों से जुटेंगे साहित्यकार
  • साहित्य प्रेमियों से अधिकाधिक उपस्थिति की अपील

रचनात्मक सृजन को मिलेगा नया आयाम

रांची। हिन्दी साहित्य जगत को एक नया साहित्यिक उपहार मिलने जा रहा है। हिन्दी साहित्य भारती, झारखंड के प्रांतीय महामंत्री राकेश कुमार द्वारा रचित एवं प्रभात प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित बहुप्रतीक्षित पुस्तक ‘गोदान (काव्य रूपांतरण)’ का लोकार्पण 24 मई 2025 को अपराह्न 3 बजे किया जाएगा।
इस भव्य साहित्यिक आयोजन में पद्मश्री बलबीर दत्त मुख्य अतिथि के रूप में पुस्तक का लोकार्पण करेंगे। कार्यक्रम का आयोजन राँची रेलवे स्टेशन रोड स्थित प्रभात प्रकाशन के सभाकक्ष में होगा।

“साहित्यिक मूल्यों के संरक्षण और संवर्धन के इस विशेष अवसर पर हम सबको एकजुट होकर सहभागिता निभानी चाहिए।”
बलराम पाठक (अध्यक्ष, रांची जिला हिन्दी साहित्य भारती)

साहित्यजगत की प्रमुख हस्तियाँ होंगी शामिल

लोकार्पण समारोह में शामिल होने वाले प्रमुख साहित्यकारों में डॉ अशोक प्रियदर्शी, डॉ मयंक मुरारी, डॉ राकेश कुमार सिंह और डॉ अरुण सज्जन जैसे चर्चित नाम शामिल हैं। इस आयोजन का संचालन रांची विश्वविद्यालय के शोधार्थी विद्यावैभव भारद्वाज द्वारा किया जाएगा।

झारखंड भर से जुटेंगे साहित्यप्रेमी

रांची जिला हिन्दी साहित्य भारती के अध्यक्ष बलराम पाठक, उपाध्यक्ष संजय सर्राफ, संगठन सचिव अजय राय और सचिव सुकुमार झा ने संयुक्त रूप से जानकारी दी कि इस अवसर पर झारखंड के कई जिलों जैसे गढ़वा, लातेहार, हजारीबाग, जमशेदपुर, धनबाद, पलामू से सैकड़ों की संख्या में साहित्य प्रेमी और लेखकगण शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि यह आयोजन हिन्दी साहित्य को नई ऊर्जा प्रदान करेगा और लोगों को प्रेरित करेगा कि वे अपने लेखन को गंभीरता से आगे बढ़ाएँ।

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