
#गिरिडीह #फोरलेन_जाम : भंडारीडीह पुल निर्माण में अव्यवस्था से आम जनता की सुरक्षा पर संकट गहराया।
गिरिडीह जिले के पचंबा फोरलेन स्थित भंडारीडीह में पुल निर्माण कार्य के दौरान लगातार लग रहे भारी जाम को लेकर भाकपा-माले नेता राजेश सिन्हा ने गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि निर्माण कार्य में निरंतरता और जाम नियंत्रण के लिए 24 घंटे शिफ्टवार पुलिस तैनाती नहीं की गई, तो किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। सोमवार को उन्होंने स्वयं मौके पर पहुंचकर वस्तुस्थिति का जायजा लिया। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को आवेदन देने की बात भी कही गई है।
- भंडारीडीह, पचंबा फोरलेन पर पुल निर्माण के दौरान रोजाना भारी जाम।
- भाकपा-माले नेता राजेश सिन्हा ने स्थल निरीक्षण कर जताई चिंता।
- जाम नियंत्रण के लिए 24 घंटे पुलिस टीम तैनात करने की मांग।
- पुल निर्माण में देरी के लिए संवेदक और विभाग दोनों जिम्मेदार बताए गए।
- सुरक्षा की गारंटी नहीं मिली तो बड़े हादसे की चेतावनी।
गिरिडीह जिले का पचंबा फोरलेन, जो कभी आवागमन के लिए राहत माना गया था, आज भंडारीडीह के पास जाम और अव्यवस्था का बड़ा कारण बनता जा रहा है। पुल निर्माण कार्य के कारण यहां रोजाना वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं। स्कूली बच्चे, मरीज, नौकरीपेशा लोग और व्यवसायी सभी घंटों जाम में फंसे रहने को मजबूर हैं। इसी मुद्दे को लेकर भाकपा-माले नेता राजेश सिन्हा ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
वस्तुस्थिति का जायजा लेने पहुंचे राजेश सिन्हा
सोमवार को राजेश सिन्हा भंडारीडीह पहुंचे और फोरलेन पर चल रहे पुल निर्माण कार्य तथा ट्रैफिक व्यवस्था का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि पुल का निर्माण आवश्यक है, लेकिन जिस तरीके से काम किया जा रहा है, वह पूरी तरह अव्यवस्थित है।
उन्होंने कहा कि कभी चार दिन काम चलता है और फिर चालीस दिन तक निर्माण कार्य बंद रहता है, जिससे जाम की समस्या और गंभीर हो जाती है।
माइंड मैनेजमेंट की कमी से बिगड़े हालात
राजेश सिन्हा ने कहा कि भंडारीडीह में जाम की सबसे बड़ी वजह सही माइंड मैनेजमेंट की कमी है। जब काम करना चाहिए तब काम नहीं होता और जब रुकना चाहिए तब अव्यवस्थित तरीके से काम शुरू हो जाता है।
उनका कहना था कि गिरिडीह फोरलेन जिले के लिए एक साथ वरदान और अभिशाप दोनों बन गया है। सड़क बनी, लेकिन उसके रखरखाव और निर्माण प्रबंधन में भारी कमी रह गई।
तय समय से दोगुना हो चुका प्रोजेक्ट
भाकपा-माले नेता ने बताया कि फोरलेन और पुल निर्माण का काम एक साल में पूरा होना था, लेकिन अब दो साल बीतने के बावजूद काम पूरा होता नजर नहीं आ रहा है।
उन्होंने कहा कि संवेदक का जितना दोष है, उससे कहीं ज्यादा दोष संबंधित विभाग का है। जिला प्रशासन इस स्थिति से अवगत है, लेकिन ठोस कार्रवाई के बजाय चुप्पी साधे हुए है।
प्रशासनिक नरमी पर उठे सवाल
राजेश सिन्हा ने आरोप लगाया कि जिस विधानसभा क्षेत्र में खुद मंत्री का निवास हो, वहां प्रशासन अपने काम में नरमी दिखाता है।
उन्होंने कहा कि यदि संबंधित विभाग अतिक्रमण नहीं हटा पा रहा है और इसी वजह से निर्माण कार्य बाधित है, तो जिला प्रशासन को खुलकर हस्तक्षेप करना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अतिक्रमण हटाने से पहले जिन लोगों का रोजगार प्रभावित हो रहा है, उनके लिए वैकल्पिक रोजगार या मुआवजे की व्यवस्था अनिवार्य है।
नगर निगम और आरसीडी विवाद का उदाहरण
उन्होंने नगर निगम क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले 24 वर्षों से दुकानदारों से टैक्स वसूला जा रहा था, लेकिन बाद में पता चला कि वह जमीन नगर निगम की नहीं बल्कि आरसीडी की थी।
राजेश सिन्हा ने कहा कि आरसीडी ने कभी समय पर दावा नहीं किया और अब आपसी विभागीय खींचतान का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि अफसर अक्सर अफसरों के होते हैं, गरीब और मध्यमवर्ग के नहीं।
24 घंटे पुलिस तैनाती की मांग
जाम की गंभीरता को देखते हुए राजेश सिन्हा ने मांग की कि जब तक पुल निर्माण कार्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक भंडारीडीह क्षेत्र में पुलिस प्रशासन की टीम 24 घंटे शिफ्टवार तैनात रहे।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते ट्रैफिक नियंत्रण और सुरक्षा के उपाय नहीं किए गए, तो किसी बड़े हादसे की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
राजेश सिन्हा ने कहा: “काम में देरी और जाम की अनदेखी से आम लोगों की जान खतरे में है। सुरक्षा की गारंटी देना प्रशासन की जिम्मेदारी है।”
आम जनता को संगठित होने की अपील
भाकपा-माले नेता ने कहा कि गिरिडीह में सुधार की बातें बहुत आसान हैं, लेकिन वास्तविक सुधार के लिए आम जनता को सड़क पर उतरना पड़ेगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरे राजनीतिक दलों के नेता एक-दूसरे के पार्टनर बनकर चुप रहते हैं, इसलिए जनता की समस्याएं अनसुनी रह जाती हैं।
न्यूज़ देखो: विकास बनाम अव्यवस्था की सच्चाई
भंडारीडीह का जाम केवल ट्रैफिक समस्या नहीं, बल्कि विकास कार्यों में लापरवाही का उदाहरण है। समय पर काम पूरा न होना और ट्रैफिक प्रबंधन की कमी सीधे आम जनता की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। प्रशासन और विभाग अगर अब भी गंभीर नहीं हुए, तो इसका खामियाजा लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर चुकाना पड़ सकता है। यह स्थिति तत्काल हस्तक्षेप की मांग करती है।
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सुरक्षित सड़क, जवाबदेह व्यवस्था की जरूरत
सड़क और पुल विकास के प्रतीक हैं, लेकिन जब वही विकास लोगों के लिए खतरा बन जाए, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
भंडारीडीह की जनता आज केवल जाम से राहत नहीं, बल्कि सुरक्षा और जवाबदेही भी चाहती है।
क्या आपके इलाके में भी ऐसे अधूरे प्रोजेक्ट लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं? अपनी आवाज बुलंद करें, इस खबर को साझा करें और सुरक्षित सड़कों व जिम्मेदार प्रशासन की मांग को मजबूती दें।



