
#चैनपुर #आंगनबाड़ी_प्रशिक्षण : तीन दिवसीय सत्र में 40 सेविकाओं को आधुनिक प्रारंभिक बाल्य शिक्षा की दी गई विशेष प्रशिक्षण।
चैनपुर प्रखंड सभागार में आंगनबाड़ी सेविकाओं के लिए तीन दिवसीय प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हुआ। उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित के निर्देश पर आयोजित इस सत्र में 40 सेविकाओं को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से प्रशिक्षित किया गया। विक्रमशिला एजुकेशन रिसोर्स सोसाइटी के सहयोग से संचालित इस कार्यक्रम का उद्देश्य छोटे बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना है। प्रशिक्षण के दौरान “नन्हे कदम” पुस्तक और शिक्षण किट भी वितरित की गई।
- चैनपुर प्रखंड सभागार में तीन दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न।
- 40 आंगनबाड़ी सेविकाओं ने 16 से 18 फरवरी तक लिया भाग।
- विक्रमशिला एजुकेशन रिसोर्स सोसाइटी के सहयोग से आयोजन।
- प्रतिभागियों को “नन्हे कदम” पुस्तक व शिक्षण किट प्रदान।
- जिले की 500 सेविकाओं को सशक्त बनाने का लक्ष्य।
चैनपुर प्रखंड में आंगनबाड़ी सेविकाओं को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों में दक्ष बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित के निर्देशानुसार आयोजित तीन दिवसीय प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम बुधवार को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस प्रशिक्षण में चैनपुर प्रखंड की 40 आंगनबाड़ी सेविकाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों को अधिक प्रभावी बनाते हुए छोटे बच्चों के समग्र विकास को सुनिश्चित करना रहा।
16 से 18 फरवरी तक चला प्रशिक्षण सत्र
यह प्रशिक्षण 16 फरवरी से 18 फरवरी तक चैनपुर प्रखंड सभागार में आयोजित किया गया। जिला स्तरीय चयन समिति के अनुमोदन पर यह कार्यक्रम संचालित हुआ, जिसमें विक्रमशिला एजुकेशन रिसोर्स सोसाइटी का सहयोग प्राप्त हुआ।
मुख्य प्रशिक्षक एवं जिला समन्वयक पिंटू दास, सहायक प्रशिक्षक सुमन गोस्वामी और प्रशांत कुमार महतो ने पूरे सत्र का संचालन किया। प्रशिक्षकों ने सेविकाओं को व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया, ताकि वे इसे सीधे अपने केंद्रों पर लागू कर सकें।
“नन्हे कदम” के जरिए सीखने की नई पहल
प्रशिक्षण के दौरान सभी प्रतिभागी सेविकाओं को “नन्हे कदम” पुस्तक और आवश्यक शिक्षण सामग्री की किट उपलब्ध कराई गई। यह पुस्तक प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को सरल और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।
प्रशिक्षकों ने बताया कि बच्चों को खेल-खेल में सीखने का अवसर देना अत्यंत आवश्यक है। पारंपरिक पद्धतियों के बजाय रोचक गतिविधियों और सहभागिता आधारित शिक्षण से बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास बेहतर ढंग से संभव है।
सीखने का अनुकूल और खुशनुमा वातावरण
प्रशिक्षण का मुख्य फोकस इस बात पर रहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए एक अनुकूल, सुरक्षित और आनंददायक वातावरण कैसे तैयार किया जाए। प्रशिक्षकों ने उदाहरणों और समूह गतिविधियों के माध्यम से समझाया कि कैसे रंगीन सामग्री, गीत, कहानी और खेल के जरिए बच्चों की सीखने की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है।
मुख्य प्रशिक्षक पिंटू दास ने कहा:
“यदि आंगनबाड़ी सेविकाएं आधुनिक शिक्षण तकनीकों को अपनाएं, तो प्रारंभिक अवस्था में ही बच्चों की बुनियाद मजबूत की जा सकती है।”
उन्होंने यह भी कहा कि प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता ही आगे की स्कूली शिक्षा की दिशा तय करती है।
जिलेभर में 500 सेविकाओं को सशक्त बनाने का लक्ष्य
उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित के विजन के तहत पूरे जिले की 500 आंगनबाड़ी सेविकाओं को इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से सशक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर शिक्षा और स्वास्थ्य की मजबूत नींव रखना है।
प्रशिक्षकों ने बताया कि प्रशिक्षण प्राप्त सेविकाएं अपने-अपने केंद्रों पर अन्य कार्यकर्ताओं के साथ भी इस ज्ञान को साझा करेंगी, जिससे व्यापक स्तर पर सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।
प्रारंभिक शिक्षा से मजबूत होगी भविष्य की नींव
विशेषज्ञों का मानना है कि जीवन के शुरुआती वर्षों में दी गई सही दिशा और पोषण ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला बनती है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से सेविकाओं की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी, जिससे बच्चों के समग्र विकास में तेजी आएगी।
न्यूज़ देखो: मजबूत बुनियाद से संवरेगा आने वाला कल
चैनपुर में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम दर्शाता है कि प्रशासन अब प्रारंभिक बाल्य शिक्षा को गंभीरता से ले रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों को सशक्त बनाकर ही ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य की मजबूत नींव रखी जा सकती है। यदि यह पहल प्रभावी रूप से लागू होती है, तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर सकारात्मक रूप से दिखाई देगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
नन्हे कदम, बड़ा बदलाव
बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा में किया गया हर सुधार समाज के भविष्य को दिशा देता है। आंगनबाड़ी सेविकाओं का सशक्त होना गांव-गांव में नई उम्मीद जगाता है।
आइए, हम भी अपने आसपास के केंद्रों की गतिविधियों पर नजर रखें और सकारात्मक सहयोग दें।
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