
#विश्रामपुर #विष्णु_मंदिर : आस्था, कला और श्रद्धा का संगम बना तोलरा का विष्णु मंदिर।
पलामू जिले के विश्रामपुर प्रखंड स्थित आदर्श गांव तोलरा का विष्णु मंदिर इन दिनों तेजी से प्रसिद्ध हो रहा है। अपनी अद्भुत नक्काशी, भव्य प्रतिमाओं और भक्तों की पूर्ण होती मनोकामनाओं के कारण यह मंदिर आसपास के क्षेत्रों में आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। दिन-ब-दिन यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है, जिससे गांव की धार्मिक पहचान भी मजबूत हुई है। मंदिर अब पूजा-अर्चना के साथ-साथ सामाजिक और पारिवारिक आयोजनों का भी प्रमुख स्थल बनता जा रहा है।
- विश्रामपुर प्रखंड के तोलरा गांव में स्थित विष्णु मंदिर की बढ़ती ख्याति।
- भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और भूदेवी की जीवंत प्रतीत होती प्रतिमाएं।
- नूतन देवी और बिनय तिवारी द्वारा प्रतिमा निर्माण में किया गया विशेष योगदान।
- वृहस्पतिवार संध्या आरती में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़।
- हनुमत पूजा और घी के लड्डू का भोग बना मंदिर की विशेष पहचान।
पलामू प्रमंडल में कई ऐसे मंदिर हैं जो अपनी ध्वजा-पताका, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि या विशेष धार्मिक परंपराओं के लिए जाने जाते हैं, लेकिन ग्रामीण अंचल में स्थित तोलरा गांव का विष्णु मंदिर अपनी नक्काशी और कलात्मक भव्यता के कारण अलग पहचान बना रहा है। यह मंदिर अब केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि श्रद्धा, विश्वास और सौंदर्य का संगम बन चुका है।
नक्काशी और शिल्पकला का अद्भुत उदाहरण
तोलरा स्थित विष्णु मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी बारीक और आकर्षक नक्काशी है। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित भगवान विष्णु की प्रतिमा इतनी जीवंत प्रतीत होती है कि श्रद्धालुओं को ऐसा अनुभव होता है मानो स्वयं भगवान विष्णु ने तोलरा में अवतार लिया हो। भगवान विष्णु के दोनों ओर माता लक्ष्मी और भूदेवी की प्रतिमाएं भी अत्यंत सजीव और कलात्मक हैं, जिन्हें देखकर यह विश्वास करना कठिन हो जाता है कि ये मानव निर्मित मूर्तियां हैं।
प्रतिमा निर्माण में भक्त का योगदान
इन भव्य प्रतिमाओं के निर्माण में गांव के ही एक भक्त नूतन देवी, पति बिनय तिवारी का विशेष योगदान रहा है। उन्होंने प्रतिमाओं के निर्माण और स्थापना में मोटी राशि खर्च की, जिससे मंदिर की भव्यता और धार्मिक गरिमा और भी बढ़ गई। प्रतिमाओं की सुंदरता को देखने के लिए खासकर महिलाओं की काफी भीड़ मंदिर परिसर में देखी जा रही है।
मनोकामना पूर्ति की बढ़ती मान्यता
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का मानना है कि इस मंदिर में सच्चे मन से मांगी गई मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसी विश्वास के कारण अब बड़ी संख्या में लोग अपने जन्मदिन, शादी की सालगिरह और अन्य शुभ अवसरों पर यहां पूजा-अर्चना करना पसंद कर रहे हैं। धीरे-धीरे यह मंदिर आसपास के क्षेत्रों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है।
संध्या आरती और धार्मिक आयोजन
मंदिर संचालन समिति के संरक्षक बीरेंद्र तिवारी, अध्यक्ष सच्चिदानंद तिवारी और सचिव गोखूल तिवारी सहित सुमंत तिवारी, धनंजय तिवारी, संजय तिवारी और अरुण त्रिवेदी ने बताया कि प्रत्येक वृहस्पतिवार को संध्या आरती के समय मंदिर में भारी भीड़ उमड़ती है। आरती के दौरान पूरा वातावरण भक्ति और श्रद्धा से सराबोर हो जाता है।
हनुमत पूजा और विशेष भोग की परंपरा
संरक्षक बीरेंद्र तिवारी ने बताया कि जब से मंदिर प्रांगण में हनुमत पूजा और संध्या प्रवचन का कार्यक्रम प्रारंभ हुआ है, तब से प्रतिदिन घी के लड्डू का भोग लगाया जा रहा है। खास बात यह है कि यह भोग किसी न किसी भक्त द्वारा दान स्वरूप दिया जाता है, जिससे सामूहिक सहभागिता और श्रद्धा की भावना और मजबूत हुई है।
सहयोग और दान में आगे ग्रामीण
मंदिर समिति के सचिव गोखूल तिवारी ने बताया कि मंदिर के संचालन, प्रसाद और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए तोलरा और अटरिया गांव के लोग ही नहीं, बल्कि आसपास के प्रमुख लोग भी सदैव सहयोग के लिए तत्पर रहते हैं। यह सहयोग मंदिर को सामाजिक एकता और सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक बनाता है।
श्रद्धालुओं से समिति की अपील
विष्णु मंदिर संचालन समिति ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे एक बार अवश्य इस मंदिर में आकर इसकी सुंदरता और आध्यात्मिक शांति का अनुभव करें। समिति का कहना है कि कलयुग में भगवान विष्णु का इतना भव्य और मनोहारी मंदिर विरले ही देखने को मिलता है, जहां दर्शन के बाद मन को विशेष संतोष और सुख की अनुभूति होती है।
न्यूज़ देखो: ग्रामीण आस्था की मजबूत होती पहचान
तोलरा का विष्णु मंदिर यह दर्शाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी आस्था और कला का अद्भुत संगम संभव है। यह मंदिर न केवल धार्मिक स्थल है, बल्कि गांव की सांस्कृतिक पहचान को भी सशक्त बना रहा है। अब आवश्यकता है कि प्रशासन और समाज मिलकर ऐसे स्थलों के संरक्षण और प्रचार पर भी ध्यान दें।
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तोलरा का विष्णु मंदिर आस्था और सौंदर्य का जीवंत उदाहरण है।
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