
#कोलेबिरा #पेसा_ग्रामसभा : लचरागढ़ में पारंपरिक ग्राम सभा गठन और समितियों के निर्माण को लेकर हुई महत्वपूर्ण बैठक।
सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड के लचरागढ़ में पेसा कानून के तहत पारंपरिक ग्राम सभा के गठन को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में ग्राम सभा को मजबूत बनाने, निगरानी एवं कार्यकारिणी समितियों के गठन और जल्द पंजीकरण कराने पर जोर दिया गया। ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए नियमित बैठकें आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया।
- लचरागढ़ के ईंद टांड़ मैदान स्थित इनडोर स्टेडियम में आयोजित हुई बैठक।
- बैठक की अध्यक्षता पारंपरिक पहन नरेन्द्र लुगुन ने की।
- वक्ताओं ने पेसा नियमावली के अनुसार ग्राम सभा मजबूत करने पर दिया जोर।
- ग्राम सभा के अंतर्गत 9 समितियों के गठन का प्रस्ताव रखा गया।
- लोगों को सूचना देने के लिए हर शनिवार और बुधवार डुगडुगी पीटने का निर्णय।
सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड क्षेत्र के लचरागढ़ में पेसा कानून के तहत पारंपरिक ग्राम सभा के गठन और उसकी निगरानी तथा कार्यकारिणी समिति के गठन को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह बैठक ऐतिहासिक ईंद टांड़ मैदान स्थित इनडोर स्टेडियम में आयोजित हुई।
बैठक की अध्यक्षता पारंपरिक पहन नरेन्द्र लुगुन ने की। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे और ग्राम सभा को सशक्त बनाने को लेकर अपने विचार रखे।
ग्राम सभा के पंजीकरण पर दिया गया जोर
बैठक में मौजूद वक्ताओं ने पेसा नियमावली के अनुरूप ग्राम सभा को मजबूत बनाने पर जोर दिया। इस दौरान क्लेमेंट टेटे, एंथोनी बघवार, अल्बिनुस लुगुन, संजय पॉल केरकेट्टा और कालेश्वर नायक ने अपने विचार रखते हुए कहा कि ग्राम सभा का जल्द से जल्द पंजीकरण कराया जाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि ग्राम सभा के पंजीकरण के बाद गांव के विकास कार्यों को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सकेगा।
लोगों को सूचना देने के लिए डुगडुगी की व्यवस्था
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि आगामी वृहद ग्राम सभा की बैठक बुलाने के लिए प्रत्येक शनिवार और बुधवार को डुगडुगी पीटकर आम जनता को सूचना दी जाएगी।
इसका उद्देश्य अधिक से अधिक ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित करना है, ताकि ग्राम सभा के निर्णय सामूहिक सहमति से लिए जा सकें।
नौ समितियों के गठन का प्रस्ताव
ग्राम सभा को प्रभावी बनाने के लिए बैठक में कुल नौ समितियों के गठन का प्रस्ताव रखा गया। इनमें ग्राम विकास समिति, सार्वजनिक संपदा समिति, कृषि समिति, स्वास्थ्य समिति, आधारभूत संरचना समिति, शिक्षा समिति, निगरानी समिति, बाजार समिति और खेल समिति शामिल होंगी।
इन समितियों के माध्यम से गांव के विभिन्न विकास कार्यों और सामाजिक गतिविधियों को व्यवस्थित ढंग से संचालित किया जाएगा।
तीन प्रकार की बैठकों का होगा आयोजन
बैठक में यह भी तय किया गया कि ग्राम सभा के अंतर्गत तीन प्रकार की बैठकें आयोजित की जाएंगी। इनमें वृहत ग्राम सभा (सार्वजनिक ग्राम सभा), विशेष ग्राम सभा और संयुक्त ग्राम सभा शामिल होंगी।
साथ ही यह स्पष्ट किया गया कि ग्राम सभा के पंजीकरण के बाद विकास योजनाओं के लिए गठित या चयनित ग्राम समिति ही लाभुकों का चयन करेगी।
मतदाता सूची में नाम होने पर ही मिलेगी भागीदारी
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि ग्राम सभा की बैठकों में वही लोग भाग ले सकेंगे जिनका नाम मतदाता सूची में दर्ज होगा और जो लचरागढ़ राजस्व ग्राम के अंतर्गत आते हैं।
ग्राम सभा का नाम “पारंपरिक ग्राम सभा, लचरागढ़” रखा जाएगा।
बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे उपस्थित
इस बैठक में जॉर्ज कण्डुलना, जेवियर होबो (महतो), हरमन कुल्लू, अनसेलम कुल्लू, पिट्रूस केरकेट्टा, जेरेमियस बागे, अभिराम सुरीन और हीरमूस लुगुन सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
बैठक के अंत में विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा के बाद कालेश्वर नायक के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।
न्यूज़ देखो: ग्राम सभा से मजबूत होती है स्थानीय स्वशासन व्यवस्था
पेसा कानून का उद्देश्य आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभा को सशक्त बनाना और स्थानीय लोगों को विकास कार्यों में भागीदारी देना है। यदि ग्राम सभा सक्रिय और संगठित हो, तो गांव के विकास से जुड़े कई फैसले स्थानीय स्तर पर ही प्रभावी ढंग से लिए जा सकते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सामूहिक भागीदारी से होगा गांव का विकास
ग्राम सभा गांव के लोकतांत्रिक ढांचे की सबसे महत्वपूर्ण इकाई मानी जाती है। जब ग्रामीण एकजुट होकर निर्णय लेते हैं, तो विकास कार्यों में पारदर्शिता और सहभागिता दोनों बढ़ती हैं।
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