
#बरवाडीह #जनकल्याण : राशन नहीं मिलने से परेशान आदिम जनजाति परिवार प्रमुख के चेम्बर पहुंचे, तत्काल कार्रवाई से संकट टला।
बरवाडीह प्रखंड के पुटुवागढ़ क्षेत्र में आदिम जनजाति परिवारों को दिसंबर माह का राशन नहीं मिलने से गंभीर खाद्य संकट उत्पन्न हो गया था। परेशान परिवार शुक्रवार को जनप्रतिनिधियों के नेतृत्व में प्रखंड प्रमुख के चेम्बर पहुंचे और अपनी समस्या रखी। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर तुरंत हस्तक्षेप किया गया, जिसके बाद मौके पर ही दिसंबर माह का राशन वितरण कराया गया। यह घटना प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की सक्रियता का उदाहरण बनी।
- पुटुवागढ़ क्षेत्र के दर्जनों आदिम जनजाति परिवार थे प्रभावित।
- दिसंबर माह का राशन नहीं मिलने से भोजन का संकट गहराया।
- भाजपा मंडल अध्यक्ष मनोज प्रसाद के नेतृत्व में प्रमुख से मिले पीड़ित।
- प्रखंड प्रमुख सुशीला कुमारी ने अधिकारियों से तुरंत की बातचीत।
- हस्तक्षेप के बाद मौके पर ही राशन वितरण से लाभुकों को राहत।
बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत पुटुवागढ़ क्षेत्र के दर्जनों आदिम जनजाति परिवार बीते कुछ समय से राशन नहीं मिलने के कारण कठिन हालात का सामना कर रहे थे। दिसंबर माह का राशन समय पर नहीं मिलने से परिवारों के सामने भोजन की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई थी। मजबूरी में शुक्रवार को पीड़ित परिवार जनप्रतिनिधियों के साथ प्रखंड कार्यालय पहुंचे और प्रशासन के समक्ष अपनी पीड़ा साझा की।
प्रमुख के चेम्बर पहुंचे आदिम जनजाति परिवार
राशन संकट से परेशान आदिम जनजाति परिवार भाजपा मंडल अध्यक्ष मनोज प्रसाद के नेतृत्व में प्रखंड प्रमुख सुशीला कुमारी के चेम्बर पहुंचे। परिवारों ने बताया कि नियमित राशन पर ही उनका जीवन निर्भर है और वितरण में देरी होने से बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। जनजाति परिवारों की बात सुनते ही प्रमुख ने मामले को गंभीरता से लिया।
प्रशासनिक स्तर पर तत्काल हस्तक्षेप
प्रखंड प्रमुख सुशीला कुमारी ने तुरंत उप प्रमुख वीरेंद्र जायसवाल और भाजपा मंडल अध्यक्ष मनोज प्रसाद के साथ संबंधित विभाग के पदाधिकारियों से संपर्क किया। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि मामले का तत्काल समाधान किया जाए और किसी भी पात्र लाभुक को राशन से वंचित न रखा जाए। प्रशासनिक हस्तक्षेप का असर यह रहा कि उसी समय दिसंबर माह का राशन उपलब्ध कराया गया।
मौके पर ही मिला दिसंबर का राशन
अधिकारियों के निर्देश के बाद आदिम जनजाति परिवारों को दिसंबर माह का राशन मौके पर ही उपलब्ध कराया गया। राशन मिलते ही परिवारों ने राहत की सांस ली। लंबे समय से चली आ रही परेशानी का समाधान होने पर लाभुकों के चेहरे पर संतोष दिखाई दिया।
भ्रम की स्थिति की जानकारी दी एमओ ने
इस संबंध में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (एमओ) सुमित कुमार तिवारी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया:
एमओ सुमित कुमार तिवारी ने कहा: “दिसंबर माह का राशन वितरण किया जा रहा था, लेकिन कुछ लाभुकों द्वारा जनवरी माह का राशन भी एक साथ मांगे जाने से भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।”
उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से किसी प्रकार की अनदेखी नहीं की गई है और पात्र लाभुकों को राशन उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है।
जनवरी माह के राशन को लेकर दिए गए निर्देश
प्रखंड प्रमुख सुशीला कुमारी ने एमओ के साथ-साथ जेएसएलपीएस बीपीएम को भी निर्देश दिया कि जनवरी माह का राशन शीघ्र सभी पात्र आदिम जनजाति परिवारों तक पहुंचाया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्या दोबारा न हो। उन्होंने कहा कि आदिम जनजाति परिवारों की जरूरतों के प्रति प्रशासन को अतिरिक्त संवेदनशीलता दिखानी होगी।
बोरा की कमी से हो रही देरी
इस मामले पर जेएसएलपीएस बीपीएम अरुण कुमार ने जानकारी देते हुए कहा:
अरुण कुमार ने कहा: “फिलहाल खाली बोरा उपलब्ध नहीं होने के कारण जनवरी माह के राशन वितरण में थोड़ी देरी हो रही है, लेकिन बोरा मिलते ही वितरण सुनिश्चित किया जाएगा।”
उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी पात्र परिवार को राशन से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा।
राहत मिलने पर जताया आभार
राशन मिलने के बाद आदिम जनजाति परिवारों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने मांग की कि भविष्य में समय पर और नियमित रूप से राशन वितरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि उन्हें बार-बार कार्यालयों का चक्कर न लगाना पड़े।

न्यूज़ देखो: संवेदनशीलता और तत्परता का उदाहरण
यह घटना दर्शाती है कि यदि जनप्रतिनिधि और प्रशासन संवेदनशीलता के साथ समय पर हस्तक्षेप करें, तो जनकल्याण योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंच सकता है। आदिम जनजाति जैसे कमजोर वर्गों के लिए राशन जीवन रेखा है, ऐसे में वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर परिणाम ला सकती है। प्रशासन को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अधिकारों के लिए जागरूकता ही समाधान
समय पर राशन मिलना हर पात्र परिवार का अधिकार है।
आदिम जनजाति परिवारों की समस्याओं को गंभीरता से लेना समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है।
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