गढ़वा में गरजा आदिवासी समाज: सरना धर्म कोड की अनदेखी पर झामुमो का उग्र प्रदर्शन

गढ़वा में गरजा आदिवासी समाज: सरना धर्म कोड की अनदेखी पर झामुमो का उग्र प्रदर्शन

author Sonu Kumar
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#गढ़वा #सरनाधर्मकोड – झामुमो के नेतृत्व में आदिवासी अस्मिता के लिए उमड़ा जनसैलाब, समाहरणालय के सामने धरने में तब्दील हुआ जुलूस

  • पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर और विधायक अनंत प्रताप देव ने किया नेतृत्व
  • सरना धर्म कोड लागू किए बिना जनगणना नहीं होने देने की चेतावनी
  • केंद्र सरकार पर आदिवासी पहचान मिटाने का आरोप
  • वर्ष 2020 में कोड पास कर भेजने के बाद भी केंद्र की चुप्पी पर नाराजगी
  • झारखंड से पूरे देश में आदिवासी आंदोलन का संदेश देने की हुंकार
  • प्रदर्शन में दर्जनों जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और महिलाएं रहीं शामिल

गढ़वा की सड़कों पर आदिवासी चेतना का जोरदार प्रदर्शन

गढ़वा जिला मुख्यालय मंगलवार को आदिवासी अधिकारों की आवाज़ से गूंज उठा जब झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व में सरना धर्म कोड की मांग को लेकर विशाल जुलूस और धरना का आयोजन हुआ। टाउन हॉल से निकला यह जनसमूह चिनियां मोड़ होते हुए नया समाहरणालय के समक्ष पहुंचा और धरने में तब्दील हो गया।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग थी कि जब तक सरना धर्म कोड को जनगणना के कॉलम में शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक जातीय जनगणना नहीं होने दी जाएगी। भीड़ में महिलाएं, युवजन, सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल थे।

पूर्व मंत्री और विधायक की तीखी चेतावनी केंद्र सरकार को

मौके पर मौजूद पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा:

“केंद्र सरकार सोची-समझी साजिश के तहत आदिवासियों का अस्तित्व समाप्त करना चाहती है। 12 प्रतिशत जनसंख्या वाले समुदाय को धर्म कॉलम में जगह नहीं देना अन्याय है। झामुमो इसे कभी बर्दाश्त नहीं करेगा।”

भवनाथपुर विधायक अनंत प्रताप देव ने भी सरकार को चेताते हुए कहा:

“अगर सरना धर्म कोड लागू नहीं हुआ तो पूरे देश में आदिवासी समाज जोरदार आंदोलन करेगा। केंद्र सरकार यह भ्रम न पाले कि आदिवासी समाज कमजोर है।”

दोनों नेताओं ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक सरना कोड लागू नहीं होगा, तब तक जातीय जनगणना नहीं होने दी जाएगी

2020 से लटका प्रस्ताव और अब तक की उदासीनता

प्रदर्शन में यह बात प्रमुखता से उठी कि वर्ष 2020 में झारखंड विधानसभा ने सर्वसम्मति से सरना धर्म कोड पारित कर केंद्र सरकार को भेजा था। लेकिन पांच साल बीत जाने के बावजूद केंद्र सरकार ने इसपर कोई कदम नहीं उठाया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि यह आदिवासी समुदाय के अधिकारों की खुली उपेक्षा है।

जनभागीदारी और समर्थन का व्यापक संदेश

इस धरना में गढ़वा, भवनाथपुर और आस-पास के क्षेत्रों से सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। तुलसी सिंह खेरवार, राजन उरांव, जेपी मिंज, कबूतरी देवी, अर्जुन मिंज, संगीता लकड़ा जैसे दर्जनों प्रमुख सामाजिक चेहरे उपस्थित रहे। इनके अलावा झामुमो के जिलाध्यक्ष शंभु राम, तनवीर आलम, धीरज दुबे, अनिता दत्त समेत कई संगठनात्मक पदाधिकारी भी मौजूद थे।

इन सभी ने एकजुटता से यह ऐलान किया कि अब सरना धर्म कोड को लेकर झारखंड ही नहीं, पूरे देश में आदिवासी आंदोलन तेज़ होगा।

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गढ़वा

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