#खलारी #टानाभगतआंदोलन : निंद्रा कारीटाड स्थित ऐतिहासिक समाधि स्थल पर नौ स्वतंत्रता सेनानियों को सामूहिक नमन, सत्य और अहिंसा की विरासत को किया गया याद
रांची जिले के खलारी क्षेत्र में टाना भगत आंदोलन के वीर सपूतों की जयंती श्रद्धा और गौरव के साथ मनाई गई। निंद्रा कारीटाड स्थित ऐतिहासिक समाधि स्थल पर आयोजित समारोह में थोलवा टाना भगत की 130वीं एवं भोला टाना भगत की 150वीं जयंती पर स्वतंत्रता सेनानियों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।
- थोलवा टाना भगत की 130वीं और भोला टाना भगत की 150वीं जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई।
- निंद्रा कारीटाड स्थित नौ स्वतंत्रता सेनानियों के समाधि स्थल पर आयोजित हुआ कार्यक्रम।
- महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा से प्रेरित रहे टाना भगत सेनानी।
- नौ टाना भगत स्वतंत्रता सेनानियों को माल्यार्पण कर सामूहिक श्रद्धांजलि अर्पित।
- स्वतंत्रता सेनानी जतरा टाना भगत के वंशज रमेश टाना भगत को किया गया सम्मानित।
- बड़ी संख्या में टाना भगत परिवार, ग्रामीण एवं अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति।
खलारी, रांची। मैकलुस्कीगंज से सटे डुमरो पंचायत के निंद्रा कारीटाड स्थित ऐतिहासिक स्थल, जहां नौ टाना भगत स्वतंत्रता सेनानियों की समाधि स्थापित है, वहां गुरुवार को एक भव्य एवं भावनात्मक समारोह का आयोजन किया गया। अखिल भारतीय नौ स्वतंत्रता सेनानी टाना भगत समुदाय के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में टाना भगत आंदोलन के वीर सपूत थोलवा टाना भगत की 130वीं तथा भोला टाना भगत की 150वीं जयंती श्रद्धा, सम्मान और राष्ट्रभक्ति के वातावरण में मनाई गई।
समारोह के दौरान दोनों महान स्वतंत्रता सेनानियों के साथ-साथ सात अन्य टाना भगत स्वतंत्रता सेनानियों को भी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। पूरे कार्यक्रम में देशभक्ति, सामाजिक एकता और परंपराओं के संरक्षण का संदेश स्पष्ट रूप से झलकता रहा।
सत्य और अहिंसा की विचारधारा से प्रेरित थे टाना भगत सेनानी
डुमरो पंचायत के नौ टाना भगत स्वतंत्रता सेनानी महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन तथा सत्य और अहिंसा की विचारधारा से गहराई से प्रभावित थे। उन्होंने अंग्रेजों के दमनकारी शासन के खिलाफ निडर होकर संघर्ष किया और स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।
ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार आंदोलन के दौरान चंदवा थाना पहुंचकर तिरंगा झंडा फहराया गया था, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। यह घटना उनके अदम्य साहस और राष्ट्रप्रेम का प्रतीक मानी जाती है।
भोला टाना भगत रहे गांधीवादी विचारधारा के सच्चे अनुयायी
भोला टाना भगत को महात्मा गांधी का सच्चा अनुयायी माना जाता है। गांधी जी की विचारधारा, उनसे हुई मुलाकातों और उनके मार्गदर्शन ने उन्हें सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।
स्वतंत्रता संग्राम में उनके साथ बिरसा टाना भगत, शनि टाना भगत, मकू टाना भगत, साधु टाना भगत, एतवा टाना भगत, ठीबरा टाना भगत एवं छोटेया टाना भगत ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया और अपने प्राण राष्ट्र के लिए न्योछावर किए।
परंपरा और पहचान को आज भी जीवित रखे हुए है समुदाय
आज भी टाना भगत समुदाय अपने वीर पूर्वजों की परंपराओं को जीवित रखे हुए है। चरखा अंकित तिरंगा झंडा और सफेद वस्त्र उनकी विशिष्ट पहचान माने जाते हैं।
सादगीपूर्ण जीवनशैली, मांस और मदिरा से दूरी तथा सत्य-अहिंसा के सिद्धांतों का पालन उनके सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो उन्हें अन्य समुदायों से अलग पहचान देता है।
पारंपरिक विधि-विधान के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
जयंती समारोह की शुरुआत महिलाओं द्वारा नदी से पवित्र जल भरकर नौ कलश लाने की परंपरागत विधि से हुई। इसके बाद समाधि स्थल पर कलश स्थापना, दीप प्रज्वलन, चरितर टाना भगत द्वारा ध्वजारोहण तथा गोवर्धन टाना भगत द्वारा पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई।
प्रार्थना सभा के दौरान सभी स्वतंत्रता सेनानियों के चित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें सामूहिक श्रद्धांजलि अर्पित की गई, जिससे वातावरण पूरी तरह श्रद्धामय हो उठा।
अतिथियों ने वीर सेनानियों के योगदान को किया याद
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सुखराम टाना एवं राजेश टाना भगत उपस्थित रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में समाजसेवी जितेंद्र नाथ पाण्डेय ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।
इस अवसर पर स्वतंत्रता सेनानी जतरा टाना भगत के वंशज रमेश टाना भगत को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। साथ ही डुमरो पंचायत के अन्य सात टाना भगत स्वतंत्रता सेनानियों—बिरसा टाना भगत, शनि टाना भगत, साधु टाना भगत, एतवा टाना भगत, ठीबरा टाना भगत, मकू टाना भगत एवं छोटेया टाना भगत—को भी माल्यार्पण कर नमन किया गया।
मुख्य अतिथि सुखराम टाना भगत ने अपने संबोधन में कहा,
“डुमरो पंचायत में नौ-नौ टाना भगत स्वतंत्रता सेनानियों का जन्म होना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है।”
मंच संचालन टाना भगत आवासीय विद्यालय के प्रिंसिपल मुखदेव गोप ने किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में युवाओं से स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
राजेश टाना भगत ने कहा कि,
“टाना कोई जाति नहीं, बल्कि एक विचारधारा है।”
बड़ी संख्या में ग्रामीणों और टाना भगत परिवारों की उपस्थिति
कार्यक्रम में रति टाना भगत, राजेश टाना भगत, शिवशंकर टाना भगत, कर्ण लोहारा, देवनारायण गंझू, चंचू टाना भगत, रामदेव टाना भगत, चारों उरांव, चरितर टाना भगत, रामधनी टाना, मुकेश टाना भगत, छुटया टाना भगत, रामचंदर टानामहली, शिवराज टाना, रवीत्रि टाना भगत, स्वेता, रामपति, संज्जू, पूनम, जासो सहित आसपास के दर्जनों टाना भगत परिवार एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन देशभक्ति और सामाजिक एकता के संकल्प के साथ किया गया, जिसने पूरे क्षेत्र में एक सकारात्मक और प्रेरणादायी संदेश दिया।
न्यूज़ देखो: विरासत और विचारधारा का जीवंत प्रतीक
टाना भगत आंदोलन केवल स्वतंत्रता संग्राम का अध्याय नहीं, बल्कि सत्य, अहिंसा और सामाजिक अनुशासन की जीवंत परंपरा है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ते हैं और क्षेत्रीय गौरव को मजबूत करते हैं। यह विरासत हमें मूल्यों पर आधारित समाज की दिशा दिखाती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
इतिहास से प्रेरणा लेकर आगे बढ़े नई पीढ़ी
स्वतंत्रता सेनानियों का बलिदान हमारी सबसे बड़ी धरोहर है।
उनके आदर्श हमें एकता, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम का मार्ग दिखाते हैं।
आज की युवा पीढ़ी को उनके संघर्ष से सीख लेकर समाज निर्माण में योगदान देना चाहिए।
ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक चेतना को जीवित रखते हैं।
आप भी अपने क्षेत्र के वीर स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत को याद रखें।
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