नववर्ष पर सिमडेगा के सरना मंदिर में तुलसी पूजन और मातृ–पितृ पूजन समारोह, संस्कार और श्रद्धा का दिखा अद्भुत संगम

नववर्ष पर सिमडेगा के सरना मंदिर में तुलसी पूजन और मातृ–पितृ पूजन समारोह, संस्कार और श्रद्धा का दिखा अद्भुत संगम

author Birendra Tiwari
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#सिमडेगा #संस्कार_उत्सव : सरना मंदिर परिसर में नववर्ष की शुरुआत मातृ–पितृ सम्मान और प्रकृति पूजन के साथ हुई।

नववर्ष के शुभ अवसर पर सिमडेगा स्थित सरना मंदिर परिसर में तुलसी पूजन एवं मातृ–पितृ पूजन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय संस्कृति के मूल संस्कारों—माता–पिता के सम्मान और प्रकृति पूजन—के साथ नववर्ष का शुभारम्भ करना रहा। श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान से पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना की। आयोजन में अभिभावकों और बच्चों की सक्रिय सहभागिता रही।

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  • सरना मंदिर परिसर, सिमडेगा में नववर्ष पर संस्कारमय आयोजन।
  • तुलसी पूजन के माध्यम से प्रकृति संरक्षण का संदेश।
  • मातृ–पितृ पूजन में बच्चों ने माता–पिता का चरण धोकर लिया आशीर्वाद।
  • विद्या देवी, निराला देवी, दिनेश भारती सहित कई अभिभावक रहे उपस्थित।
  • बच्चों वैभव, ओम, अतुलित, भूमि ने श्रद्धा के साथ लिया भाग।

नववर्ष के पहले दिन सिमडेगा में एक अलग ही आध्यात्मिक और भावनात्मक वातावरण देखने को मिला, जब सरना मंदिर परिसर में तुलसी पूजन एवं मातृ–पितृ पूजन समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम नववर्ष के जश्न को केवल उत्सव तक सीमित न रखते हुए भारतीय संस्कृति के मूल मूल्यों से जोड़ने का प्रयास था। मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की उपस्थिति बनी रही और पूरा वातावरण भक्ति एवं संस्कार से ओतप्रोत नजर आया।

तुलसी पूजन से हुआ कार्यक्रम का शुभारम्भ

कार्यक्रम की शुरुआत तुलसी माता के विधिवत पूजन से हुई। श्रद्धालुओं ने तुलसी को जल अर्पित कर आरती की और परिवार, समाज तथा राष्ट्र की सुख-समृद्धि की कामना की। वक्ताओं ने बताया कि तुलसी पूजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण संतुलन का प्रतीक भी है। इससे सात्विक जीवन शैली अपनाने और प्रकृति के प्रति कर्तव्यबोध की प्रेरणा मिलती है।

मातृ–पितृ पूजन में भावुक हुआ वातावरण

तुलसी पूजन के पश्चात मातृ–पितृ पूजन समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान बच्चों ने अपने माता–पिता के चरण धोए, तिलक लगाया और पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। यह दृश्य अत्यंत भावुक और प्रेरणादायी रहा। कई अभिभावकों की आंखों में अपने बच्चों के इस संस्कारमय आचरण को देखकर खुशी के आंसू झलकते नजर आए।

अभिभावकों और बच्चों की गरिमामयी उपस्थिति

कार्यक्रम में अभिभावकगण विद्या देवी, निराला देवी, आरती देवी, संतोषी देवी, पुतुल देवी, सुगंति देवी, बेलावती, शिवानी, दिनेश भारती, प्रदीप, सहदेव, सुरेश गोप, मंगल बड़ाइक, विनय शंकर नन्द, कृष्ण पाठक और राहुल कुमार की गरिमामयी उपस्थिति रही। वहीं बच्चों वैभव, ओम, अतुलित और भूमि ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ पूजन में भाग लेकर सभी का मन मोह लिया।

वक्ताओं ने संस्कारों के महत्व पर डाला प्रकाश

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि मातृ–पितृ पूजन बच्चों में कृतज्ञता, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का विकास करता है। माता–पिता ही जीवन के प्रथम गुरु होते हैं, जिनके आशीर्वाद से जीवन की कठिन राहें भी सरल हो जाती हैं। वक्ताओं ने यह भी कहा कि आज के भौतिक युग में ऐसे आयोजनों की अत्यंत आवश्यकता है, ताकि नई पीढ़ी अपनी जड़ों, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी रह सके।

वक्ताओं ने कहा: “माता–पिता का सम्मान और प्रकृति पूजन ही सच्चे नववर्ष का आधार है।”

प्रसाद वितरण के साथ हुआ समापन

कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया गया। पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि यदि नववर्ष की शुरुआत माता–पिता के आशीर्वाद और प्रकृति पूजन से की जाए, तो वर्ष भर जीवन में सकारात्मकता, शांति और सफलता बनी रहती है।

न्यूज़ देखो: नववर्ष को संस्कारों से जोड़ने की सराहनीय पहल

यह आयोजन दर्शाता है कि नववर्ष का उत्सव केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और सांस्कृतिक मूल्यों को आत्मसात करने का अवसर भी हो सकता है। सरना मंदिर परिसर में हुआ यह समारोह समाज के लिए एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करता है। ऐसे प्रयास नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

नववर्ष, संस्कार और नई पीढ़ी

नया साल तभी सार्थक है जब उसकी शुरुआत सही मूल्यों से हो।
माता–पिता का सम्मान और प्रकृति की पूजा जीवन को संतुलित बनाती है।
ऐसे आयोजन समाज को संस्कारों की दिशा में आगे बढ़ाते हैं।

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Written by

सिमडेगा

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