घाघमुंडा में चीक बड़ाईक समाज का दो दिवसीय अधिवेशन शुरू, शिक्षा और एकता पर दिया गया जोर

घाघमुंडा में चीक बड़ाईक समाज का दो दिवसीय अधिवेशन शुरू, शिक्षा और एकता पर दिया गया जोर

author Shivnandan Baraik
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#कुरडेग #सामाजिक_अधिवेशन : परंपरा, संस्कृति और संगठन मजबूती को लेकर समाज ने किया मंथन।

सिमडेगा जिले के कुरडेग प्रखंड के घाघमुंडा गांव में चीक बड़ाईक समाज का दो दिवसीय वार्षिक अधिवेशन शुरू हुआ। कार्यक्रम में पूर्व डीएफओ लक्ष्मीनाथ बड़ाईक मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। अधिवेशन का उद्देश्य समाज में एकता, संस्कृति संरक्षण और समस्याओं के समाधान पर चर्चा करना है। पहले दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।

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  • घाघमुंडा गांव, कुरडेग में दो दिवसीय अधिवेशन का शुभारंभ।
  • लक्ष्मीनाथ बड़ाईक रहे मुख्य अतिथि, दीप प्रज्वलन से शुरुआत।
  • शिक्षा और जागरूकता पर विशेष जोर।
  • समाज की परंपरा और संस्कृति संरक्षण पर चर्चा।
  • कई समाज के पदाधिकारी और सदस्य रहे मौजूद।

सिमडेगा जिले के कुरडेग प्रखंड अंतर्गत घाघमुंडा गांव में चीक बड़ाईक समाज का दो दिवसीय वार्षिक अधिवेशन शनिवार को विधिवत रूप से प्रारंभ हुआ। इस अधिवेशन का उद्देश्य समाज को एकजुट करना, परंपराओं और संस्कृति को संरक्षित करना तथा सामूहिक समस्याओं के समाधान पर विचार-विमर्श करना है।

दीप प्रज्वलन के साथ हुआ उद्घाटन

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि लक्ष्मीनाथ बड़ाईक (पूर्व डीएफओ) तथा विशिष्ट अतिथि अजय बड़ाईक और जलसु बड़ाईक द्वारा दीप प्रज्वलित कर एवं भारत माता की तस्वीर पर माल्यार्पण कर किया गया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने समाज की एकता और प्रगति के लिए सामूहिक संकल्प लिया।

शिक्षा पर दिया गया विशेष जोर

अधिवेशन में मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में शिक्षा के महत्व पर विशेष बल दिया।

लक्ष्मीनाथ बड़ाईक ने कहा: “समाज तब ही विकसित होगा जब हम शिक्षा को प्राथमिकता देंगे और जागरूक बनेंगे।”

उन्होंने कहा कि शिक्षा से ही लोगों में अपने अधिकार और कर्तव्यों के प्रति समझ विकसित होती है, जिससे समाज का समग्र विकास संभव है।

संस्कृति और संस्कार पर चर्चा

विशिष्ट अतिथि अजय बड़ाईक ने समाज की सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखने पर जोर दिया।

अजय बड़ाईक ने कहा: “यदि हमारी संस्कृति समृद्ध रहेगी, तो हमारे संस्कार भी मजबूत होंगे और इससे व्यक्तित्व का विकास होगा।”

उन्होंने समाज के लोगों से अपनी परंपराओं को सहेजने और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान किया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजी पहली शाम

अधिवेशन के पहले दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया, जिसमें समाज के युवाओं और बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इन प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को जीवंत और उत्साहपूर्ण बना दिया।

समाज के पदाधिकारी और सदस्य रहे मौजूद

इस अवसर पर समाज के संरक्षक श्रवण कुमार बड़ाईक, सकलराम बड़ाईक, राजेश्वर राम बड़ाईक, प्रखंड अध्यक्ष लखी बड़ाईक, सचिव संदीप बड़ाईक, कोषाध्यक्ष राजेश बड़ाईक सहित बड़ी संख्या में समाज के सदस्य उपस्थित रहे।

संगठन को मजबूत बनाने की पहल

अधिवेशन के दौरान समाज की वर्तमान चुनौतियों, संगठन की मजबूती और सामूहिक विकास को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया। लोगों ने एकजुट होकर समाज को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

न्यूज़ देखो: शिक्षा और संस्कृति से ही होगा समाज का विकास

घाघमुंडा में आयोजित यह अधिवेशन दिखाता है कि समाज की प्रगति के लिए शिक्षा और संस्कृति दोनों का संतुलन जरूरी है। ऐसे आयोजन न केवल लोगों को जोड़ते हैं, बल्कि समाज के भविष्य की दिशा भी तय करते हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन चर्चाओं का कितना प्रभाव जमीन पर दिखता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

एकजुट समाज ही बनाता है मजबूत भविष्य

जब समाज के लोग एक मंच पर आकर अपने मुद्दों पर चर्चा करते हैं, तभी वास्तविक बदलाव की शुरुआत होती है। हमें भी अपनी संस्कृति और शिक्षा दोनों को समान महत्व देना चाहिए।

आइए, हम भी एकजुट होकर अपने समाज के विकास में योगदान दें।
अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें, इस खबर को शेयर करें और जागरूकता फैलाने में भागीदार बनें।

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Written by

बानो, सिमडेगा

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