Simdega

मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा की जयंती पर जामबहार में अंडर 14 हॉकी प्रतियोगिता, गांव से खेल संस्कृति को मजबूत करने का संदेश

#जामबहार #हॉकी_श्रद्धांजलि : अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के गांव में जयपाल सिंह मुंडा की 124वीं जयंती पर बालक हॉकी प्रतियोगिता आयोजित हुई।

झारखंड के ठेठईटांगर प्रखंड अंतर्गत जामबहार गांव में मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा की 124वीं जयंती पर अंडर 14 बालक वर्ग हॉकी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। हॉकी सिमडेगा के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रतियोगिता में स्थानीय खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और महान हॉकी कप्तान को खेल के माध्यम से श्रद्धांजलि दी। फाइनल मुकाबले में जामबहार ग्रीन एटिन ने जामबहार ब्लू एटिन को 2–0 से पराजित किया। आयोजन का उद्देश्य गांवों में खेल संस्कृति को पुनर्जीवित करना और नई पीढ़ी को प्रेरित करना रहा।

Join News देखो WhatsApp Channel
  • जामबहार गांव में मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा की 124वीं जयंती मनाई गई।
  • अंडर 14 बालक वर्ग हॉकी प्रतियोगिता का आयोजन।
  • जामबहार ग्रीन एटिन ने जामबहार ब्लू एटिन को 2–0 से हराया।
  • दोनों टीमों को हॉकी सिमडेगा द्वारा पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
  • मनोज कोनबेगी ने गांव स्तर पर नियमित अभ्यास पर जोर दिया।
  • खेल मैदान के लिए जमीन दान करने वाले धनकुवर गुड़िया और चंद्र प्रधान सम्मानित।

झारखंड की खेल भूमि सिमडेगा जिले के जामबहार गांव में शुक्रवार को खेल और श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिला। मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा की जयंती के अवसर पर आयोजित अंडर 14 बालक वर्ग हॉकी प्रतियोगिता ने न सिर्फ खिलाड़ियों को मंच दिया, बल्कि गांवों से निकलने वाली खेल प्रतिभाओं की याद भी ताजा की। यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी रोपनी कुमारी और अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी पूर्णिमा कुमारी के गांव में हुआ, जिसने इसे और भी विशेष बना दिया।

मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा का ऐतिहासिक योगदान

03 जनवरी 1903 को जन्मे मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा केवल एक महान खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि बहुआयामी व्यक्तित्व थे। उन्होंने अपनी कप्तानी में 1928 के ओलंपिक खेलों में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाया। इसके अलावा वे संविधान सभा के सदस्य रहे, आज़ादी के बाद लगातार पांच बार सांसद चुने गए और यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले भी रहे। वे भारत के एकमात्र खिलाड़ी थे जिन्हें ऑक्सफोर्ड ब्लू की उपाधि से नवाजा गया। उनकी जयंती पर आयोजित यह प्रतियोगिता उनके सपनों को जीवित रखने का प्रयास रही।

रोमांचक मुकाबला और परिणाम

प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबले में जामबहार ग्रीन एटिन और जामबहार ब्लू एटिन की टीमें आमने-सामने रहीं। दोनों टीमों ने शानदार खेल का प्रदर्शन किया, लेकिन ग्रीन एटिन ने दो सधे हुए गोल कर 2–0 से जीत दर्ज की। मैच के बाद दोनों ही टीमों को हॉकी सिमडेगा की ओर से पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया, जिससे खिलाड़ियों का उत्साह दोगुना हो गया।

श्रद्धांजलि और अतिथियों की उपस्थिति

कार्यक्रम से पूर्व हॉकी सिमडेगा के अध्यक्ष मनोज कोनबेगी, कोषाध्यक्ष कमलेश्वर मांझी, मुखिया रामचंद्र मांझी, खेल मैदान के भूमिदाता धनकुवर गुड़िया और चंद्र प्रधान, गांव के मुख्य अभिभावक सहदेव मांझी, जगन मांझी, वार्ड पार्षद लालचंद प्रधान, सुषमा प्रधान सहित अन्य अतिथियों, खिलाड़ियों और अभिभावकों ने मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

भूमिदाताओं का सम्मान

इस अवसर पर जामबहार गांव के खेल मैदान और विद्यालय निर्माण के लिए अपनी निजी भूमि दान करने वाले धनकुवर गुड़िया और चंद्र प्रधान को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। मनोज कोनबेगी और कमलेश्वर मांझी ने उन्हें अंग वस्त्र ओढ़ाकर सम्मान प्रदान किया और उनके योगदान को आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

गांव से निकलते हैं ओलंपियन: मनोज कोनबेगी

हॉकी खिलाड़ियों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए हॉकी सिमडेगा के अध्यक्ष मनोज कोनबेगी ने कहा:

मनोज कोनबेगी ने कहा: “मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा, माइकल किंडो, सिलबानुस डुंगडुंग, सलीमा टेटे और निक्की प्रधान जैसे खिलाड़ी सभी गांवों से ही निकले हैं। यदि हमें फिर से ऐसे खिलाड़ी तैयार करने हैं, तो गांव के मैदानों में सुबह-शाम नियमित अभ्यास जरूरी है।”

उन्होंने यह भी कहा कि पहले गांवों में सालों भर हॉकी का अभ्यास होता था, इसी कारण भारत लगातार स्वर्ण पदक जीतता था। अब उस संस्कृति को फिर से जीवित करने की जरूरत है।

खेल और शिक्षा दोनों पर जोर

हॉकी सिमडेगा के कोषाध्यक्ष कमलेश्वर मांझी ने जयपाल सिंह मुंडा के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बच्चों को खेल के साथ-साथ पढ़ाई में भी आगे बढ़ना चाहिए। वहीं स्थानीय अभिभावक सहदेव मांझी ने कहा कि अब गांव में प्रतिदिन सुबह और शाम हॉकी सहित अन्य खेलों का अभ्यास कराया जाएगा, ताकि भविष्य में गांव के खिलाड़ी फिर से राष्ट्रीय टीम तक पहुंच सकें।

आयोजन की व्यवस्थाएं और योगदान

कार्यक्रम का मंच संचालन महिमा केरकेट्टा ने किया। तकनीकी जिम्मेदारी बलदेव मांझी और सुरेंद्र प्रधान ने संभाली, जबकि अतिथियों का स्वागत सुषमा प्रधान ने किया। आयोजन को सफल बनाने में सहदेव मांझी, जगन मांझी, सुरेंद्र प्रधान, बलदेव मांझी, सुषमा प्रधान, लालू मांझी, राम रंजित मांझी, महिमा केरकेट्टा, दाऊद केरकेट्टा, पवन मांझी सहित कई स्थानीय लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

न्यूज़ देखो: गांवों से ही बनेगा भारत का भविष्य

जामबहार में आयोजित यह प्रतियोगिता बताती है कि भारत की खेल प्रतिभा की जड़ें आज भी गांवों में हैं। जयपाल सिंह मुंडा के सपनों को साकार करने के लिए जरूरी है कि प्रशासन, खेल संगठन और समाज मिलकर जमीनी स्तर पर खेल को बढ़ावा दें। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को सही दिशा देने का काम करते हैं। सवाल यही है कि क्या हम गांवों के मैदानों को फिर से खिलाड़ियों से भर पाएंगे—हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

खेल से संस्कार, गांव से पहचान

खेल केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि अनुशासन, रोजगार और पहचान का माध्यम भी है। जामबहार का यह आयोजन बताता है कि सही मार्गदर्शन और सामूहिक प्रयास से गांवों में छिपी प्रतिभा को निखारा जा सकता है।

📥 Download E-Paper

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!

IMG-20250723-WA0070
IMG-20251223-WA0009
आगे पढ़िए...

नीचे दिए बटन पर क्लिक करके हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें


Satyam Kumar Keshri

सिमडेगा नगर क्षेत्र

Related News

ये खबर आपको कैसी लगी, अपनी प्रतिक्रिया दें

Back to top button
error: