दुमका में “दीदी से दीदी तक” मॉडल की अनूठी मिसाल: 2300 सोनाली नस्ल के चूजों का वितरण

दुमका में “दीदी से दीदी तक” मॉडल की अनूठी मिसाल: 2300 सोनाली नस्ल के चूजों का वितरण

author News देखो Team
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#दुमका #महिला_उद्यमिता : फुलो झानो आशीर्वाद अभियान के तहत JSLPS की पहल — आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम, उद्यमी पूनम देवी ने तैयार किए चूजे
  • 2300 सोनाली नस्ल के चूजे तीन गांवों की महिलाओं को वितरित
  • पूनम देवी के हार्डनिंग सेंटर में तैयार हुए सभी चूजे
  • “दीदी से दीदी तक” मॉडल के तहत महिला-से-महिला सप्लाई चेन
  • महिलाओं को आत्मनिर्भर और रोजगारयुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम
  • फुलो झानो आशीर्वाद अभियान ग्रामीण महिला उद्यमिता का बन रहा उदाहरण

महिला-से-महिला मॉडल से बढ़ रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था

दुमका जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत मोतीपुर, जियाथर और मयूरनाचा गांव में
फुलो झानो आशीर्वाद अभियान के तहत 2300 सोनाली नस्ल के 20-22 दिन के चूजे वितरित किए गए।
इन चूजों को प्राप्त करने वाली महिलाएं JSLPS से जुड़ी हुई हैं और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से यह पहल की गई है।

पूनम देवी का हार्डनिंग सेंटर बना प्रेरणा

इन सभी चूजों को समूह की उद्यमी पूनम देवी द्वारा
आसनसोल स्थित हार्डनिंग सेंटर में तैयार किया गया।
पूनम देवी की मेहनत और कौशल ने यह साबित कर दिया कि
सही प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर महिलाएं भी रोजगार सृजन में अग्रणी हो सकती हैं।

यह पहल “दीदी से दीदी तक” मॉडल का जीवंत उदाहरण है,
जिसमें एक महिला उद्यमी द्वारा उत्पादित चूजे
दूसरी ग्रामीण महिलाओं को व्यवसायिक उपयोग के लिए दिए जाते हैं।

आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में ठोस पहल

इस मॉडल से न केवल ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक संबल मिला है, बल्कि पोल्ट्री व्यवसाय के रूप में स्थायी आमदनी का विकल्प भी प्राप्त हुआ है।
JSLPS के माध्यम से संचालित यह अभियान महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक मजबूत उदाहरण के रूप में उभर रहा है।

पूनम देवी ने बताया:
“मेरे हार्डनिंग सेंटर में तैयार किए गए चूजे अब अन्य दीदियों के जीवन में भी बदलाव ला रहे हैं।
यह आत्मनिर्भरता की दिशा में मेरा छोटा सा योगदान है।”

न्यूज़ देखो: महिला-से-महिला सशक्तिकरण की प्रेरक कहानी

न्यूज़ देखो इस संकल्प को एक क्रांतिकारी ग्रामीण परिवर्तन की मिसाल मानता है।
“दीदी से दीदी तक” जैसे मॉडल केवल एक आर्थिक पहल नहीं हैं,
बल्कि यह समाज में महिला नेतृत्व और सहयोग की संस्कृति को मजबूती देने वाले स्तंभ हैं।
दुमका जैसे जिलों में ऐसी योजनाएं ग्रामीण महिलाएं को
रोजगार, सम्मान और आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर कर रही हैं।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

गांव की दीदी बनीं प्रेरणा, आगे बढ़ाएं यह अभियान

यह कहानी हर उस महिला को प्रेरित करती है जो कुछ करना चाहती है
लेकिन संसाधनों और अवसरों की कमी से जूझ रही है।
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