धनबाद में बिनोद बिहारी महतो की प्रतिमा का अनावरण, सीएम सोरेन ने कहा — आंदोलनकारियों के सपनों को देंगे नई उड़ान

धनबाद में बिनोद बिहारी महतो की प्रतिमा का अनावरण, सीएम सोरेन ने कहा — आंदोलनकारियों के सपनों को देंगे नई उड़ान

author News देखो Team
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#धनबाद #प्रतिमा_अनावरण – बीबीएमकेयू परिसर में राज्यपाल और मुख्यमंत्री की मौजूदगी, छात्रों के लिए ऐतिहासिक दिन बना समारोह

  • राज्यपाल संतोष गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने किया प्रतिमा अनावरण
  • विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित हुई स्व. बिनोद बिहारी महतो की आदमकद प्रतिमा
  • मुख्यमंत्री ने कहा — आंदोलनकारियों के सपनों को सजाने का है लक्ष्य
  • 2014 में हुई थी कोयलांचल यूनिवर्सिटी की परिकल्पना, आज बन चुका भव्य संस्थान
  • बोकारो-धनबाद के छात्रों को मिलेगा उच्च शिक्षा का नया आयाम
  • विश्वविद्यालय को आंदोलन के पुरोधा बिनोद बिहारी महतो के नाम से मिली पहचान

विश्वविद्यालय परिसर में ऐतिहासिक क्षण

धनबाद स्थित बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय (BBMKU) के परिसर में मंगलवार को एक ऐतिहासिक अवसर देखने को मिला, जब स्व. बिनोद बिहारी महतो की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया गया। इस समारोह में झारखंड के राज्यपाल श्री संतोष गंगवार और मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन विशेष रूप से उपस्थित रहे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने इसे राज्यवासियों के लिए गौरव का दिन बताया और कहा कि यह प्रतिमा न केवल श्रद्धांजलि है, बल्कि आंदोलन और समर्पण की प्रतीक भी है।

आंदोलन से विश्वविद्यालय तक की यात्रा

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संबोधित करते हुए कहा:

“2014 में जब मुझे राज्य की जिम्मेदारी मिली, तभी कोयलांचल यूनिवर्सिटी की परिकल्पना की गई थी। आज यह भव्य रूप ले चुका है। उस समय हमने यह तय किया कि इस विश्वविद्यालय का नाम आंदोलन के अगुवा स्व. बिनोद बिहारी महतो के नाम पर ही रखा जाएगा।”

उन्होंने आगे कहा कि सरकार का उद्देश्य आंदोलनकारियों के सपनों को साकार करना और उनकी स्मृतियों को जीवंत बनाए रखना है।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से इस बात पर ज़ोर दिया कि विश्वविद्यालय बोकारो और धनबाद जैसे औद्योगिक क्षेत्रों के छात्रों को सुगम और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करेगा, जिससे इन क्षेत्रों में शैक्षणिक सशक्तिकरण को बल मिलेगा।

शिक्षा और स्मृति का मिलन बिंदु

बिनोद बिहारी महतो, झारखंड राज्य आंदोलन के प्रमुख नेता रहे, जिनकी संघर्षशीलता और जनसेवा ने राज्य निर्माण में आधारशिला रखी। अब उनका नाम विश्वविद्यालय से जुड़ जाने से यह संस्थान न केवल शिक्षा का केंद्र बनेगा, बल्कि प्रेरणा का स्रोत भी रहेगा।

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