
#बानो #सिमडेगा #जनवितरण_प्रणाली : साहूबेडा पंचायत के पोसोर गांव में राशन वितरण बंद होने पर ग्रामीणों ने की ग्रामसभा।
सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड अंतर्गत साहूबेडा पंचायत के राजस्व ग्राम पोसोर में दो महीने से राशन नहीं मिलने को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया है। मिलन महिला समूह द्वारा संचालित जनवितरण प्रणाली दुकान के खिलाफ ग्रामीणों ने ग्रामसभा आयोजित कर विरोध दर्ज कराया। बैठक में 322 राशन कार्डधारकों को अनाज नहीं मिलने की शिकायत उठी। प्रशासन ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है।
- साहूबेडा पंचायत के पोसोर गांव में दो माह से राशन वितरण बंद।
- 322 राशन कार्डधारक प्रभावित, महिलाओं ने जताई नाराजगी।
- मिलन महिला समूह की जनवितरण दुकान पर गंभीर आरोप।
- सुबह 4 बजे से लाइन लगाने के बावजूद राशन नहीं मिलने की शिकायत।
- बीडीओ नैमुदिन अंसारी ने जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया।
सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड में जनवितरण प्रणाली की लचर व्यवस्था एक बार फिर ग्रामीणों के आक्रोश का कारण बनी है। साहूबेडा पंचायत के राजस्व ग्राम पोसोर में गुरुवार को राजकीय मध्य विद्यालय हाथनंदा परिसर में ग्रामसभा का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीणों ने मिलन महिला समूह द्वारा संचालित जनवितरण दुकान पर गंभीर आरोप लगाए।
दो महीने से नहीं मिला राशन, ग्रामीणों में गुस्सा
ग्रामीणों का कहना है कि हथनंदा, गोर्रा और पोसोर गांव के कुल 322 राशन कार्डधारकों को बीते दो महीनों से राशन नहीं दिया गया है। इस स्थिति ने गरीब और जरूरतमंद परिवारों को गंभीर संकट में डाल दिया है। ग्रामसभा में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष ग्रामीण शामिल हुए और एक स्वर में दुकान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
ग्रामीणों ने कहा कि जनवितरण प्रणाली का उद्देश्य गरीबों को समय पर अनाज उपलब्ध कराना है, लेकिन यहां व्यवस्था पूरी तरह विफल साबित हो रही है।
ग्रामसभा की अध्यक्षता और आरोपों का खुलासा
ग्रामसभा की बैठक की अध्यक्षता शांतियल हेमरोम एवं चंद्रमोहन डांग ने संयुक्त रूप से की। अध्यक्षों ने बताया कि मिलन महिला समूह की जनवितरण दुकान की अध्यक्ष वेरोनिका समद द्वारा हर महीने लगभग 40 राशन कार्डधारकों को जानबूझकर राशन नहीं दिया जाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि राशन वितरण के लिए सुबह चार बजे से लाइन लगानी पड़ती है। जो कार्डधारक समय पर लाइन में लगकर कार्ड जमा कर देता है, उसे राशन मिल जाता है, जबकि जो ऐसा नहीं कर पाता, उसे “राशन खत्म हो गया” कहकर लौटा दिया जाता है।
महिलाओं की पीड़ा आई सामने
बैठक में मौजूद हरमन देवी, सीमा देवी सहित कई महिलाओं ने अपनी आपबीती साझा की। महिलाओं ने बताया कि राशन दुकान में अनाज आने के बावजूद दो महीने से वितरण नहीं किया जा रहा है।
महिलाओं ने कहा:
“राशन के लिए सुबह चार बजे लाइन लगानी पड़ती है, फिर भी हर महीने करीब 40 लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ता है।”
महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने पर उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जाता।
दुकान संचालिका से संपर्क का प्रयास विफल
ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों के संबंध में मिलन महिला समूह की अध्यक्ष वेरोनिका समद से मोबाइल फोन के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। इससे ग्रामीणों की नाराजगी और बढ़ गई।
प्रशासन को दी गई जानकारी, जांच का भरोसा
ग्रामीणों द्वारा ग्रामसभा आयोजित किए जाने और राशन नहीं मिलने की शिकायत पर बानो प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) नैमुदिन अंसारी से संपर्क किया गया।
बीडीओ नैमुदिन अंसारी ने बताया कि:
“2 फरवरी को बीएसओ को भेजकर मामले की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो जनवितरण दुकान को निलंबित किया जाएगा और ग्रामीणों के लिए राशन वितरण की वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।”
प्रशासन के इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों को उम्मीद है कि जल्द ही समस्या का समाधान होगा।
बैठक में इनकी रही प्रमुख उपस्थिति
ग्रामसभा की बैठक में कमला देवी, सहदेव सिंह, हीरावती देवी, फिल्मोहन टोपनो, सुनील डांग, बहालेन डांग, सुकुरमनी देवी, बुद्धेश्वर सिंह, सुरेश लोमगा, फीलमोन टोपनो, पवन डांग, राम किशोर सिंह सहित सैकड़ों की संख्या में महिला एवं पुरुष ग्रामीण उपस्थित थे।
ग्रामीणों ने एकजुट होकर यह संदेश दिया कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आगे भी आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर उठे सवाल
ग्रामसभा में यह बात भी प्रमुखता से उठी कि आज भी प्रखंड में ऐसे कर्मठ और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों की सख्त जरूरत है, जो गांव की समस्याओं को गंभीरता से लें और प्रशासन तक मजबूती से आवाज पहुंचाएं।
ग्रामीणों का कहना है कि राशन जैसी बुनियादी जरूरत में लापरवाही किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
न्यूज़ देखो: राशन व्यवस्था पर बड़ा सवाल
पोसोर गांव की यह घटना जनवितरण प्रणाली की जमीनी सच्चाई को उजागर करती है। दो महीने तक 322 कार्डधारकों को राशन नहीं मिलना प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच के बाद दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
भूख के खिलाफ आवाज उठाना ही असली लोकतंत्र है
राशन गरीब परिवारों का अधिकार है, कोई एहसान नहीं।
यदि व्यवस्था में गड़बड़ी है तो उसका विरोध करना हर नागरिक का हक है।
ग्रामसभा जैसी पहलें ही प्रशासन को जवाबदेह बनाती हैं।
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