Giridih

गांडेय में भू-माफियाओं के खिलाफ ग्रामीणों का मोर्चा, 70 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप

#गिरिडीह #भूमि_विवाद : गांडेय अंचल के कैराडाबर गांव में ग्रामीणों ने अंचल अधिकारी को आवेदन देकर फर्जी दस्तावेज के जरिए जमीन हड़पने का लगाया गंभीर आरोप
  • गांडेय अंचल के करीबांक पंचायत अंतर्गत कैराडाबर गांव का मामला।
  • ग्रामीणों ने लगभग 70 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे का लगाया आरोप।
  • खाता संख्या 19, 39, 45, 52 सहित अन्य भूमि खतियान में रैयतों के नाम दर्ज।
  • फर्जी दस्तावेज और धन-बल के इस्तेमाल का आरोप।
  • जांच पूरी होने तक ऑनलाइन रसीद निर्गत नहीं करने की मांग।

गिरिडीह। गांडेय अंचल के करीबांक पंचायत अंतर्गत कैराडाबर गांव में भूमि विवाद को लेकर स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। गांव के दर्जनों ग्रामीणों ने कथित भू-माफियाओं के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल अंचल अधिकारी मो. हुसैन से मिला और उन्हें एक लिखित आवेदन सौंपते हुए गांव की लगभग 70 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे का गंभीर आरोप लगाया।

ग्रामीणों का कहना है कि कैराडाबर मौजा की बहुमूल्य कृषि भूमि पर लंबे समय से भू-माफियाओं की नजर है और अब वे फर्जी कागजात तैयार कर पूरे मौजा की जमीन हड़पने का प्रयास कर रहे हैं। यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो गांव के मूल रैयत अपने ही जमीन से बेदखल हो सकते हैं।

खतियानी जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप

ग्रामीणों द्वारा दिए गए आवेदन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि मौजा कैराडाबर, थाना संख्या 462 की कई खतियानी जमीनें विवाद के केंद्र में हैं। आवेदन के अनुसार खाता संख्या 19, 39, 45, 52 सहित अन्य खातों की भूमि खतियान में मेघों राय एवं अन्य रैयतों के नाम पर विधिवत दर्ज है।

ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बावजूद भू-माफिया इन जमीनों को अपनी बताकर जाली दस्तावेज तैयार कर रहे हैं और धीरे-धीरे जमीन पर कब्जा जमाने की कोशिश में लगे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ लोगों ने जमीन की खरीद-बिक्री के नाम पर गांव में दलाल सक्रिय कर दिए हैं, जिससे पूरे इलाके में भय और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

धन और बाहुबल के इस्तेमाल का आरोप

आवेदन में ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि भू-माफिया धनबल और बाहुबल के सहारे ग्रामीणों को डराने-धमकाने का प्रयास कर रहे हैं। कई ग्रामीणों को यह आशंका है कि यदि वे विरोध करते रहे, तो उन्हें झूठे मामलों में फंसाया जा सकता है या सामाजिक दबाव बनाया जा सकता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी व्यक्ति फर्जी कागजात के आधार पर जमीन की रसीद या दाखिल-खारिज न करा सके। उनका कहना है कि जमीन ही उनकी आजीविका का एकमात्र साधन है और इसके छिन जाने से उनका भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।

रसीद निर्गत पर रोक लगाने की मांग

ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि जब तक पूरे मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक संबंधित जमीन की ऑनलाइन रसीद निर्गत न की जाए। ग्रामीणों का मानना है कि यदि रसीद जारी हो गई, तो अवैध खरीद-बिक्री को रोकना और भी मुश्किल हो जाएगा।

ग्रामीणों ने अंचल अधिकारी से यह भी आग्रह किया कि खतियान और अभिलेखों का मिलान कर वास्तविक रैयतों की पहचान की जाए और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके।

ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार

आवेदन पर लक्ष्मण सिंह, जलेश्वर सिंह, छोटू सिंह, अनिल सिंह, शंकर राय सहित करीब 15 ग्रामीणों के हस्ताक्षर हैं। सभी ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि वे प्रशासन पर भरोसा रखते हैं और उम्मीद करते हैं कि उनकी जमीन को सुरक्षित किया जाएगा।

ग्रामीणों का कहना है कि कैराडाबर गांव में अधिकांश लोग खेती पर निर्भर हैं और जमीन से ही उनका जीवन चलता है। यदि भू-माफियाओं के हाथ यह जमीन चली गई, तो गांव के सैकड़ों लोगों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो जाएगा।

अंचल अधिकारी से कार्रवाई की उम्मीद

ग्रामीणों से आवेदन प्राप्त करने के बाद अंचल अधिकारी मो. हुसैन ने मामले को संज्ञान में लेने और दस्तावेजों की जांच कराने का आश्वासन दिया है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए, ताकि भू-माफियाओं के हौसले पस्त हो सकें।

गांव में इस मुद्दे को लेकर लगातार चर्चा हो रही है और लोग प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर बनाए हुए हैं। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो ग्रामीणों ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी भी दी है।

न्यूज़ देखो: जमीन बचाने की लड़ाई

कैराडाबर गांव का यह मामला झारखंड में जमीन से जुड़े विवादों की गंभीर तस्वीर पेश करता है। जब तक खतियानी जमीन की सख्त निगरानी और पारदर्शी जांच नहीं होगी, तब तक भू-माफियाओं पर लगाम लगाना मुश्किल है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जमीन हमारी पहचान है

जमीन सिर्फ संपत्ति नहीं, बल्कि पीढ़ियों की विरासत होती है।
यदि आप भी ऐसे मामलों से जूझ रहे हैं, तो अपनी आवाज उठाइए।
इस खबर को साझा करें और बताएं कि ग्रामीणों के हक की लड़ाई में आप उनके साथ हैं।

📥 Download E-Paper

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!

IMG-20251223-WA0009
IMG-20250723-WA0070
आगे पढ़िए...

नीचे दिए बटन पर क्लिक करके हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें


Surendra Verma

डुमरी, गिरिडीह

Related News

ये खबर आपको कैसी लगी, अपनी प्रतिक्रिया दें

Back to top button
error: