
#गिरिडीह #उसरीनदी #जलसंकटविवाद : फैक्ट्री पर धारा रोकने और पानी स्टॉक करने का आरोप।
गिरिडीह जिले की उसरी नदी से मोटर लगाकर पानी खींचने के आरोप में बाला जी फैक्ट्री के खिलाफ ग्रामीणों और माले नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है। असंगठित मजदूर मोर्चा और माले नेता कन्हाई पांडेय ने स्थल निरीक्षण कर फैक्ट्री परिसर से पाइपलाइन बिछाए जाने का दावा किया। ग्रामीणों का कहना है कि इससे उसरी फॉल की धारा प्रभावित हो रही है और गर्मी में जलस्रोत सूखने लगे हैं। मामले में प्रशासन को आवेदन देने और व्यापक अभियान चलाने की घोषणा की गई है।
- राजेश सिन्हा ने उसरी नदी की मुख्य धारा रोकने को अवैध बताया।
- कन्हाई पांडेय ने जलस्रोतों की बर्बादी के खिलाफ जागरूकता अभियान की बात कही।
- फैक्ट्री पर रात में मोटर लगाकर पानी स्टॉक करने का आरोप।
- स्थल निरीक्षण में फैक्ट्री परिसर से पाइपलाइन बनाए जाने का दावा।
- उपायुक्त गिरिडीह, एसडीएम, डीएमओ और डीवीसी को आवेदन देने की तैयारी।
गिरिडीह जिले के उसरी क्षेत्र में स्थित उसरी नदी और जलप्रपात को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों और वामपंथी संगठनों ने आरोप लगाया है कि बाला जी फैक्ट्री द्वारा नदी की धारा से मोटर लगाकर पानी खींचा जा रहा है, जिससे जलप्रवाह प्रभावित हो रहा है। असंगठित मजदूर मोर्चा और माले नेताओं ने स्थल का दौरा कर वीडियो और फोटो भी लेने की बात कही है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया तो व्यापक जनअभियान चलाया जाएगा।
उसरी नदी की धारा रोकने का आरोप
उसरी बचाव अभियान के संयोजक राजेश सिन्हा ने कहा कि उसरी नदी की मुख्य धारा को रोकना या उससे जबरन पानी खींचना प्रकृति के साथ छेड़छाड़ है। उनका आरोप है कि फैक्ट्री द्वारा जाड़ा और गर्मी के दिनों में भी लगातार रात के समय मोटर लगाकर पानी स्टॉक किया जाता है।
राजेश सिन्हा ने कहा: “उसरी की मुख्य धारा को रोकना उचित नहीं है। नदी का पानी फैक्ट्री में खींचने का कोई कानून नहीं है और यह फर्जी तरीके से किया जा रहा है, ऐसा ग्रामीणों का मानना है।”
उन्होंने यह भी कहा कि पहले गर्मी के दिनों में भी उसरी फॉल में पर्याप्त पानी बहता था, लेकिन अब गर्मी में जलप्रवाह न के बराबर रह गया है। इसे प्राकृतिक संतुलन के लिए खतरा बताते हुए उन्होंने जल्द संबंधित अधिकारियों को आवेदन देने की बात कही।
कन्हाई पांडेय ने किया स्थल निरीक्षण
असंगठित मजदूर मोर्चा और माले नेता कन्हाई पांडेय अपने साथियों के साथ उसरी पहुंचे और कथित रूप से उस स्थान का निरीक्षण किया जहां से पानी खींचे जाने का आरोप है। उनके अनुसार, पाइपलाइन फैक्ट्री परिसर के अंदर से बनाई गई है।
कन्हाई पांडेय ने कहा: “प्रकृति की बर्बादी और जलस्रोतों की बर्बादी बर्दाश्त करने की बात नहीं होनी चाहिए। ग्रामीणों में जागरूकता लाकर हम बड़ा अभियान चलाएंगे।”
उन्होंने प्रशासन से अपील की कि वह स्वयं ग्रामीणों के साथ स्थल का निरीक्षण कर वीडियो रिकॉर्डिंग करे ताकि सच्चाई सामने आ सके।
रात में पानी स्टॉक करने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि रात के समय मोटर लगाकर नदी से पानी खींचा जाता है और फैक्ट्री में स्टॉक किया जाता है। यह भी दावा किया गया कि बालमुकुंद फैक्ट्री के टैंकर और अन्य फैक्ट्रियों के टैंकर रात भर पानी का परिवहन करते हैं। इस संबंध में पहले भी वीडियो वायरल किए जाने की बात कही गई।
ग्रामीणों का कहना है कि एक साल पहले भी इस मुद्दे को लेकर आवाज उठाई गई थी और वीडियो सामने आए थे, लेकिन विरोध करने वालों पर मुकदमे दर्ज कर दिए गए। इससे ग्रामीणों में असंतोष है।
ग्रामीणों की प्रतिक्रिया और आरोप
स्थानीय ग्रामीण मसूदन कोल, किशोर राय, भीम कोल और लखन कोल सहित अन्य लोगों ने आरोप लगाया कि ग्रामीणों को बरगलाकर नदी में बड़े-बड़े गड्ढे बनाकर मोटर लगाई जाती है। उनका कहना है कि यह कार्य पारदर्शिता के बिना और स्थानीय हितों की अनदेखी कर किया जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, जलप्रपात की सुंदरता पर भी इसका असर पड़ा है। उनका कहना है कि उसरी वाटरफॉल की धारा पहले की तुलना में काफी कम हो गई है, जिससे पर्यटन और स्थानीय पारिस्थितिकी दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
प्रशासन को सौंपा जाएगा आवेदन
माले और असंगठित मजदूर मोर्चा ने निर्णय लिया है कि इस मामले में उपायुक्त गिरिडीह, एसडीएम, डीएमओ और डीवीसी सहित संबंधित विभागों को आवेदन दिया जाएगा। आंदोलनकारियों का आरोप है कि स्थानीय प्रशासन को पूरे मामले की जानकारी है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई।
राजेश सिन्हा ने कहा कि यदि प्रशासन निष्पक्ष जांच नहीं करता है तो प्रकृति प्रेमियों और सामाजिक संगठनों को जोड़कर बड़ा अभियान चलाया जाएगा। उनका कहना है कि जलस्रोतों की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है।
न्यूज़ देखो: जलस्रोतों पर बढ़ता दबाव और प्रशासनिक जवाबदेही
उसरी नदी को लेकर उठे ये सवाल केवल एक फैक्ट्री तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पूरे क्षेत्र में जलस्रोतों की सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी पर भी प्रश्न खड़े करते हैं। यदि वास्तव में नदी की धारा प्रभावित हो रही है, तो इसकी निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई आवश्यक है। दूसरी ओर, उद्योगों को भी यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे जल उपयोग के नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं। जलप्रपात और नदी जैसे प्राकृतिक धरोहरों की रक्षा प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
प्रकृति की रक्षा में जागरूक समाज ही सबसे बड़ी ताकत
नदियां, जलप्रपात और प्राकृतिक स्रोत केवल पानी नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों की विरासत हैं। यदि कहीं भी जलस्रोतों के दोहन की आशंका हो, तो स्थानीय समाज की सजगता ही बदलाव की शुरुआत बनती है।
जरूरी है कि तथ्य सामने आएं, निष्पक्ष जांच हो और पर्यावरण संतुलन को प्राथमिकता मिले।
आप भी अपने क्षेत्र के जलस्रोतों पर नजर रखें और जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाएं।
अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें, खबर को साझा करें और जागरूकता फैलाने में भागीदार बनें।
सजग समाज ही सुरक्षित प्रकृति की गारंटी है।