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बूमबुलड़ा में अवैध भूमि अधिग्रहण के विरोध में ग्रामीणों ने किया विशाल ग्राम सभा का आयोजन

#बानो #भूमि_संरक्षण : पाबूड़ा पंचायत में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से कंपनियों को भूमि न देने का प्रस्ताव पारित किया
  • बूमबुलड़ा ग्राम में ग्रामीणों की वृहद ग्राम सभा आयोजित।
  • सभा में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि किसी भी हालत में बाहरी कंपनियों को भूमि नहीं दी जाएगी
  • झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के सचिव विकास मघईया और महासचिव ललित कुमार सिंह ने भाग लिया।
  • उन्होंने भूमि सुरक्षा, सांस्कृतिक संरक्षण और सीएनटी एक्ट का महत्व बताया।
  • ग्रामीणों ने कृषि विकास और अपनी पूर्वजों की भूमि को भविष्य की पीढ़ी के लिए सुरक्षित रखने का संकल्प लिया।

पाबूड़ा पंचायत के बूमबुलड़ा ग्राम में स्थानीय ग्रामीणों ने अपने अधिकार और भूमि की सुरक्षा के लिए एक बड़ी ग्राम सभा का आयोजन किया। सभा में उपस्थित लोगों ने अवैध भूमि अधिग्रहण के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की और सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि किसी भी परिस्थिति में बाहरी कंपनियों को ग्रामीण भूमि नहीं दी जाएगी।

सीएनटी एक्ट और भूमि संरक्षण पर जोर

झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के सचिव विकास मघईया ने कहा:

“ना आधार कार्ड, ना पेन कार्ड, ना वोटर कार्ड – हमारे रैयतों की पहचान यही भूमि है। बड़ी कंपनियां दूरदर्शिता के नाम पर यहां भूमि अधिग्रहण की कोशिश कर रही हैं। यह सिर्फ वर्तमान पीढ़ी का सवाल नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के जीवन, संस्कृति और परंपरा का मुद्दा है।”

उन्होंने बताया कि आज भूमाफिया और कुछ लोग धड़ल्ले से सीएनटी एक्ट का उल्लंघन कर रहे हैं। ऐसे लोगों से सतर्क रहने की आवश्यकता है। महासचिव ललित कुमार सिंह ने कहा कि रैयतों को अपनी भूमि पर उन्नत कृषि कार्य करने और बेहतर जीवन जीने का अधिकार है।

ग्राम सभा में उपस्थित गणमान्य लोग

सभा में ग्राम सभा अध्यक्ष विश्राम लोमगा, ग्राम अध्यक्ष भींसेंट कांडुलना पाहन, सुखवेद सिंह, आलोक भोगता, भरन भोगता, बलीराम भोगता, अर्जुन सिंह, नेमा सिंह, बलराम सिंह, बीरबल सिंह, शांति देवी, साहबैत देवी सहित भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। सभी ने भूमि सुरक्षा के महत्व को समझा और इसे भविष्य की पीढ़ी तक सुरक्षित रखने का संकल्प लिया।

न्यूज़ देखो: बूमबुलड़ा ग्राम सभा से ग्रामीणों ने जताई भूमि सुरक्षा की प्रतिबद्धता

यह सभा ग्रामीणों की जागरूकता और सामाजिक एकता का प्रतीक है। स्थानीय लोग केवल अपनी आजीविका के लिए ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी सांस्कृतिक और पारंपरिक भूमि को सुरक्षित रखने के लिए सक्रिय हुए हैं।

हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

भूमि सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी में सक्रिय भागीदारी

स्थानीय जनता और समाज के प्रत्येक सदस्य का कर्तव्य है कि अपनी भूमि और संसाधनों की रक्षा करें। इसे केवल सरकारी आदेश या कानून पर छोड़ना पर्याप्त नहीं है। जागरूक बनें, समुदाय को प्रेरित करें और जमीन, जल, जंगल और सांस्कृतिक धरोहर की सुरक्षा में योगदान दें। अपनी राय कमेंट करें, इस खबर को शेयर करें और जागरूकता फैलाने का कार्य करें।

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Shivnandan Baraik

बानो, सिमडेगा

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