बनहरदी कोल ब्लॉक की एनओसी पर ग्रामीणों का सवाल, ग्राम सभा ने सर्वसम्मति से अमान्य घोषित किया

बनहरदी कोल ब्लॉक की एनओसी पर ग्रामीणों का सवाल, ग्राम सभा ने सर्वसम्मति से अमान्य घोषित किया

author Ravikant Kumar Thakur
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#लातेहार #ग्रामसभा_निर्णय : विशेष ग्राम सभा में ग्रामीणों ने कहा कि बिना सहमति जारी की गई एनओसी फर्जी और अस्वीकार्य है।
  • विशेष ग्राम सभा का आयोजन बुधवार, 03 दिसंबर 2025 को किया गया।
  • बैठक की अध्यक्षता ग्राम प्रधान रोबेन उरांव ने की।
  • ग्रामीणों ने बनहरदी कोल ब्लॉक की एनओसी को फर्जी बताया।
  • भूमि त्रुटि सुधार हेतु मिनी सर्वे कराने का निर्णय
  • ग्राम सभा की अनुमति के बिना किसी योजना या निर्माण पर रोक।
  • सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित, निर्णय पर सर्वसम्मति से हस्ताक्षर।

ग्राम बारी के तनहाजा टाड़, बुध बाजार छातासेमर में बुधवार को आयोजित विशेष ग्राम सभा में कोयला ब्लॉक से संबंधित एनओसी और भूमि संबंधी मामलों को लेकर गंभीर चर्चा हुई। ग्रामीणों ने दावा किया कि बनहरदी कोल ब्लॉक परियोजना से संबंधित जो NOC दिखाई जा रही है, वह ग्राम सभा की जानकारी या स्वीकृति से जारी नहीं की गई है, इसलिए उसे अमान्य माना जाए। बैठक में भूमि सर्वेक्षण में हुई त्रुटियों, सही रिकॉर्ड की मांग और ग्राम अधिकारों की रक्षा को लेकर मजबूत निर्णय लिए गए।

एनओसी पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल

ग्राम सभा में ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी कंपनी या परियोजना के लिए ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य होती है। ग्रामीणों के अनुसार कथित NOC न तो पहले की किसी बैठक में स्वीकृत हुई और न ही इस बारे में किसी ग्रामीण को जानकारी दी गई।

ग्रामीणों ने संयुक्त बयान में कहा: “हमारी जानकारी और सहमति के बिना जारी किसी भी प्रकार की अनुमति फर्जी है और मान्य नहीं होगी।”

ग्राम सभा ने इसे सामूहिक रूप से अस्वीकार किया।

ग्राम सभा सर्वोच्च निर्णय इकाई: आगे बिना अनुमति कोई काम नहीं

बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया कि भविष्य में गांव की जमीन, संसाधन या परियोजनाओं से जुड़े सभी कार्यों में ग्राम सभा की अनुमति अनिवार्य होगी। कोई भी विभाग, ठेकेदार या कंपनी बिना लिखित मान्यता के कार्य शुरू नहीं कर सकेगी।

ग्राम प्रधान रोबेन उरांव ने कहा: “ग्राम सभा हमारा अधिकार और निर्णय का मंच है, यहां लिया निर्णय अंतिम माना जाएगा।”

भूमि सर्वे में त्रुटियों पर चिंता, मिनी सर्वे कराने का निर्णय

कई ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व सर्वेक्षणों में नाम, खाता और रकबा गलत दर्ज हुए हैं। इसका असर जमीन के अधिकार और भविष्य की योजनाओं पर पड़ रहा है। इसे गंभीरता से लेते हुए ग्रामीणों ने मिनी सर्वे करवाने का निर्णय लिया, ताकि सभी रिकॉर्ड सत्यापित और अद्यतन किए जा सकें।

ग्रामीणों ने कहा कि यह प्रक्रिया पारदर्शिता, संरक्षण और भविष्य की कानूनी प्रक्रिया के लिए आवश्यक है।

बड़े पैमाने पर ग्रामीणों की भागीदारी

सभा में शामिल प्रमुख लोगों में ब्रमसहाय उरांव, उद्देय उरांव, शिवमंगल भगत, जीतन उरांव, उदित राम, बासुदेव मोची, लालेंद्र उरांव, सुमित उरांव, धनेसर राम, कुलेसर टाना भगत, हिरालाल उरांव, संजय कुमार, उपेंद्र राम, शमीम अंसारी, लालदेव उरांव, सुकरा टाना भगत, बनारसी भुइयां, उर्मिला उरांव, सोमरी उरांव, लीला देवी, संगीता उरांव, झमनी देवी, मुनिया उरांव, जितनी देवी, कार्तिक उरांव, कृष्णा भुइयां और ननकू भुइयां समेत सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे।

सभा के अंत में सभी ग्रामीणों ने हस्ताक्षर कर निर्णय को अंतिम रूप दिया।

न्यूज़ देखो: गांव की आवाज मजबूत, अधिकारों की रक्षा

यह घटना बताती है कि ग्रामीण अब अपने अधिकार, संसाधन और भूमि के इस्तेमाल को लेकर सजग और संगठित हैं। बिना अनुमति जारी एनओसी पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक जागरूकता और स्थानीय स्वशासन की मजबूती का संकेत है। प्रशासन और कंपनियों को भी जनमत और कानून का सम्मान करना होगा।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जनभागीदारी से बदलेगी तस्वीर

जब गांव खुद अपनी आवाज और निर्णय लेकर सामने आते हैं, तब विकास सिर्फ परियोजना नहीं बल्कि सम्मान और अधिकार बन जाता है। जागरूकता और एकजुटता ही नीति और प्रणाली को सही दिशा देती है। आप क्या सोचते हैं—ग्रामीण अधिकार सर्वोपरि हैं या विकास परियोजनाएँ प्राथमिक?

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Written by

चंदवा, लातेहार

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