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गुमला में गूंजा ‘सरना धर्म कोड’ का स्वर, धरना देकर सौंपा गया ज्ञापन

#गुमला #सरनाकोडधरना – आंदोलन की चेतावनी के साथ आदिवासी समुदाय ने सरकार को दिखाई एकजुटता

  • सरना धर्म कोड और जातीय जनगणना की मांग को लेकर गुमला में हुआ जोरदार प्रदर्शन
  • गुमला विधायक भूषण तिर्की और सिसई विधायक जीगा सुसासन होरो ने किया नेतृत्व
  • “जब तक सरना धर्म कोड नहीं, तब तक जनगणना नहीं” का नारा रहा गूंजता
  • डीसी कार्यालय के समक्ष एक दिवसीय धरना के बाद सौंपा गया मांग पत्र
  • प्रदर्शन में शामिल लोगों ने संविधानिक मान्यता और अस्मिता की रक्षा को बताया उद्देश्य
  • आदिवासी समाज की आस्था और परंपरा को लेकर उभरा व्यापक समर्थन

सरना कोड की हुंकार: अब सिर्फ मांग नहीं, पहचान की लड़ाई

गुमला में सोमवार को आयोजित एक दिवसीय धरना प्रदर्शन में आदिवासी समाज के सैकड़ों लोगों ने भाग लिया और सरना धर्म कोड तथा झारखंड में जातीय जनगणना की मांग को लेकर सरकार को चेतावनी भरे अंदाज़ में संदेश दिया। कार्यक्रम का नेतृत्व गुमला विधायक भूषण तिर्की और सिसई विधायक जीगा सुसासन होरो ने किया। दोनों नेताओं ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि अब यह सिर्फ मांग नहीं, आदिवासी अस्मिता और अस्तित्व की लड़ाई है।

ज्ञापन सौंपने के साथ केंद्र सरकार को चेतावनी

धरना के बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने गुमला उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से साफ कहा गया कि यदि आगामी जनगणना में सरना धर्म कोड को शामिल नहीं किया गया तो यह संविधान और आदिवासी हितों के खिलाफ होगा। वक्ताओं ने कहा कि सरना समाज की पूजा-पद्धति, प्रकृति उपासना और सामाजिक संरचना को स्वतंत्र धर्म के रूप में मान्यता मिलनी ही चाहिए।

जनसभा में गूंजे नारे और जागरूकता के संदेश

धरना स्थल पर मौजूद युवाओं और महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में भाग लिया और “हमारी आस्था, हमारी पहचान — सरना धर्म कोड हमारा अधिकार” जैसे नारों से पूरा परिसर गूंजा उठा। वक्ताओं ने यह भी दोहराया कि सरना कोड की मांग अब राजनीतिक बहस नहीं, बल्कि जन सरोकार की अनिवार्यता बन चुकी है।

“हमारी आस्था, परंपरा और पहचान को संवैधानिक मान्यता दिलाना अब केवल ज़रूरत नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई है। जब तक सरना धर्म कोड नहीं, तब तक जनगणना नहीं।”
भूषण तिर्की, विधायक गुमला

राजनीतिक समर्थन और सामाजिक लामबंदी

इस आंदोलन में शामिल जनप्रतिनिधियों ने कहा कि यदि सरकार इस मुद्दे पर संवेदनशील नहीं होती है, तो आदिवासी समाज को सड़कों पर उतरकर निर्णायक लड़ाई लड़नी होगी। प्रदर्शन में शामिल जीगा सुसासन होरो ने स्पष्ट किया कि सरना धर्म कोड के बिना जनगणना करवाना आदिवासी समाज की उपेक्षा मानी जाएगी।

न्यूज़ देखो : जनसरोकारों की आवाज़ बनता हर कदम

‘न्यूज़ देखो’ हमेशा से उन मुद्दों की पैरवी करता आया है, जो जनता के हक, संविधानिक अधिकार और सामाजिक न्याय से जुड़े होते हैं। सरना धर्म कोड की मांग भी ऐसा ही एक मुद्दा है, जो आस्था और अस्तित्व से जुड़ा है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

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