Khunti

खूंटी के कर्रा प्रखंड में महिला हिंसा के खिलाफ जागरूकता की मजबूत पहल, डब्ल्यूसीएसएफ फाउंडेशन का व्यापक अभियान

#खूंटी #महिलाहिंसाजागरूकता : कर्रा प्रखंड के गांवों में महिलाओं को अधिकार, कानून और आत्मनिर्भरता की दी गई जानकारी।

खूंटी जिले के कर्रा प्रखंड अंतर्गत डूमरगड़ी, छाता और कर्रा पंचायत के विभिन्न गांवों में डब्ल्यूसीएसएफ चैरिटीस्पिरिट फाउंडेशन द्वारा महिला हिंसा जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। अभियान का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं और किशोरियों को घरेलू व सामाजिक हिंसा के स्वरूपों, उनके कानूनी अधिकारों और उपलब्ध सहायता तंत्र की जानकारी देना रहा। संवादात्मक बैठकों के माध्यम से महिलाओं को मानसिक, आर्थिक और सामाजिक हिंसा के प्रति भी सचेत किया गया। यह पहल ग्रामीण समाज में महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

Join News देखो WhatsApp Channel
  • डब्ल्यूसीएसएफ चैरिटीस्पिरिट फाउंडेशन द्वारा महिला हिंसा जागरूकता अभियान का आयोजन।
  • खूंटी जिले के कर्रा प्रखंड की डूमरगड़ी, छाता और कर्रा पंचायत में कार्यक्रम।
  • घरेलू, मानसिक, आर्थिक और सामाजिक हिंसा पर महिलाओं से खुला संवाद।
  • पंचायत महिला मित्र प्रीति कश्यप, दसमी बर्रा और जयशिंता गुरिया की सक्रिय भूमिका।
  • महिलाओं को कानूनी अधिकार, हेल्पलाइन और सहायता तंत्र की दी गई जानकारी।

खूंटी जिले के कर्रा प्रखंड के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों को लेकर जागरूकता फैलाने की दिशा में एक सराहनीय पहल देखने को मिली। डब्ल्यूसीएसएफ चैरिटीस्पिरिट फाउंडेशन द्वारा डूमरगड़ी, छाता और कर्रा पंचायत के विभिन्न गांवों में महिला हिंसा जागरूकता अभियान का व्यापक आयोजन किया गया। इस अभियान का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि महिलाओं को यह विश्वास दिलाना भी रहा कि वे अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा सकती हैं और अकेली नहीं हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू और सामाजिक हिंसा अक्सर परंपरा, भय और जानकारी के अभाव में दबा दी जाती है। इसी वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए इस अभियान को जमीनी स्तर पर संवाद और सहभागिता के माध्यम से संचालित किया गया, ताकि महिलाएं खुलकर अपनी बात रख सकें और समाधान की दिशा में कदम बढ़ा सकें।

हिंसा के सभी स्वरूपों पर जागरूकता

अभियान के दौरान महिलाओं और किशोरियों के साथ संवादात्मक बैठकों का आयोजन किया गया। इन बैठकों में यह स्पष्ट किया गया कि हिंसा केवल शारीरिक नहीं होती, बल्कि मानसिक, आर्थिक और सामाजिक हिंसा भी उतनी ही गंभीर होती है। महिलाओं को यह समझाया गया कि अपमान, डराना, आर्थिक निर्भरता थोपना या सामाजिक रूप से अलग-थलग करना भी हिंसा के दायरे में आता है।

महिलाओं को यह संदेश दिया गया कि किसी भी प्रकार की हिंसा को सहना मजबूरी नहीं है और इसके खिलाफ आवाज उठाना उनका संवैधानिक और कानूनी अधिकार है। इस संवाद से कई महिलाओं में पहली बार यह आत्मबोध पैदा हुआ कि उनकी पीड़ा भी महत्वपूर्ण है।

पंचायत महिला मित्रों की अहम भूमिका

इस पूरे अभियान में डब्ल्यूसीएसएफ चैरिटीस्पिरिट फाउंडेशन से जुड़ी पंचायत स्तर की महिला मित्रों की भूमिका अत्यंत सक्रिय और प्रभावशाली रही। प्रीति कश्यप, दसमी बर्रा और जयशिंता गुरिया ने गांव-गांव जाकर महिलाओं से सीधा संवाद स्थापित किया। उन्होंने न केवल जानकारी साझा की, बल्कि महिलाओं का भरोसा भी जीता।

पंचायत महिला मित्रों ने महिलाओं को घरेलू हिंसा से जुड़े कानूनी प्रावधानों, पुलिस व प्रशासनिक सहयोग, पंचायत स्तर पर मिलने वाली सहायता, तथा हेल्पलाइन नंबरों की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही यह भी समझाया गया कि आवश्यकता पड़ने पर सहायता कैसे और कहां से प्राप्त की जा सकती है, ताकि महिलाएं सुरक्षित और आत्मविश्वास के साथ आगे आ सकें।

महिलाओं ने साझा की अपनी पीड़ा

कार्यक्रम के दौरान कई महिलाओं ने खुलकर अपनी व्यक्तिगत समस्याएं और अनुभव साझा किए। यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि ग्रामीण समाज में ऐसे मंचों की कितनी आवश्यकता है, जहां महिलाएं बिना डर के अपनी बात कह सकें। कई महिलाओं ने पहली बार यह महसूस किया कि उनकी बातों को गंभीरता से सुना जा रहा है और उनके सम्मान एवं सुरक्षा के लिए संगठित प्रयास किए जा रहे हैं।

इन संवादों के माध्यम से महिलाओं में न केवल जागरूकता बढ़ी, बल्कि आपसी एकजुटता और सहयोग की भावना भी मजबूत हुई। महिलाओं ने एक-दूसरे का हौसला बढ़ाया और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों की निरंतरता की मांग की।

आत्मविश्वास और सशक्तिकरण की दिशा में कदम

डब्ल्यूसीएसएफ चैरिटीस्पिरिट फाउंडेशन के इस अभियान का प्रभाव महिलाओं के व्यवहार और सोच में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। कई महिलाएं अपने अधिकारों को लेकर अधिक सजग और आत्मविश्वासी नजर आईं। उन्हें यह एहसास हुआ कि शिक्षा, जानकारी और संगठन के माध्यम से वे अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं।

अभियान ने यह भी संदेश दिया कि महिला सशक्तिकरण केवल कानून से नहीं, बल्कि समाज में संवाद, संवेदनशीलता और समर्थन के वातावरण से संभव है।

न्यूज़ देखो: जब जागरूकता बनती है सुरक्षा की पहली दीवार

कर्रा प्रखंड में चला यह अभियान दिखाता है कि जमीनी स्तर पर जागरूकता ही महिला हिंसा के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार है। ऐसे प्रयास प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी को रेखांकित करते हैं। सवाल यह है कि क्या ऐसे अभियानों को नियमित और व्यापक बनाया जाएगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सुरक्षित समाज की शुरुआत जागरूक महिलाओं से

महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान पूरे समाज की जिम्मेदारी है। इस पहल को साझा करें, चर्चा को आगे बढ़ाएं और अपनी राय कमेंट में लिखें कि आपके क्षेत्र में ऐसे अभियानों की कितनी आवश्यकता है। जागरूक बनें, साथ खड़े हों और बदलाव का हिस्सा बनें।

📥 Download E-Paper

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!

IMG-20251223-WA0009
IMG-20250723-WA0070
आगे पढ़िए...

नीचे दिए बटन पर क्लिक करके हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें


Related News

ये खबर आपको कैसी लगी, अपनी प्रतिक्रिया दें

Back to top button
error: