
#दुमका #आदिवासी_संस्कृति : मरांग बुरु की आराधना के साथ सामूहिक पूजा से सामाजिक एकता और संस्कारों को सहेजने की पहल।
दुमका जिले के रानीश्वर प्रखंड अंतर्गत रखाल पहाड़ी गांव में संताल आदिवासी समुदाय द्वारा पारंपरिक मांझी थान में साप्ताहिक सामूहिक पूजा की शुरुआत की गई। इस पहल का उद्देश्य धार्मिक आस्था को मजबूत करना, सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और नई पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ना है। समाजसेवी सच्चिदानंद सोरेन एवं पारंपरिक ग्राम नेतृत्व के सहयोग से यह पूजा हर रविवार नियमित रूप से आयोजित की जाएगी।
- रानीश्वर प्रखंड के रखाल पहाड़ी गांव में साप्ताहिक मांझी थान पूजा की शुरुआत।
- संताल आदिवासी समुदाय द्वारा मरांग बुरु की आराधना में सामूहिक पूजा।
- पूजा से पूर्व मांझी थान की साफ-सफाई और पारंपरिक विधि से अर्चना।
- बच्चों और युवाओं को संस्कृति, नशामुक्ति व शिक्षा से जोड़ने का संदेश।
- हर रविवार नियमित सामूहिक पूजा आयोजित करने का निर्णय।
दुमका जिले के रानीश्वर प्रखंड स्थित रखाल पहाड़ी गांव में रविवार को आदिवासी सांस्कृतिक चेतना का जीवंत उदाहरण देखने को मिला। गांव के पारंपरिक पूजा स्थल मांझी थान में संताल आदिवासी समुदाय द्वारा साप्ताहिक सामूहिक पूजा की औपचारिक शुरुआत की गई। इस अवसर पर पूरे गांव में उत्साह और श्रद्धा का वातावरण रहा।
समाजसेवी और पारंपरिक नेतृत्व की संयुक्त पहल
इस साप्ताहिक पूजा की शुरुआत समाजसेवी सच्चिदानंद सोरेन तथा गांव के पारंपरिक पदधारकों मांझी बाबा, नायकी, गुडित, जोग माझी, प्राणिक और कुड़म नायकी की पहल पर की गई। ग्रामीणों ने बताया कि आधुनिक समय में जब आदिवासी परंपराएं धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही हैं, ऐसे में मांझी थान पूजा को नियमित रूप देना बेहद जरूरी हो गया है।
पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हुई पूजा
पूजा से पूर्व मांझी थान परिसर की सामूहिक रूप से साफ-सफाई की गई। इसके बाद महिला, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चों ने पारंपरिक विधि के अनुसार धूप, अगरबत्ती, जल, लड्डू, चूड़ा सहित अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर मरांग बुरु की आराधना की। पूरे अनुष्ठान के दौरान पारंपरिक श्रद्धा और अनुशासन का विशेष ध्यान रखा गया।
मरांग बुरु की श्रद्धा में साप्ताहिक आयोजन
ग्रामीणों ने बताया कि यह पूजा संताल आदिवासी समाज के आराध्य देव मरांग बुरु की श्रद्धा में की जा रही है। निर्णय लिया गया है कि अब हर रविवार को मांझी थान में सामूहिक पूजा होगी, जिससे गांव के सभी लोग एक साथ एकत्र होकर अपनी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत कर सकें।
सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक उद्देश्य
ग्रामीणों के अनुसार साप्ताहिक मांझी थान पूजा का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से सामुदायिक एकता, आध्यात्मिक शांति और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। खास तौर पर नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना इस पहल का प्रमुख लक्ष्य है।
बच्चों और युवाओं के लिए विशेष संदेश
पूजा के दौरान बच्चों और युवाओं को विशेष रूप से अपनी परंपराओं को समझने और अपनाने की सीख दी गई। ग्रामीणों ने बताया कि प्रार्थना के माध्यम से नशामुक्त जीवन अपनाने, नियमित स्कूल जाने, माता-पिता और बुजुर्गों का सम्मान व सेवा करने जैसे सामाजिक और नैतिक मूल्यों पर भी जोर दिया गया।
प्रसाद ग्रहण के साथ समापन
पूजा-अर्चना के उपरांत सभी मरांग बुरु भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि इस तरह की सामूहिक पूजा से गांव में आपसी भाईचारा बढ़ेगा और सामाजिक बुराइयों से दूर रहने की प्रेरणा मिलेगी।
बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे उपस्थित
इस साप्ताहिक मांझी थान पूजा में अनिल हेम्ब्रम, मिसिल टुडू, अमीन मुर्मू, आनंद टुडू, मलुती हेम्ब्रम, ईश्वर हेम्ब्रम, मानेस्वर टुडू, सुजीत हेम्ब्रम, बोड़ो बेसरा, बिबिधन सोरेन, मोडल सोरेन, सोमाय टुडू, रामलाल सोरेन, प्रजा हेम्ब्रम सहित बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे उपस्थित रहे।

न्यूज़ देखो: परंपरा से जुड़कर मजबूत हो रहा समाज
रखाल पहाड़ी गांव की यह पहल दिखाती है कि आदिवासी समाज अपनी सांस्कृतिक पहचान को बचाने के लिए संगठित प्रयास कर रहा है। साप्ताहिक मांझी थान पूजा न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करेगी, बल्कि सामाजिक अनुशासन और नैतिक मूल्यों को भी नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनेगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
संस्कृति और एकता से ही सुरक्षित रहेगी पहचान
जब गांव और समाज मिलकर अपनी परंपराओं को संजोने का संकल्प लेते हैं, तभी सांस्कृतिक विरासत जीवित रहती है। ऐसी पहलें युवाओं को सही दिशा देती हैं और समाज को मजबूत बनाती हैं। इस खबर पर अपनी राय जरूर साझा करें और सांस्कृतिक संरक्षण के संदेश को आगे बढ़ाएं।





