रात्रि में जंगली हाथी का आतंक, किसानों का धान नष्ट, विद्यालय भवन को भी पहुंचा भारी नुकसान

रात्रि में जंगली हाथी का आतंक, किसानों का धान नष्ट, विद्यालय भवन को भी पहुंचा भारी नुकसान

author Shivnandan Baraik
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#बानो #वन्यजीव_आतंक : ग्राम पांगुर कमलाबेड़ा में जंगली हाथी ने किसानों के खलिहान में रखे धान को नष्ट किया और स्कूल भवन को भी क्षतिग्रस्त कर दहशत फैला दी
  • बानो प्रखंड के बिंतुका पंचायत अंतर्गत ग्राम पांगुर कमलाबेड़ा में जंगली हाथी का उत्पात।
  • किसान हीराचंद सिंह और चुनु सिंह के खलिहान में रखे कुल 10 क्विंटल धान नष्ट।
  • उत्क्रमिक प्राथमिक विद्यालय पांगूर कमलाबेड़ा की खिड़की और दीवार क्षतिग्रस्त।
  • घटना के बाद मुखिया प्रीति बुढ़ ने मौके पर पहुंचकर नुकसान का लिया जायजा।
  • मामले की सूचना वन विभाग को दी गई, पीड़ितों ने शीघ्र मुआवजे की मांग की।

बानो प्रखंड के बिंतुका पंचायत अंतर्गत ग्राम पांगुर कमलाबेड़ा में बीती रात जंगली हाथी के आतंक से ग्रामीणों में दहशत का माहौल बन गया। अचानक गांव में घुसे हाथी ने किसानों के खलिहान को निशाना बनाते हुए भारी मात्रा में धान नष्ट कर दिया। इस दौरान विद्यालय भवन को भी नुकसान पहुंचा, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश और चिंता दोनों देखी गई। लगातार बढ़ते हाथी आतंक ने क्षेत्र में फसल सुरक्षा और जन-जीवन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

खलिहान में रखे धान को बनाया निशाना

प्राप्त जानकारी के अनुसार, रात के अंधेरे में गांव में घुसे जंगली हाथी ने सबसे पहले किसानों के खलिहान की ओर रुख किया। गांव के किसान हीराचंद सिंह और चुनु सिंह के खलिहान में उस समय धान सुरक्षित रखा गया था। हाथी ने खलिहान में रखे करीब 5–5 क्विंटल, यानी कुल 10 क्विंटल धान को खा लिया और कुछ को रौंदकर पूरी तरह नष्ट कर दिया।

धान की इस क्षति से दोनों किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। किसानों का कहना है कि यही धान उनके परिवार की आजीविका और आने वाले महीनों के लिए मुख्य सहारा था। अचानक हुई इस घटना ने उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से तोड़ दिया है।

भोजन की तलाश में विद्यालय भवन को पहुंचा नुकसान

जंगली हाथी का उत्पात केवल किसानों के खलिहान तक सीमित नहीं रहा। भोजन की तलाश में हाथी उत्क्रमिक प्राथमिक विद्यालय पांगूर कमलाबेड़ा तक पहुंच गया। वहां हाथी ने विद्यालय की खिड़की और दीवार को क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे स्कूल भवन को नुकसान हुआ है।

ग्रामीणों ने बताया कि यदि यह घटना दिन के समय होती, तो बच्चों और शिक्षकों की जान को भी खतरा हो सकता था। विद्यालय को नुकसान पहुंचने से शिक्षा व्यवस्था पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल पहले से ही संसाधनों की कमी से जूझ रहा है, ऐसे में यह नुकसान चिंता का विषय है।

मुखिया ने लिया जायजा, वन विभाग को दी सूचना

घटना की जानकारी मिलते ही बिंतुका पंचायत की मुखिया प्रीति बुढ़ पीड़ित किसानों के घर पहुंचीं और पूरे मामले का जायजा लिया। उन्होंने किसानों से बातचीत कर नुकसान की जानकारी ली और उन्हें हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।

मुखिया प्रीति बुढ़ ने कहा:

“घटना की जानकारी वन विभाग को दे दी गई है। पीड़ित किसानों को मुआवजा दिलाने के लिए हर स्तर पर प्रयास किया जाएगा।”

उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि पंचायत प्रशासन इस मामले में संवेदनशीलता के साथ काम करेगा और वन विभाग व प्रखंड प्रशासन से समन्वय कर समस्या के समाधान की दिशा में पहल की जाएगी।

ग्रामीणों में दहशत, लगातार बढ़ रहा हाथी आतंक

घटना के बाद गांव में भय का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में जंगली हाथियों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। इससे न केवल फसलों को नुकसान हो रहा है, बल्कि ग्रामीणों की जान-माल पर भी खतरा मंडरा रहा है।

ग्रामीणों ने बताया कि रात के समय लोग खेत या बाहर निकलने से डरने लगे हैं। बच्चों और बुजुर्गों को लेकर विशेष चिंता बनी हुई है। ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

पीड़ित किसानों की मांग: शीघ्र मुआवजा और सुरक्षा व्यवस्था

पीड़ित किसानों हीराचंद सिंह और चुनु सिंह ने वन विभाग और प्रखंड प्रशासन से शीघ्र मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि फसल नुकसान का आकलन कर तुरंत सहायता दी जाए, ताकि वे दोबारा खेती की तैयारी कर सकें।

इसके साथ ही ग्रामीणों ने क्षेत्र में हाथी रोकथाम के लिए गश्ती बढ़ाने, अलर्ट सिस्टम और आवश्यक सुरक्षा उपाय लागू करने की भी मांग की है। ग्रामीणों का मानना है कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं।

न्यूज़ देखो: हाथी आतंक से ग्रामीण जीवन पर संकट

यह घटना साफ दर्शाती है कि बानो प्रखंड के ग्रामीण इलाकों में मानव और वन्यजीव संघर्ष गंभीर रूप ले चुका है। किसानों की मेहनत पर एक ही रात में पानी फिर जाना प्रशासनिक संवेदनशीलता की परीक्षा है। वन विभाग और प्रखंड प्रशासन को चाहिए कि त्वरित मुआवजा के साथ दीर्घकालिक समाधान पर भी काम करे।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

भय से नहीं, समाधान से बनेगा सुरक्षित गांव

ग्रामीण क्षेत्रों में खेती और शिक्षा दोनों ही जीवन की रीढ़ हैं। जब फसल और विद्यालय दोनों असुरक्षित हों, तो यह पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है। जरूरत है कि प्रशासन, वन विभाग और स्थानीय प्रतिनिधि मिलकर स्थायी समाधान की दिशा में ठोस पहल करें।

अब समय है कि इस मुद्दे पर सामूहिक आवाज उठाई जाए। यदि आपके क्षेत्र में भी जंगली हाथियों का आतंक है, तो अपनी बात सामने रखें।

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Written by

बानो, सिमडेगा

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