
#कोलेबिरा #हाथी_उत्पात : बरसलोया पंचायत के गढ़ा टोली गांव में तीन घर क्षतिग्रस्त, राहत सामग्री वितरित की गई।
कोलेबिरा प्रखंड के बरसलोया पंचायत अंतर्गत गढ़ा टोली गांव में शुक्रवार देर रात जंगली हाथियों ने अचानक उत्पात मचाकर तीन घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया। इस घटना में घरों में संग्रहित उरद और धान को हाथियों ने खा लिया, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया। घटना की सूचना मिलते ही कोलेबिरा विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी के निर्देश पर कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल गांव पहुंचा और पीड़ित परिवारों को राहत सामग्री उपलब्ध कराई। गनीमत रही कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन ग्रामीणों ने हाथियों की लगातार आवाजाही को गंभीर खतरा बताया।
- गढ़ा टोली गांव में जंगली हाथियों ने तीन घरों को किया क्षतिग्रस्त।
- किरण डांग, सितुंग डांग और विश्राम डांग के घरों में रखा अनाज नष्ट।
- शुक्रवार देर रात की घटना से गांव में दहशत का माहौल।
- विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी के निर्देश पर कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल गांव पहुंचा।
- पीड़ितों को चावल, पटाखा, मोबिल सहित हाथी भगाने की सामग्री दी गई।
- ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन से शीघ्र मुआवजे की मांग की।
कोलेबिरा प्रखंड क्षेत्र में जंगली हाथियों की गतिविधियां लगातार ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। ताजा मामला बरसलोया पंचायत के गढ़ा टोली गांव का है, जहां शुक्रवार देर रात हाथियों के झुंड ने अचानक गांव में प्रवेश कर तीन घरों को नुकसान पहुंचाया। घटना इतनी अचानक हुई कि ग्रामीणों को संभलने का मौका भी नहीं मिला। हाथियों ने घरों की दीवारों और छतों को क्षतिग्रस्त करने के साथ-साथ अंदर रखे उरद और धान को खा लिया, जिससे पीड़ित परिवारों को आर्थिक क्षति उठानी पड़ी।
कैसे हुई घटना और क्या हुआ नुकसान
ग्रामीणों के अनुसार, शुक्रवार देर रात जंगल की ओर से हाथियों की आवाज सुनाई दी और कुछ ही देर में हाथियों का झुंड गांव में घुस आया। हाथियों ने किरण डांग, सितुंग डांग और विश्राम डांग के घरों को निशाना बनाया। घरों में रखा अनाज हाथियों ने खा लिया और संरचना को नुकसान पहुंचाया। अचानक हुई इस घटना से गांव के लोग अपने घरों से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थानों पर भागने को मजबूर हो गए। हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी व्यक्ति या पशु को शारीरिक नुकसान नहीं पहुंचा।
सूचना मिलते ही कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल पहुंचा गांव
घटना की जानकारी मिलते ही कोलेबिरा विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी ने तत्काल संज्ञान लेते हुए कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को प्रभावित गांव भेजने के निर्देश दिए। विधायक के निर्देश पर गठित प्रतिनिधिमंडल में कोलेबिरा कांग्रेस पश्चिमी मंडल अध्यक्ष राकेश कोनगाड़ी, कांग्रेस युवा विधानसभा अध्यक्ष अमृत डुंगडुंग, कांग्रेस प्रखंड महासचिव एरेन केरकेट्टा तथा बरसलोया कांग्रेस पंचायत अध्यक्ष अनिल सोरेंग शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने गढ़ा टोली गांव पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और घटनास्थल का जायजा लिया।
पीड़ित परिवारों से संवाद और तत्काल सहायता
कांग्रेस प्रतिनिधियों ने पीड़ित परिवारों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना और उन्हें तत्काल राहत प्रदान की। प्रतिनिधिमंडल की ओर से पीड़ितों को चावल, पटाखा, मोबिल सहित हाथियों को भगाने से संबंधित आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई गई। प्रतिनिधियों ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में भी हरसंभव सहायता दी जाएगी और प्रशासन के समक्ष उनकी मांगों को मजबूती से रखा जाएगा।
राकेश कोनगाड़ी ने कहा: “विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी के निर्देशानुसार पीड़ित परिवारों को तुरंत राहत सामग्री दी गई है और आगे भी उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।”
मुआवजे की मांग और प्रशासन से अपेक्षा
पीड़ित परिवारों ने वन विभाग और प्रखंड प्रशासन से क्षति का शीघ्र आकलन कर उचित मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि जंगली हाथियों की लगातार आवाजाही से उनका जीवन असुरक्षित हो गया है और हर रात भय के साये में गुजरती है। पीड़ितों ने त्वरित सहयोग के लिए विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी और कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
ग्रामीणों की चिंता और स्थायी समाधान की मांग
गांव के अन्य ग्रामीणों ने भी बताया कि क्षेत्र में जंगली हाथियों की आवाजाही कोई नई बात नहीं है। आए दिन हाथी खेतों, घरों और अनाज को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे जान-माल का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि हाथियों की गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए ठोस और स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।
कांग्रेस पदाधिकारियों का बयान
मौके पर मौजूद कांग्रेस पदाधिकारियों ने कहा कि कोलेबिरा विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी आम जनता के सुख-दुख में हमेशा उनके साथ खड़े रहते हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए विधायक लगातार प्रयासरत रहते हैं और इसी का परिणाम है कि घटना की सूचना मिलते ही राहत टीम गांव पहुंची।
न्यूज़ देखो: हाथी-मानव संघर्ष पर प्रशासन की जिम्मेदारी
गढ़ा टोली गांव की यह घटना एक बार फिर हाथी-मानव संघर्ष की गंभीरता को उजागर करती है। राहत पहुंचाना सराहनीय है, लेकिन स्थायी समाधान के बिना ऐसी घटनाएं दोहराती रहेंगी। वन विभाग और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जाए और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। मुआवजा प्रक्रिया में देरी न हो और दीर्घकालिक रणनीति पर काम हो—हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सजग ग्रामीण, सुरक्षित भविष्य की ओर कदम
जंगली जानवरों और मानव बस्तियों के बीच बढ़ता टकराव हम सभी के लिए चिंता का विषय है। प्रशासनिक सजगता, जनप्रतिनिधियों की तत्परता और ग्रामीणों की जागरूकता से ही स्थायी समाधान संभव है। ऐसी घटनाओं की जानकारी समय पर साझा करना और सामूहिक प्रयास करना बेहद जरूरी है।





