
#बानो #हाथी_उत्पात : ओडिशा के जंगलों से आए हाथियों ने आधी रात गांव में मचाया कोहराम।
बानो प्रखंड के गेनमेर गांव में सोमवार देर रात जंगली हाथियों के एक बड़े झुंड ने भारी उत्पात मचाया। ओडिशा के जंगलों से आए करीब 35 हाथियों ने गांव में प्रवेश कर कई घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया और खेतों में लगी सब्जी की फसलों को रौंद डाला। ग्रामीणों ने साहस दिखाते हुए मशाल और टीन पीटकर हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ा। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और क्षति का आकलन कर मुआवजा प्रक्रिया शुरू करने की बात कही।
- सोमवार रात करीब एक बजे गेनमेर गांव में हाथियों का प्रवेश।
- ओडिशा के जंगलों से आए लगभग 35 हाथियों का झुंड।
- चार ग्रामीणों के घर क्षतिग्रस्त, एक के बागान की फसल नष्ट।
- ग्रामीणों ने मशाल और टीन पीटकर हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ा।
- वन विभाग ने क्षति आकलन और मुआवजा प्रक्रिया शुरू की।
बानो प्रखंड में जंगली हाथियों की आवाजाही एक बार फिर ग्रामीणों के लिए डर और चिंता का कारण बन गई है। सोमवार देर रात बानो प्रखंड के गेनमेर गांव में जंगली हाथियों के झुंड ने अचानक प्रवेश कर दिया, जिससे पूरे गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। रात के सन्नाटे में हाथियों के गांव में घुसते ही लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और जान-माल बचाने की कोशिशों में जुट गए।
आधी रात गांव में मचा कोहराम
स्थानीय सूत्रों के अनुसार सोमवार रात्रि लगभग एक बजे ओडिशा के जंगलों से होते हुए करीब 35 जंगली हाथियों का झुंड गेनमेर गांव में प्रवेश कर गया। हाथियों के अचानक आने से गांव में कोहराम मच गया। लोग अपने-अपने घरों से निकलकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों में भय का माहौल देखा गया।
ग्रामीणों की एकजुटता से टला बड़ा नुकसान
हाथियों के गांव में घुसते ही ग्रामीणों ने सूझबूझ और एकजुटता का परिचय दिया। ग्रामीणों ने मशाल जलाकर और टीन पीटकर शोर मचाया, जिससे हाथी भयभीत होकर तेनन्दा जंगल की ओर वापस लौट गए। ग्रामीणों की इस तत्परता के कारण किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, हालांकि संपत्ति और फसलों को नुकसान पहुंचा।
घरों और खेती को हुआ नुकसान
मिली जानकारी के अनुसार जंगली हाथियों ने गांव में कई स्थानों पर नुकसान पहुंचाया। हाथियों ने पुरुषोत्तम बड़ाईक, रमेश बड़ाईक, कार्तिको बड़ाईक और बालेश्वर राणा के घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया। घरों की दीवारें और छत को नुकसान पहुंचा है।
इसके अलावा अर्जुन बड़ाईक के बागान में लगी सब्जी की खेती को हाथियों ने रौंद डाला, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है कि मेहनत से तैयार की गई फसल एक ही रात में बर्बाद हो गई।
वन विभाग की टीम ने किया क्षति का आकलन
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग बानो की टीम सक्रिय हुई। वन विभाग की ओर से वन रक्षी लखिन्द्र सिंह, दीपनारायण सिंह, सुरेश टेटे, बालेश्वर तिवारी, राजेंद्र तुरी और सुंदर माझी गेनमेर गांव पहुंचे। टीम ने हाथियों द्वारा किए गए नुकसान का निरीक्षण किया और प्रभावित परिवारों से जानकारी ली।
वन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि क्षति का विधिवत आकलन कर मुआवजे के लिए कागजी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी, ताकि प्रभावित परिवारों को जल्द राहत मिल सके।
ग्रामीणों के बीच सुरक्षा सामग्री का वितरण
वन विभाग की ओर से हाथियों के खतरे को देखते हुए ग्रामीणों के बीच मशाल और मोबिल का वितरण भी किया गया। अधिकारियों ने बताया कि रात के समय हाथियों को दूर रखने में मशाल और रोशनी काफी मददगार साबित होती है। ग्रामीणों को हाथियों से निपटने के पारंपरिक और सुरक्षित तरीकों के बारे में भी जानकारी दी गई।
सतर्क रहने की अपील
इधर क्षेत्र में हाथियों की बड़ी संख्या को देखते हुए बानो रेंजर अभय कुमार ने ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा:
“हाथियों की आवाजाही को देखते हुए ग्रामीण रात के समय सतर्क रहें और समूह में रहकर ही आवश्यक गतिविधियां करें। किसी भी स्थिति में हाथियों के नजदीक जाने का प्रयास न करें।”
वन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है और स्थिति के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
न्यूज़ देखो: मानव और वन्यजीव संघर्ष की गंभीर चेतावनी
गेनमेर गांव की यह घटना मानव और वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती समस्या को उजागर करती है। जंगली हाथियों का आबादी वाले क्षेत्रों में आना न केवल ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि आजीविका पर भी सीधा असर डालता है। वन विभाग की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के बिना ऐसी घटनाएं दोहराती रहेंगी। सवाल यह है कि क्या हाथी कॉरिडोर और जंगल प्रबंधन को और मजबूत करने की जरूरत नहीं है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सतर्कता, सहयोग और समाधान की जरूरत
जंगली हाथियों का गांवों में प्रवेश एक गंभीर चुनौती है, जिसका सामना केवल प्रशासन नहीं बल्कि समाज को मिलकर करना होगा। ग्रामीणों की सतर्कता और एकजुटता से बड़ी दुर्घटनाएं टल सकती हैं। साथ ही वन विभाग और प्रशासन को स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।





