Garhwa

वन्यजीव संरक्षण को खतरा, गढ़वा में हिरन (कोटरा) शिकार का पर्दाफाश, आठ आरोपी नामजद

#गढ़वा #वन्यजीव_संरक्षण : सुरक्षित वन क्षेत्र में हिरन शिकार का खुलासा, कार्रवाई जारी।

गढ़वा जिले के विशुनपुरा प्रखंड में पिपरीकला पंचायत के सुरक्षित वन क्षेत्र में हिरन (कोटरा) का अवैध शिकार पकड़ा गया। वन विभाग को मिली गुप्त सूचना पर शुक्रवार को छापेमारी कर हिरन के मांस रहित सींग बरामद किए गए। इस मामले में वन विभाग ने आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की और कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी। कार्रवाई से वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता की सुरक्षा पर गंभीर संदेश गया है।

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  • विशुनपुरा प्रखंड, पिपरीकला पंचायत में अवैध हिरन शिकार पकड़ा गया।
  • वन क्षेत्र पदाधिकारी प्रमोद कुमार के नेतृत्व में छापामारी।
  • चतरगुन यादव के घर से हिरन का मांस रहित सींग बरामद।
  • कुल आठ लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया।
  • वन्य प्राणी (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत मामला दर्ज।
  • वन विभाग ने आम नागरिकों से सहयोग और सूचना देने की अपील की।

गढ़वा जिले के सुरक्षित वन क्षेत्रों में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए वन विभाग ने अवैध शिकार का पर्दाफाश किया। यह कार्रवाई पिपरीकला पंचायत अंतर्गत पातों सुरक्षित वन क्षेत्र में हुई। वन विभाग को मिली गुप्त सूचना के आधार पर शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजे वन क्षेत्र पदाधिकारी प्रमोद कुमार के नेतृत्व में विशेष छापेमारी दल ने कार्रवाई की।

छापेमारी में हिरन के अवैध शिकार का खुलासा

वन विभाग की टीम ने छापेमारी के दौरान चतरगुन यादव के घर से हिरन (कोटरा) का मांस रहित एक जोड़ा सींग बरामद किया। इसके अलावा अन्य आवश्यक साक्ष्य भी जब्त किए गए। इस कार्रवाई को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग ने कुल आठ लोगों को नामजद अभियुक्त बनाते हुए वन्य प्राणी (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की।

प्रभारी वनपाल नीरज कुमार मेहता, वनरक्षी ध्रुव कुमार और प्रवीण कुमार शुक्ला की सक्रिय भूमिका इस अभियान में रही। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षित वन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का अवैध शिकार, वन्यजीव अंगों का संग्रहण या तस्करी पूरी तरह से अपराध है।

वन विभाग की चेतावनी और आम नागरिकों से अपील

वन विभाग ने स्पष्ट किया कि संरक्षित वन क्षेत्रों में शिकार किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने आम नागरिकों से आग्रह किया है कि यदि किसी भी स्थान पर अवैध शिकार, तस्करी या अन्य संदिग्ध गतिविधि नजर आए, तो तुरंत वन विभाग को सूचित करें।

वन क्षेत्र पदाधिकारी प्रमोद कुमार ने कहा: “सुरक्षित वन क्षेत्रों में अवैध शिकार पूरी तरह गैरकानूनी है। दोषियों को कानून के तहत सजा दिलाई जाएगी और आम नागरिकों को वन्यजीव संरक्षण में सहयोग करना चाहिए।”

वन विभाग का यह अभियान जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन की रक्षा के लिए अहम साबित होगा। अधिकारियों का मानना है कि समय रहते जागरूकता और सख्त कार्रवाई से वन्यजीवों की रक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

न्यूज़ देखो: वन्यजीव संरक्षण के प्रति प्रशासन की सख्ती

यह मामला दर्शाता है कि वन्यजीव संरक्षण में प्रशासन कितनी गंभीरता से कार्रवाई कर रहा है। अवैध शिकार पर कड़ी कार्रवाई न केवल नियमों का पालन सुनिश्चित करती है बल्कि अन्य लोगों के लिए भी चेतावनी का संदेश देती है। क्या प्रशासन आगे और सख्त निगरानी तंत्र लागू करेगा और अन्य संदिग्ध क्षेत्रों पर भी अभियान चलाएगा, यह देखना महत्वपूर्ण रहेगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

वन्यजीव संरक्षण में आपकी भागीदारी जरूरी

वन्यजीव और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा केवल वन विभाग का काम नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। यदि आप किसी भी अवैध शिकार या तस्करी को देखते हैं, तो तुरंत सूचना दें। जागरूक बनें, संरक्षण में योगदान दें और अपने बच्चों को भी वन्यजीवों की महत्ता समझाएँ। इस संदेश को साझा करें, कमेंट करें और समाज में वन्यजीव सुरक्षा का संदेश फैलाएँ।

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Rajkumar Singh (Raju)

विशुनपुरा, गढ़वा

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