News dekho specials
Chatra

शिव में जागो शिव से जानो के संदेश के साथ चतरा के लावालौंग में विराट शिवगुरु महोत्सव का आयोजन

#चतरा #शिवगुरु_महोत्सव : कल्याणपुर चौक पर 8 फरवरी को आत्मा से आत्मा के संवाद का विराट आयोजन।

चतरा जिले के लावालौंग प्रखंड स्थित कल्याणपुर चौक पर 8 फरवरी 2026 को विराट शिवगुरु महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस आध्यात्मिक आयोजन में मुख्य वक्ता भाई धनंजय द्वारा आत्मबोध और चेतना जागरण का संदेश दिया जाएगा। सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक चलने वाले इस कार्यक्रम का उद्देश्य मनुष्य को भीतर की शांति और आत्मस्मरण से जोड़ना है। आयोजन शिव शिष्य परिवार इकाई लावालौंग कुंदा द्वारा किया जा रहा है।

Join News देखो WhatsApp Channel
  • 8 फरवरी 2026 को लावालौंग प्रखंड के कल्याणपुर चौक पर आयोजन।
  • भाई धनंजय होंगे विराट शिवगुरु महोत्सव के मुख्य वक्ता।
  • सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक चलेगा आध्यात्मिक कार्यक्रम।
  • आयोजन का दायित्व शिव शिष्य परिवार इकाई लावालौंग कुंदा चतरा ने लिया।
  • आत्मा से आत्मा के संवाद पर केंद्रित रहेगा महोत्सव।
  • समाज के हर वर्ग के लिए खुला रहेगा आयोजन।

चतरा जिले के लावालौंग प्रखंड में एक विशेष आध्यात्मिक आयोजन को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। कल्याणपुर चौक पर आयोजित होने वाला विराट शिवगुरु महोत्सव केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आत्मा से जुड़ने और भीतर की चेतना को जगाने का प्रयास बताया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार यह महोत्सव उन लोगों के लिए है जो जीवन की भागदौड़ में स्वयं से दूर होते जा रहे हैं और भीतर की शांति की तलाश में हैं।

भाई धनंजय होंगे मुख्य वक्ता

इस विराट आयोजन के मुख्य वक्ता भाई धनंजय होंगे, जिन्हें उनके सरल, गूढ़ और अनुभूति आधारित प्रवचनों के लिए जाना जाता है। आयोजकों का कहना है कि भाई धनंजय के शब्द केवल उपदेश नहीं होते, बल्कि श्रोताओं के भीतर अनुभव के रूप में उतरते हैं। उनका संवाद ऐसा होता है मानो कोई व्यक्ति स्वयं अपने भीतर झांकने लग जाए।

भाई धनंजय के प्रवचन का केंद्रीय भाव “शिव में जागो, शिव से जानो” है। यह वाक्य मात्र एक नारा नहीं, बल्कि चेतना को जागृत करने का संदेश माना जा रहा है। उनके अनुसार शिव कोई बाहरी सत्ता नहीं, बल्कि वह शांति हैं जो मनुष्य के भीतर सदैव विद्यमान रहती है।

शिव का अर्थ केवल देवता नहीं

महोत्सव के दौरान शिव को केवल देवता के रूप में नहीं, बल्कि जीवन के गहरे अर्थ के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार शिव वह मौन हैं जो शब्दों से अधिक प्रभावशाली है और वह शांति हैं जो अशांति के बीच भी बनी रहती है।

आध्यात्मिक जानकारों का मानना है कि जब मनुष्य जीवन की दौड़ में थक जाता है, रिश्तों से बोझिल महसूस करने लगता है और भीतर एक अनकही पीड़ा जन्म लेती है, तब आत्मा स्वयं संवाद चाहती है। उसी संवाद का माध्यम यह शिवगुरु महोत्सव बनेगा।

आत्मा से आत्मा का संवाद

सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक चलने वाले इस आयोजन में आत्मा से आत्मा के संवाद पर विशेष जोर दिया जाएगा। यह संवाद किसी मंचीय भाषण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि श्रोताओं को भीतर की यात्रा पर ले जाने का प्रयास किया जाएगा।

आयोजकों का कहना है कि यह महोत्सव किसी मत, मजहब या संप्रदाय से बंधा नहीं है। इसका उद्देश्य हर उस व्यक्ति तक पहुंचना है जो भीतर से जुड़ना चाहता है, भले ही वह जीवन में टूटन या तनाव से गुजर रहा हो।

News dekho specials

शिव शिष्य परिवार की पहल

इस विराट आयोजन का दायित्व शिव शिष्य परिवार – इकाई लावालौंग कुंदा चतरा ने उठाया है। आयोजकों ने बताया कि समाज में बढ़ती मानसिक अशांति, तनाव और अकेलेपन को देखते हुए इस तरह के आध्यात्मिक आयोजन की आवश्यकता महसूस की गई।

आयोजक मंडल के अनुसार, जब मनुष्य शिव को बाहर खोजता है, तब वह थक जाता है, लेकिन जब वह शिव में जागता है, तब जीवन स्वयं अर्थ देने लगता है। इसी संदेश को समाज के बीच पहुंचाने के लिए यह शिवगुरु महोत्सव आयोजित किया जा रहा है।

क्षेत्र में दिख रहा उत्साह

महोत्सव को लेकर लावालौंग, कुंदा और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं और आध्यात्मिक जिज्ञासुओं के बीच उत्साह देखा जा रहा है। आयोजन स्थल पर व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक लोग सहज रूप से कार्यक्रम में शामिल हो सकें।

आयोजकों ने बताया कि कार्यक्रम में आने वाले लोगों के लिए बैठने, जल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है, ताकि वे पूरे समय ध्यान और संवाद में रह सकें।

सभी के लिए खुला आयोजन

शिवगुरु महोत्सव को लेकर आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि यह आयोजन किसी विशेष वर्ग के लिए सीमित नहीं है। युवा, बुजुर्ग, महिलाएं और पुरुष—हर वर्ग के लोग इसमें शामिल हो सकते हैं।

आयोजकों ने क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं और आत्मखोजियों से अपील की है कि वे इस पावन अवसर के साक्षी बनें और अपने भीतर के शिव को पहचानने का प्रयास करें।

न्यूज़ देखो: आत्मिक शांति की ओर एक सार्थक पहल

लावालौंग में आयोजित होने वाला विराट शिवगुरु महोत्सव यह दर्शाता है कि समाज में अब केवल भौतिक विकास ही नहीं, बल्कि मानसिक और आत्मिक शांति की भी गहरी आवश्यकता महसूस की जा रही है। ऐसे आयोजन लोगों को भीतर झांकने और जीवन के वास्तविक अर्थ को समझने का अवसर देते हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस तरह के प्रयास समाज में किस स्तर तक सकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

भीतर की शांति की ओर एक कदम बढ़ाएं

जीवन की भागदौड़ में यदि मन थक गया हो और भीतर खालीपन महसूस हो रहा हो, तो ऐसे आयोजन आत्मस्मरण का अवसर देते हैं। इस संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं, अपनी राय साझा करें और दूसरों को भी प्रेरित करें कि वे अपने भीतर की शांति को पहचानें और समाज में सकारात्मक ऊर्जा फैलाने का हिस्सा बनें।

📥 Download E-Paper

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!

News dekho specials


IMG-20251223-WA0009
IMG-20250723-WA0070
आगे पढ़िए...
News dekho specials

नीचे दिए बटन पर क्लिक करके हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें


Binod Kumar

लावालोंग, चतरा

Related News

ये खबर आपको कैसी लगी, अपनी प्रतिक्रिया दें

Back to top button
error: