
#कोलेबिरा #महिलादिवससमारोह : टूटीकेल गांव में महिलाओं के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में सशक्तिकरण का संदेश दिया गया।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड अंतर्गत टूटीकेल गांव में महिलाओं के सम्मान में विशेष समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिला परिषद अध्यक्ष सह झामुमो जिला महिला मोर्चा अध्यक्षा रोस प्रतिमा सोरेंग मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। इस दौरान महिलाओं की भूमिका, शिक्षा और आत्मनिर्भरता को लेकर जागरूकता का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और महिला समूहों की बड़ी भागीदारी देखी गई, जिससे महिला सशक्तिकरण के प्रति उत्साह झलका।
- कोलेबिरा प्रखंड के टूटीकेल गांव में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला सम्मान समारोह आयोजित।
- कार्यक्रम में जिला परिषद अध्यक्ष रोस प्रतिमा सोरेंग मुख्य अतिथि के रूप में हुईं शामिल।
- विशिष्ट अतिथि के रूप में मुखिया सुशीला डांग और मुखिया जिरेन डांग की उपस्थिति रही।
- महिलाओं ने पारंपरिक गीत-नृत्य से अतिथियों का स्वागत कर कार्यक्रम को बनाया खास।
- समारोह में महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर विस्तृत चर्चा हुई।
- जेएसएलपीएस की कई सदस्याओं सहित सैकड़ों ग्रामीण महिलाएं कार्यक्रम में शामिल रहीं।
कोलेबिरा प्रखंड के टूटीकेल गांव में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं के सम्मान में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में क्षेत्र की बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया और महिला सशक्तिकरण के महत्व पर चर्चा की गई। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में जिला परिषद अध्यक्ष सह झामुमो जिला महिला मोर्चा अध्यक्षा रोस प्रतिमा सोरेंग उपस्थित रहीं, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में टूटीकेल की मुखिया सुशीला डांग और ऐडेगा की मुखिया जिरेन डांग भी शामिल हुईं। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं की भूमिका, शिक्षा और आत्मनिर्भरता जैसे विषयों को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें सामने आईं।
पारंपरिक गीत और नृत्य के साथ हुआ अतिथियों का स्वागत
कार्यक्रम की शुरुआत गांव की महिला समूहों द्वारा पारंपरिक गीत और नृत्य के साथ की गई। ग्रामीण महिलाओं ने उत्साह और उमंग के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुति दी, जिससे पूरे माहौल में उत्सव का रंग घुल गया।
अतिथियों के स्वागत के लिए महिलाओं ने फूल-माला और गुलदस्ता भेंट किया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने तालियों की गूंज के साथ कार्यक्रम की शुरुआत का स्वागत किया। कार्यक्रम में ग्रामीण परिवेश की संस्कृति और परंपराओं की झलक भी देखने को मिली, जिसने आयोजन को और भी खास बना दिया।
महिलाओं के सशक्तिकरण पर रोस प्रतिमा सोरेंग का संदेश
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि रोस प्रतिमा सोरेंग ने महिलाओं की भूमिका को समाज और राष्ट्र के विकास में बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं शिक्षित और आत्मनिर्भर बनती हैं तो पूरा समाज आगे बढ़ता है।
रोस प्रतिमा सोरेंग ने कहा: “महिलाओं का सशक्त और आत्मनिर्भर होना समाज और देश के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है। आज महिलाएं शिक्षा, राजनीति, व्यवसाय और समाज सेवा सहित हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं।”
उन्होंने महिलाओं से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने कहा कि महिलाओं को संगठित होकर समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
रोस प्रतिमा सोरेंग ने यह भी बताया कि सरकार महिलाओं के उत्थान के लिए कई योजनाएं चला रही है। इन योजनाओं का लाभ उठाकर महिलाएं आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक रूप से मजबूत बन सकती हैं और अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं।
जनप्रतिनिधियों ने भी महिलाओं को किया प्रेरित
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद टूटीकेल की मुखिया सुशीला डांग और ऐडेगा की मुखिया जिरेन डांग ने भी महिलाओं को संबोधित किया। उन्होंने महिलाओं को शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक भागीदारी के महत्व के बारे में बताया।
दोनों जनप्रतिनिधियों ने कहा कि आज के समय में महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं और उन्हें इन अवसरों का लाभ उठाकर समाज के विकास में योगदान देना चाहिए। उन्होंने महिलाओं को अपने बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।
महिला समूहों की सक्रिय भागीदारी
इस कार्यक्रम में गांव की बड़ी संख्या में महिलाओं की उपस्थिति रही। महिला समूहों ने कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लिया और महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और आत्मनिर्भरता जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम में जेएसएलपीएस से वीणा देवी, विभा देवी, बिनीता देवी, संध्या देवी, पुष्पा अग्रवाल, संगीता देवी, लीमा जोजो, ललिता कुल्लू, सुप्रिया सुरीन, ब्रिजीट कंडुलना, प्रमिला देवी, नंदनी देवी, जुलियानी डांग, इमिलिया टेटे, रश्मि कंडुलना और बहलेन बारला सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण महिलाएं मौजूद थीं।
महिलाओं ने इस तरह के आयोजनों को समाज में जागरूकता बढ़ाने और महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने वाला बताया। कार्यक्रम के दौरान आपसी संवाद और विचारों के आदान-प्रदान के माध्यम से महिलाओं ने अपने अनुभव भी साझा किए।
न्यूज़ देखो: महिला सशक्तिकरण की दिशा में बढ़ते कदम
टूटीकेल गांव में आयोजित यह महिला सम्मान समारोह इस बात का संकेत है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी अब महिलाओं की भूमिका और उनके अधिकारों को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। ऐसे कार्यक्रम महिलाओं को एक मंच देते हैं जहां वे अपनी समस्याएं साझा कर सकती हैं और समाधान के रास्ते तलाश सकती हैं।
साथ ही यह भी जरूरी है कि सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचे, ताकि महिलाएं इनका पूरा लाभ उठा सकें। अगर इस तरह के कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित होते रहें तो निश्चित रूप से ग्रामीण समाज में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।
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महिलाओं की ताकत बने समाज की नई पहचान
महिलाएं समाज की आधी आबादी ही नहीं, बल्कि विकास की मजबूत आधारशिला हैं। जब महिलाएं शिक्षित, जागरूक और आत्मनिर्भर बनती हैं तो पूरा परिवार और समाज आगे बढ़ता है।
ऐसे कार्यक्रम यह याद दिलाते हैं कि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के लिए हमें निरंतर प्रयास करते रहना होगा। हर गांव और हर समाज में महिलाओं को समान अवसर और सम्मान मिलना चाहिए।






