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गिरिडीह में याद-ए-मुजाहिदीन-ए-आजादी कॉन्फ्रेंस आयोजित स्वतंत्रता संग्राम पर वक्ताओं ने रखे विचार

#गिरिडीह #स्वतंत्रता : टाउन हॉल में हुआ भव्य आयोजन, विभिन्न राज्यों से आए वक्ताओं ने लिया हिस्सा
  • जमीयत उलेमा गिरिडीह के तत्वावधान में कार्यक्रम हुआ।
  • टाउन हॉल में याद-ए-मुजाहिदीन-ए-आजादी कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया।
  • मौलाना अकरम क़ासमी ने की कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता।
  • विभिन्न राज्यों से आए वक्ताओं ने स्वतंत्रता संग्राम पर विचार रखे।
  • वक्ताओं ने कहा आज़ादी एक जिम्मेदारी है, केवल ऐतिहासिक घटना नहीं।

गिरिडीह के टाउन हॉल में रविवार को एक भव्य आयोजन हुआ, जहां जमीयत उलेमा गिरिडीह के तत्वावधान में “याद-ए-मुजाहिदीन-ए-आजादी कॉन्फ्रेंस” का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आए वक्ताओं ने हिस्सा लिया और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।

सम्मेलन का महत्व

इस कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य था स्वतंत्रता संग्राम के उन शहीदों को याद करना जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर देश को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि यह आयोजन केवल स्मृति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि नई पीढ़ी को इस संघर्ष से प्रेरणा लेनी चाहिए।

मौलाना अकरम क़ासमी की अध्यक्षता

कांफ्रेंस की अध्यक्षता मौलाना अकरम क़ासमी ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भारत की आजादी में हर धर्म, जाति और वर्ग के लोगों ने योगदान दिया है।

मौलाना अकरम क़ासमी: “आज़ादी सिर्फ एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि यह एक जिम्मेदारी है। हमें इसे संभालकर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है।”

वक्ताओं के विचार

विभिन्न राज्यों से आए विद्वानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस सम्मेलन में भाग लिया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के मायने सिर्फ ब्रिटिश शासन से आजादी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह हमें सिखाता है कि समाज में समानता, न्याय और भाईचारा बनाए रखना भी हमारी जिम्मेदारी है।

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

कांफ्रेंस में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि युवा पीढ़ी को स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और त्याग से अवगत कराना बेहद जरूरी है। वक्ताओं ने कहा कि यदि हम इतिहास से सीख लेंगे तो वर्तमान और भविष्य को बेहतर बना सकेंगे।

न्यूज़ देखो: स्वतंत्रता का सही मायना समझना होगा

इस आयोजन ने साफ किया कि आजादी का असली अर्थ सिर्फ राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारियों को निभाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अगर हम अपनी आजादी को सही मायनों में जीना चाहते हैं तो हमें नफरत, भेदभाव और अन्याय से लड़ने की हिम्मत रखनी होगी।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

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आजादी की जिम्मेदारी हम सबकी

अब समय है कि हम सब मिलकर उस स्वतंत्रता को मजबूत करें, जिसके लिए हमारे पूर्वजों ने बलिदान दिया। आइए अपनी राय कॉमेंट में लिखें और इस खबर को साझा करें ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस संदेश से प्रेरित हो सकें।

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Surendra Verma

डुमरी, गिरिडीह

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