
#बरवाडीह #हाथी_आतंक : जंगल के रास्ते घर लौटते समय हाथियों ने युवक को कुचलकर मार डाला।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत छिपादोहर थाना क्षेत्र में जंगली हाथी के हमले से एक युवक की मौत हो गई। यह घटना पंचायत केड़ के ग्राम मतनाग में रविवार शाम उस समय हुई, जब युवक बाजार से लौट रहा था। अचानक हाथियों के झुंड से सामना होने पर उसे जान बचाने का मौका नहीं मिला। घटना के बाद इलाके में भय का माहौल है और ग्रामीण सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।
- छिपादोहर थाना क्षेत्र के ग्राम मतनाग में जंगली हाथी का हमला।
- मृतक की पहचान मुनेश्वर कोरवा के रूप में हुई।
- रविवार शाम करीब 4 बजे की बताई जा रही घटना।
- बाजार से लौटते समय जंगल के कच्चे रास्ते में हुआ सामना।
- वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, ₹50,000 की तत्काल सहायता दी गई।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड में एक बार फिर हाथियों का आतंक जानलेवा साबित हुआ है। छिपादोहर थाना क्षेत्र के पंचायत–केड़ अंतर्गत ग्राम मतनाग में जंगली हाथी के हमले से एक युवक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की पहचान मतनाग निवासी मुनेश्वर कोरवा के रूप में की गई है। इस घटना से पूरे गांव और आसपास के इलाकों में भय और आक्रोश का माहौल है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार शाम करीब 4 बजे मुनेश्वर कोरवा केड़ चौक बाजार से रोजमर्रा का सामान खरीदकर अपने गांव मतनाग लौट रहे थे। गांव तक पहुंचने के लिए उन्हें जंगल से होकर गुजरने वाले कच्चे रास्ते का सहारा लेना पड़ता है। इसी दौरान जंगल में अचानक जंगली हाथियों का एक झुंड सामने आ गया।
जंगल में अचानक हुआ हाथियों से सामना
ग्रामीणों के अनुसार, मुनेश्वर कोरवा के सामने जैसे ही हाथियों का झुंड आया, उन्हें संभलने या भागने का मौका तक नहीं मिला। हाथियों ने युवक को घेर लिया और बेरहमी से कुचल दिया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। घटना इतनी अचानक हुई कि आसपास मौजूद लोग भी कुछ कर नहीं सके।
घटना की खबर फैलते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल की ओर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। युवक की मौत की सूचना से परिवार में कोहराम मच गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची
घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग हरकत में आया। रेंजर अजय टोप्पो के नेतृत्व में प्रभारी वनपाल राम कश्यप और नवीन कुमार के साथ वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास के इलाके में हाथियों की गतिविधियों का जायजा लिया।
वन विभाग की ओर से मृतक के परिजनों को तत्काल सहायता के रूप में ₹50,000 की राशि दी गई। अधिकारियों ने आगे नियमानुसार मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही।
रेंजर अजय टोप्पो ने कहा: “घटना बेहद दुखद है। हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है और प्रभावित परिवार को नियमानुसार सहायता दी जाएगी।”
ग्रामीणों में दहशत, आवागमन हुआ मुश्किल
घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में भय का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल के रास्ते आवागमन करना अब जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है। कई गांवों के लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बाजार आने-जाने को मजबूर हैं, लेकिन हाथियों की लगातार मौजूदगी से डर बना हुआ है।
ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले भी इस क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही देखी गई है, लेकिन इस तरह की जानलेवा घटना ने लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया है। खासकर शाम और सुबह के समय जंगल के रास्तों पर निकलना अब खतरनाक हो गया है।
स्थायी समाधान की मांग
ग्रामीणों ने वन विभाग और जिला प्रशासन से हाथियों की गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए ठोस और स्थायी उपाय करने की मांग की है। उनका कहना है कि हाथी प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ाई जाए, वैकल्पिक सुरक्षित मार्ग की व्यवस्था हो और ग्रामीणों को समय रहते अलर्ट किया जाए।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि केवल घटना के बाद सहायता देना काफी नहीं है, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पूर्व तैयारी और दीर्घकालिक योजना जरूरी है।


न्यूज़ देखो: हाथी–मानव संघर्ष पर कब लगेगी लगाम?
बरवाडीह क्षेत्र में हुई यह घटना एक बार फिर मानव और वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता को उजागर करती है। जंगलों से सटे गांवों में सुरक्षा इंतजाम अब भी नाकाफी दिख रहे हैं। सवाल है कि क्या ऐसी घटनाओं से सबक लेकर स्थायी समाधान निकाला जाएगा? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सुरक्षा जरूरी है, सिर्फ संवेदना नहीं
एक जान चली गई, लेकिन खतरा अब भी बरकरार है।
ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी दहशत में नहीं चलनी चाहिए।
समय है कि प्रशासन और वन विभाग मिलकर ठोस कदम उठाएं।
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